यूपी में पंचायत चुनाव तय समय पर, मंत्री ओमप्रकाश राजभर का बड़ा दावा
उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर का दावा है कि पंचायत चुनाव 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले समय पर होंगे और मतदान मतपत्रों के माध्यम से होगा।
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों पर पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मंगलवार को बड़ा बयान देकर विराम लगा दिया है। उन्होंने साफ कहा कि प्रदेश सरकार पंचायत चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है और ये चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे। वाराणसी दौरे पर पहुंचे मंत्री राजभर ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव के साथ कराने की कोई योजना नहीं है। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और भावी उम्मीदवारों की गतिविधियां भी बढ़ने लगी हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले होंगे पंचायत चुनाव
पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले कराए जाएंगे। इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पंचायत चुनाव ईवीएम से नहीं, बल्कि मतपत्र यानी बैलेट पेपर से कराए जाएंगे। बैलेट पेपर छपकर सभी जिलों में पहुंच चुके हैं और जिला निर्वाचन अधिकारियों ने अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
28 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन
राजभर ने जानकारी दी कि पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 28 फरवरी 2026 को किया जाएगा। उन्होंने भावी प्रत्याशियों को सलाह दी कि अंतिम सूची जारी होने से पहले वे अपने समर्थकों के नाम मतदाता सूची में जरूर जुड़वा लें, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।
अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच पूरी होगी प्रक्रिया
मंत्री ने बताया कि पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच पूरी कर ली जाएगी। पहले चरण में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) और जिला पंचायत सदस्यों के लिए मतदान होगा। इसके बाद ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के अप्रत्यक्ष चुनाव कराए जाएंगे। इसके लिए जिलों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं और चुनाव का नोटिफिकेशन जल्द जारी किया जाएगा।
शंकराचार्य के बयान पर कड़ा जवाब
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि देश संविधान से चलेगा, किसी व्यक्ति के बयान से नहीं। संविधान के अनुसार ही सरकार चल रही है और किसी के कहने से कानून नहीं बदला जाएगा।
चुनाव टालने को लेकर अंदरूनी मंथन
हालांकि भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी और सरकार के भीतर पंचायत चुनाव समय पर कराने को लेकर मतभेद हैं। सूत्रों के अनुसार, पंचायत चुनाव में कमजोर प्रदर्शन का असर विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है। 2021 के अनुभव को देखते हुए चुनाव टालने पर भी कोर ग्रुप की बैठकों में चर्चा हुई है।
चुनाव नहीं हुए तो क्या होगा
यदि समय पर पंचायत चुनाव नहीं कराए जाते हैं तो ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल मई के पहले सप्ताह में समाप्त हो जाएगा। वहीं, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल जुलाई के पहले सप्ताह में पूरा होगा। ऐसी स्थिति में सरकार इन पदों पर प्रशासक नियुक्त कर सकती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0