दाह संस्कार के समय घड़ा फोड़ने के पीछे क्या है मान्यता? जानिए शास्त्रों में क्या लिखा है

हिंदू धर्म में कुल 16 संस्कार बताए गए हैं। इनमें सबसे अंतिम संस्कार दाह संस्कार होता है, जिसे अंतिम संस्कार कहा जाता है। किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसकी आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए यह संस्कार विधि-विधान से किया जाता है।

Feb 13, 2026 - 14:40
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दाह संस्कार के समय घड़ा फोड़ने के पीछे क्या है मान्यता? जानिए शास्त्रों में क्या लिखा है

Antim Sanskar Ke Niyam: हिंदू धर्म में कुल 16 संस्कार बताए गए हैं। इनमें सबसे अंतिम संस्कार दाह संस्कार होता है, जिसे अंतिम संस्कार कहा जाता है। किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसकी आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए यह संस्कार विधि-विधान से किया जाता है। अंतिम संस्कार के समय कई परंपराएं निभाई जाती हैं। इन्हीं में से एक है मुखाग्नि देने से पहले पानी से भरे मिट्टी के घड़े को फोड़ना। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसका गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।

क्या है घड़ा फोड़ने की परंपरा?
धर्म शास्त्रों के अनुसार, जब मृतक के शरीर को चिता पर रखा जाता है, तो मुखाग्नि देने से पहले एक विशेष प्रक्रिया की जाती है। परिवार का प्रमुख सदस्य या जो मुखाग्नि देता है, वह छेद किए हुए मिट्टी के घड़े में पानी भरकर उसे कंधे पर रखता है। इसके बाद वह चिता की दक्षिणावर्त दिशा में परिक्रमा करता है। अंत में एक परिक्रमा वामावर्त दिशा में भी की जाती है। परिक्रमा पूरी होने के बाद पानी से भरे घड़े को पीछे की ओर फेंक दिया जाता है, जिससे वह टूट जाता है।

धार्मिक और आध्यात्मिक अर्थ
शास्त्रों में मिट्टी के घड़े को मृत शरीर का प्रतीक माना गया है, जबकि उसमें भरे पानी को आत्मा का प्रतीक बताया गया है। जब परिक्रमा के दौरान घड़े से पानी धीरे-धीरे टपकता है, तो यह शरीर और आत्मा के संबंध के कमजोर होने का संकेत माना जाता है। घड़ा फूटने का अर्थ है कि अब आत्मा को शरीर से पूरी तरह अलग होकर अपनी आगे की यात्रा पर जाना है। मानव शरीर पंचतत्व में विलीन हो जाता है। घड़ा फोड़ना यह दर्शाता है कि मृतक के सभी सांसारिक संबंध समाप्त हो चुके हैं और आत्मा को मोक्ष की ओर बढ़ना चाहिए। यह चरण अंतिम संस्कार का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी भारतीय पत्रकार, कंटेंट राइटर, एंकर और मीडिया प्रोफेशनल हैं। वे डिजिटल पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और न्यूज़ प्रोडक्शन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने Zee News, Suman TV और UP News Network जैसे मीडिया संस्थानों के साथ कार्य किया है। वे राजनीतिक, सामाजिक और समसामयिक विषयों पर आधारित डिजिटल कंटेंट और ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा अश्वनी तिवारी का जन्म 4 फरवरी 1997 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज, भेलूपुर, वाराणसी से प्राप्त की। हाई स्कूल तथा इंटरमीडिएट की परीक्षाएं उन्होंने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से स्नातक (B.A.) की डिग्री प्राप्त की तथा आगे चलकर मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पूरी की। अश्वनी तिवारी ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कंटेंट राइटिंग और डिजिटल मीडिया से की। उन्होंने 10 दिसंबर 2023 से 15 मार्च 2024 तक India Watch, लखनऊ में कंटेंट राइटर के रूप में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने समाचार लेखन और डिजिटल मीडिया कंटेंट पर कार्य किया। इसके बाद उन्होंने 7 मई 2024 से 9 जुलाई 2024 तक Zee News, नोएडा में कंटेंट राइटर के रूप में इंटर्नशिप की। इस दौरान वे न्यूज़ स्क्रिप्ट, डिजिटल कंटेंट और मीडिया रिसर्च से जुड़े रहे। अक्टूबर 2024 से अप्रैल 2025 तक उन्होंने Suman TV, हैदराबाद में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया। यहां उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर आधारित समाचार एवं डिजिटल कंटेंट तैयार किए। वर्तमान में UP News Network से सब एडिटर के रूप में जुड़े, जहां उन्होंने कंटेंट राइटिंग, एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग का कार्य किया। इस दौरान वे ‘खरी खोटी’ नामक विशेष शो का भी हिस्सा रहे। उन्होंने कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग तथा वीडियो प्रस्तुति की। वर्तमान में अश्वनी तिवारी मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। अश्वनी तिवारी डिजिटल पत्रकारिता और न्यूज़ प्रोडक्शन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनकी विशेषज्ञता कंटेंट राइटिंग, एंकरिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया आधारित न्यूज़ प्रस्तुति में मानी जाती है।