सरकार को “वे” कहना पड़ेगा महंगा… सोनम वांगचुक केस से खुल गया बड़ा नियम
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की एनएसए हिरासत का बचाव करते हुए विभाजनकारी भाषा, युवाओं को कथित रूप से उकसाने और लद्दाख विरोध प्रदर्शनों में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे का हवाला दिया।
सरकार के खिलाफ प्रदर्शन या आंदोलन करने वालों को अब अपने शब्दों के चयन में बेहद सावधानी बरतनी होगी। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के मामले में सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की दलीलों ने इसी ओर इशारा किया है। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि वांगचुक के शब्द और बयान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। सरकार का कहना है कि आंदोलन के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा, युवाओं को भड़काने वाली थी। इसी आधार पर उनके खिलाफ नेशनल सिक्योरिटी एक्ट यानी NSA लगाया गया। फिलहाल सोनम वांगचुक जोधपुर जेल में बंद हैं और उनकी हिरासत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार की दलील
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच के सामने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने केंद्र सरकार को वे कहकर संबोधित किया, जिससे अलगाववादी सोच झलकती है। मेहता ने कहा कि जब कोई हम और वे की भाषा इस्तेमाल करता है, तो वह देश को बांटने की मानसिकता दिखाता है। सरकार के अनुसार, यही शब्द NSA के तहत हिरासत के लिए पर्याप्त आधार बने।
युवाओं को भड़काने के आरोप
केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन ने आरोप लगाया कि वांगचुक चाहते थे कि लद्दाख में नेपाल और बांग्लादेश जैसी हिंसक परिस्थितियां बनें। मेहता ने कहा कि वांगचुक ने Gen Z यानी युवा पीढ़ी को खून-खराबा और गृह युद्ध के लिए उकसाया। सरकार का दावा है कि उनके भाषणों का निशाना आसानी से प्रभावित होने वाले युवा थे।
विरोध, गांधी का नाम और सरकार का जवाब
पिछली सुनवाई में वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो की ओर से दलील दी गई थी कि सरकार की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा नहीं होता। इस पर तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक ने महात्मा गांधी का नाम केवल दिखावे के लिए लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई भड़काऊ भाषणों में गांधीजी का नाम कवर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, जबकि असली संदेश हिंसा भड़काने वाला होता है।
अरब स्प्रिंग और आत्मदाह का जिक्र
सरकार ने यह भी कहा कि वांगचुक ने अपने भाषणों में अरब स्प्रिंग का जिक्र किया, जिसमें भारी हिंसा और आत्मदाह की घटनाएं हुई थीं। मेहता के अनुसार, वांगचुक इसी तरह की स्थिति की उम्मीद कर रहे थे और आत्मदाह की बात कहकर अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचना चाहते थे। सरकार ने इसे अलगाववादी गतिविधि बताया।
हिरासत का कारण और मामला
सरकार ने बताया कि सितंबर 2025 में लेह में लद्दाख को राज्य और छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया। जिला मजिस्ट्रेट ने उनके भाषणों को पूरे संदर्भ में देखकर हिरासत का आदेश दिया। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई कर रहा है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
