रिलायंस इंडस्ट्रीज को अमेरिका से वेनेजुएला का तेल खरीदने की मंजूरी, क्रूड लागत घटने की उम्मीद
रिलायंस इंडस्ट्रीज को वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए अमेरिका से सामान्य लाइसेंस मिल गया है, जिससे कच्चे तेल की लागत कम होने और शोधन कार्यों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय कामयाबी मिली है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने रिलायंस को वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए जनरल लाइसेंस जारी कर दिया है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति Nicolás Maduro को गिरफ्तार किया था। इसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि वेनेजुएला की एनर्जी इंडस्ट्री पर लगी पाबंदियों में ढील दी जाएगी, ताकि दोनों देशों के बीच 2 अरब डॉलर की ऑयल सप्लाई डील संभव हो सके। साथ ही अमेरिका ने वेनेजुएला की ऑयल इंडस्ट्री के पुनर्गठन के लिए 100 अरब डॉलर की योजना भी बनाई है।
जनरल लाइसेंस का क्या मतलब है?
रिलायंस को मिला यह जनरल लाइसेंस कंपनी को वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों का उल्लंघन किए बिना सीधे तेल खरीदने की अनुमति देता है। कंपनी खरीदे गए तेल को आगे बेच भी सकती है। इससे रिलायंस की क्रूड ऑयल लागत कम होने की उम्मीद है। रिलायंस के पास दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है, जो हर तरह के कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम है।
पहले भी किया था आवेदन
रिलायंस ने इस साल जनवरी में लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। हालांकि कंपनी ने इस विषय में भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया। यूएस ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल ने भी तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस महीने रिलायंस ने वेनेजुएला से 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। यह खरीद ट्रेडर कंपनी Vitol के माध्यम से की गई थी। Vitol और Trafigura को पहले ही अमेरिका से लाइसेंस मिल चुका है।
रूस की तुलना में सस्ता तेल
सूत्रों का कहना है कि वेनेजुएला से सीधे तेल खरीदने पर रिलायंस को अच्छी बचत होगी, क्योंकि यह तेल रूस के मुकाबले सस्ता है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ हटा दिया था। यह टैरिफ रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया था। माना जा रहा है कि अब भारत अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदेगा।
रिफाइनिंग क्षमता और भविष्य की दिशा
रिलायंस पहले भी वेनेजुएला से नियमित रूप से तेल खरीदती थी, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते पिछले साल की शुरुआत में यह खरीद बंद कर दी गई थी। कंपनी की दो रिफाइनरीज में रोजाना 14 लाख बैरल कच्चा तेल प्रोसेस करने की क्षमता है। हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच एक ट्रेड डील की भी घोषणा हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि भारतीय कंपनियां रूस से तेल की खरीद कम कर सकती हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
