अरुणाचल से 2000 किमी का सफर तय कर प्रतापगढ़ पहुंचा ‘जात्रा सिंह’, मां की इच्छा पूरी करने घर लाए बीजेपी नेता अशोक त्रिपाठी
भाजपा नेता अशोक त्रिपाठी कानूनी अनुमति मिलने के बाद अपनी मां की इच्छा पूरी करते हुए हाथी जात्रा सिंह को अरुणाचल प्रदेश से प्रतापगढ़ लेकर आए हैं।
\गुरुवार दोपहर उत्तर प्रदेश के उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज इलाके के छींटपुर गांव में उस समय हलचल बढ़ गई, जब एक ट्रक के पीछे दो काली गाड़ियां गांव में दाखिल हुईं। जैसे ही ट्रक रुका, गांव में “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे गूंज उठे। दरअसल, ट्रक में 2000 किलोमीटर दूर अरुणाचल प्रदेश से लाया गया हाथी ‘जात्रा सिंह’ सवार था। पांच दिन की लंबी यात्रा के बाद हाथी गांव पहुंचा। गाजे-बाजे के साथ उसे ट्रक से उतारा गया और फूल बरसाकर स्वागत किया गया। पहले दिन उसे आराम दिया गया, फिर नहलाकर मंदिर में पूजन कराया गया।
पिता की स्मृति से जुड़ी है कहानी
हाथी को गांव लाने वाले बीजेपी नेता अशोक त्रिपाठी हैं। यह पूरा मामला उनके पिता दिवंगत राम प्रकाश त्रिपाठी के सम्मान से जुड़ा है। उनके पिता अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग जिलों में प्रधानाचार्य रहे थे। निधन के बाद साल 2023 में नामसाई शहर के लोगों ने उनकी स्मृति में उनकी पत्नी केवल देवी को ‘जात्रा सिंह’ उपहार में दिया था। हाथी की देखरेख के लिए अशोक त्रिपाठी ने अरुणाचल प्रदेश में दो कुशल महावत रखे थे और रहने-खाने की पूरी व्यवस्था की थी।
मां की इच्छा पर गांव लाया गया हाथी
करीब दो साल पहले अशोक त्रिपाठी की मां ने इच्छा जताई कि हाथी को अपने गांव लाया जाए। इसके बाद अक्टूबर 2024 में हाथी को लाने के लिए नियमानुसार आवेदन किया गया। करीब डेढ़ साल की प्रक्रिया के बाद 6 फरवरी 2026 को अनुमति मिली। दो दिन बाद हाथी को ट्रक में बैठाकर असम, बंगाल और बिहार होते हुए 12 फरवरी को प्रतापगढ़ पहुंचाया गया। इस यात्रा में करीब 1.5 लाख रुपये खर्च हुए।
कौन हैं अशोक त्रिपाठी?
अशोक त्रिपाठी प्रतापगढ़ के बड़े व्यवसायी हैं। उनका होटल व्यवसाय अरुणाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी है। वह पहले बसपा में थे और 2017 में विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। 2019 में सपा-बसपा गठबंधन से लोकसभा चुनाव भी लड़ा, पर जीत नहीं मिली। 2022 से पहले वह बीजेपी में शामिल हो गए।
हाथी रखने के नियम
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत हाथी खरीदने या पकड़ने पर रोक है। यदि हाथी उपहार में मिले, तब भी वन विभाग को सूचना देना जरूरी है। हाथी के रहने, खाने और देखभाल की पूरी जानकारी देनी होती है। महावत को भी विशेष अनुमति लेनी पड़ती है। सभी नियम पूरे होने के बाद ही हाथी रखने की इजाजत मिलती है।
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