शादी भारत में, जिंदगी यहीं… फिर वोट क्यों नहीं? नेपाल मूल की बहुओं पर संकट, 9 जिले प्रभावित

उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में नेपाल मूल की महिलाएं एसआईआर 2025-26 मतदाता सूची सत्यापन और नागरिकता संबंधी मुद्दों के कारण मतदान के अधिकार से वंचित हो रही हैं।

Feb 4, 2026 - 10:46
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शादी भारत में, जिंदगी यहीं… फिर वोट क्यों नहीं? नेपाल मूल की बहुओं पर संकट, 9 जिले प्रभावित

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से सटे जिलों में ‘रोटी-बेटी’ का रिश्ता सदियों पुराना रहा है। यहां नेपाल से दुल्हनें लाना और अपनी बेटियों की शादी नेपाल में करना आम सामाजिक परंपरा है। लेकिन अब चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR 2025-26 ने नेपाल मूल की बहुओं के सामने बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। वर्षों से भारत में रह रहीं, परिवार संभाल रहीं और समाज का हिस्सा बन चुकी कई महिलाएं मतदाता सूची से बाहर हो रही हैं। इसका सीधा असर उनके वोट देने के अधिकार पर पड़ रहा है।

SIR प्रक्रिया में कहां फंस रही हैं नेपाल मूल की बहुएं
चुनाव आयोग SIR के तहत 2003 की मतदाता सूची के आधार पर नामों का सत्यापन कर रहा है। नेपाल से आई अधिकांश महिलाओं के पास 2003 की सूची में न तो अपना नाम है और न ही माता-पिता की एपिक आईडी, क्योंकि उस समय वे नेपाल में रहती थीं। पहले फॉर्म-6 या 6A में भारत के बाहर जन्म स्थान दर्ज करने का विकल्प भी सीमित था। इसी कारण कई महिलाओं को ‘नो मैपिंग’ का नोटिस मिल रहा है और उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।

सीमावर्ती जिलों में सबसे ज्यादा असर
यह समस्या खासतौर पर यूपी के सीमावर्ती जिलों में सामने आ रही है। गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, गोंडा और पीलीभीत जैसे नौ जिलों में नेपाल से बड़ी संख्या में शादियां होती हैं। इन इलाकों के गांवों में हजारों परिवार ऐसे हैं, जहां बहुएं नेपाल से आई हैं। महराजगंज के नौतनवा और पीलीभीत के खरुआ जैसे क्षेत्रों में कई महिलाएं 5, 10 और 15 साल से भारत में रह रही हैं, लेकिन अब उनका नाम वोटर लिस्ट से कट रहा है।

9 साल पहले शादी, फिर भी नाम गायब
पीलीभीत जिले की पूजा, जो नेपाल के कंचनपुर की रहने वाली हैं, ने 9 साल पहले भारत में शादी की थी। उन्होंने पिछले पंचायत और लोकसभा चुनाव में वोट भी डाला था। लेकिन SIR के दौरान 2003 की एपिक आईडी मांगे जाने पर उनका नाम सूची से बाहर हो गया। यही स्थिति महराजगंज, बहराइच और अन्य जिलों में भी देखने को मिल रही है। महिलाओं के पास आधार, राशन कार्ड और बैंक खाता है, फिर भी वे मतदाता नहीं मानी जा रहीं।

कानूनी अड़चन क्या है
भारत-नेपाल संधि 1950 दोनों देशों के नागरिकों को रहने और काम करने की छूट देती है, लेकिन मतदान का अधिकार केवल भारतीय नागरिकता से जुड़ा है। नेपाल से आई महिलाओं को विवाह के बाद नागरिकता अधिनियम की धारा 5(1)(c) के तहत अंगीकृत नागरिकता लेनी होती है। यह प्रक्रिया जटिल और लंबी है। SIR में नागरिकता प्रमाण की सख्ती के कारण कई योग्य महिलाएं वोट देने के अधिकार से वंचित हो रही हैं।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी, UP News Network में सब-एडिटर हैं। वे राजनीति, क्राइम, स्पोर्ट्स, ज्योतिष और धार्मिक विषयों से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से काम करते हैं। मीडिया जगत में उन्हें 2 वर्ष का अनुभव है। उन्होंने रिपोर्टिंग, स्पेशल स्टोरीज़ और स्पेशल खरी-खोटी जैसे कार्यक्रमों पर काम किया है। कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एंकरिंग का भी अनुभव रखते हैं। SumanTV, Hyderabad (डिजिटल प्लेटफॉर्म) के साथ कार्य कर चुके हैं और ZEE News व India Watch जैसे प्रतिष्ठित न्यूज़ संस्थानों में इंटर्नशिप का अनुभव हासिल किया है। पिछले 1 साल से वे यूपी न्यूज़ नेटवर्क (डिजिटल) से जुड़े हैं और उत्तर प्रदेश से जुड़ी अहम खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। एमजेएमसी की पढ़ाई कर चुके अश्वनी तिवारी की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, ज़मीनी मुद्दों और दर्शकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने वाली पत्रकारिता से है। उनकी जन्मस्थली वाराणसी है, जबकि कार्य के दौरान वे कई शहरों में रहकर पत्रकारिता कर चुके हैं।