राहु का रत्न गोमेद: किन राशियों के लिए शुभ और कैसे करें धारण
जानिए किन राशियों के लोग गोमेद (हेसोनाइट) पहन सकते हैं, इसके फायदे, पहनने के नियम और राहु से संबंधित ज्योतिषीय महत्व।
ज्योतिष शास्त्र में हर ग्रह से जुड़ा एक विशेष रत्न बताया गया है। राहु ग्रह का रत्न गोमेद माना जाता है, जिसे अंग्रेजी में हेसोनाइट कहा जाता है। यह शहद या पीले-भूरे रंग का पत्थर गार्नेट समूह का प्रमुख रत्न है। गोमेद भारत, श्रीलंका और अफ्रीका में पाया जाता है। मान्यता है कि यह रत्न राहु के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि इसे पहनने से पहले सही जानकारी और ज्योतिषीय सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि गलत तरीके से धारण करने पर लाभ की जगह हानि भी हो सकती है।
किन राशियों के लिए शुभ माना जाता है
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला और कुंभ राशि के जातकों के लिए गोमेद शुभ फलदायी माना जाता है। इन राशियों के स्वामी ग्रहों का राहु के साथ अनुकूल संबंध बताया गया है। मकर राशि या मकर लग्न वाले लोगों के लिए भी यह रत्न करियर और पद से जुड़े मामलों में सहयोग दे सकता है। वेस्टर्न एस्ट्रोलॉजी में मिथुन राशि के लिए इसे बर्थस्टोन के रूप में भी देखा जाता है।
कुंडली में राहु की स्थिति के अनुसार लाभ
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु तीसरे, छठे, दसवें या ग्यारहवें भाव में हो, तो गोमेद पहनना लाभकारी माना जाता है। ऐसी स्थिति में यह रत्न धन लाभ, प्रतियोगिता में सफलता और सामाजिक प्रभाव बढ़ाने में सहायक हो सकता है। राजनीति, वकालत, शेयर बाजार, आईटी और जोखिम से जुड़े क्षेत्रों में काम करने वालों के लिए भी इसे उपयोगी बताया गया है।
गोमेद पहनने के फायदे
गोमेद राहु के अशुभ प्रभाव को शांत करने में मदद करता है। इससे करियर और व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं। धन, पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि की संभावना रहती है। मानसिक तनाव, भय और बेचैनी कम हो सकती है। पेट से जुड़ी समस्याओं और पुराने दर्द में भी राहत मिल सकती है। साथ ही आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता मजबूत होती है और गलत संगति से दूर रहने में सहायता मिलती है।
धारण करने का सही तरीका
गोमेद को शनिवार के दिन चांदी या अष्टधातु की अंगूठी में जड़वाकर मध्यमा उंगली में पहनने की परंपरा है। इसे मूंगा, पुखराज, माणिक्य या मोती के साथ नहीं पहनना चाहिए। पहनने से पहले गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करें और “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र का जाप करें। हमेशा विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही इसे धारण करें।
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