भारत-अमेरिका ट्रेड डील का असर: भारत ने घटाया रूसी तेल आयात, चीन बना सस्ते रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार
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भारत और अमेरिका के बीच हुई नई ट्रेड डील का सीधा असर अब वैश्विक तेल बाजार पर दिखने लगा है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ में से 25 प्रतिशत टैरिफ हटाए हैं, लेकिन इसके बदले भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदना कम करना पड़ा है। समझौते की शर्तों के अनुसार भारत को अब अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा तेल आयात करना होगा। इसका नतीजा यह हुआ कि भारत ने रूसी तेल की खरीद में बड़ी कटौती की है। वहीं रूस अब अपना ज्यादा तेल चीन को बेचने पर मजबूर हो गया है।
भारत के पीछे हटते ही चीन की खरीद बढ़ी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस हफ्ते रूस से चीन को होने वाले तेल निर्यात पर भारी छूट दी जा रही है। रूस दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल खरीदार चीन से मांग बढ़ाने के लिए कीमतें घटा रहा है, ताकि भारत से घटती बिक्री की भरपाई हो सके। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से जूझ रहा रूस पहले ही भारत की घटती मांग से परेशान है, जिसके कारण उसका तेल टैंकरों में जमा होता जा रहा है।
जनवरी 2026 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची चीन की खरीद
जनवरी 2026 रूस-चीन तेल व्यापार के लिए सबसे मजबूत महीना रहा। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में चीन ने समुद्री रास्ते से रूस से रिकॉर्ड 17 लाख बैरल प्रति दिन कच्चा तेल आयात किया। वहीं OilX के मुताबिक यह आंकड़ा 16.4 लाख बैरल प्रति दिन रहा, जो मार्च 2024 के बाद सबसे ज्यादा है। ऑइलप्राइसडॉटकॉम की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी में रूस ने समुद्र के रास्ते चीन को 18.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल भेजा, जो जनवरी 2025 के पिछले रिकॉर्ड से भी ज्यादा है।
चीनी रिफाइनरों को हो रहा सबसे ज्यादा फायदा
जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों, जिनमें नताशा केनेवा भी शामिल हैं, ने बताया कि चीन के स्वतंत्र रिफाइनर इस स्थिति का सबसे ज्यादा फायदा उठा रहे हैं। भारी छूट और घरेलू नीतियों के सहारे वे रूस से आने वाले ज्यादातर तेल को खरीद रहे हैं। इससे उनकी कमाई बढ़ रही है, उत्पादन बढ़ रहा है और चीन के रणनीतिक तेल भंडार भी मजबूत हो रहे हैं।
भारत पूरी तरह आयात बंद नहीं करेगा
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत रूस से तेल पूरी तरह बंद नहीं करेगा। जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि भारत अब भी रोजाना 8 से 10 लाख बैरल रूसी तेल खरीदेगा, जो उसके कुल कच्चे तेल आयात का 17 से 21 प्रतिशत होगा। हालांकि यह पहले के मुकाबले काफी कम है। पिछले साल जून में भारत करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल खरीद रहा था। केप्लर के अनुसार जनवरी में यह घटकर 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम है।
रूस ने चीन के लिए और बढ़ाई छूट
सूत्रों के अनुसार चीन को भेजे जाने वाले रूसी ESPO Blend तेल पर छूट बढ़कर करीब 9 डॉलर प्रति बैरल हो गई है, जो पहले 7 से 8 डॉलर थी। वहीं बाल्टिक सागर से निर्यात होने वाले यूराल्स ग्रेड तेल पर छूट लगभग 12 डॉलर प्रति बैरल है, जो आमतौर पर भारत को भेजा जाता था। जानकारों का कहना है कि भारत की खरीद और घटने पर ये छूट और भी बढ़ सकती है।
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