महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक का विशेष महत्व, जानें पूजन सामग्री और संपूर्ण विधि
महाशिवरात्रि 2026 के लिए रुद्राभिषेक पूजन की संपूर्ण सामग्री और चरण-दर-चरण विधि जानें। आवश्यक सामग्री और पूजा की उचित विधि के बारे में जानकारी प्राप्त करें।
महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव धरती के सभी शिवलिंगों में विराजमान होते हैं। जो भक्त इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से रुद्राभिषेक करते हैं, उनके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। रुद्राभिषेक में शिवलिंग का पवित्र द्रव्यों से अभिषेक किया जाता है और रुद्राष्टाध्यायी या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ किया जाता है। इसलिए पूजा के समय कोई सामग्री छूट न जाए, इसके लिए पूरी सूची पहले से तैयार रखना जरूरी है।
रुद्राभिषेक के लिए जरूरी पूजन सामग्री
रुद्राभिषेक में रूईबत्ती, घी, कपूर, सिंदूर, लौंग, इलायची, सुपारी, अबीर, रोली, हल्दी, कलावा, गुलाल, लाल और श्वेत चंदन, अष्टगंध, कुमकुम, शहद और चावल की जरूरत होती है। इसके अलावा पार्वती जी के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, इत्र, चमेली का तेल, गंगाजल, गुलाबजल, केवड़ा जल भी रखें। कमल बीज, सप्तधान्य, काला तिल, जौ, गुर्च, पीला सरसों, जनेऊ, धूपबत्ती, भस्म, शमीपत्र, भांगगोला और बड़े दोने भी जरूरी हैं। पंचमेवा, चीनी, चांदी का सिक्का या आभूषण श्रद्धानुसार रखें। भोलेनाथ के लिए धोती-गमछा, गन्ने का रस, पान के पत्ते, फल, मिठाई और विभिन्न प्रकार के फूल जैसे गुलाब, गेंदा, चांदनी, नवरंग और मदार के पुष्प अर्पित किए जाते हैं। धतूरा कम से कम 11 और बेलपत्र कम से कम 108 रखें। दूध 5 से 7 लीटर, दही 1 किलो, हरी भांग, दूर्वा, फूलमाला और रुद्राक्ष माला भी आवश्यक है। यदि मिट्टी का शिवलिंग बनाना हो तो कुम्हार की गीली मिट्टी 5 से 7 किलो रखें।
रुद्राभिषेक की संपूर्ण विधि
सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान पर चौकी रखकर परांत में शिवलिंग स्थापित करें। जल लेकर संकल्प करें। फिर गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर चढ़ाएं। हर द्रव्य अर्पित करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। फिर चंदन, भस्म, पुष्प और बेलपत्र चढ़ाएं। धतूरा और भांग अर्पित कर फूलमाला पहनाएं। 108 बार मंत्र जप करें और संभव हो तो रुद्राष्टाध्यायी या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें। अंत में कपूर से आरती करें, फल-मिठाई का भोग लगाएं और क्षमा प्रार्थना के साथ प्रसाद ग्रहण करें।
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