माघ पूर्णिमा 2026: स्नान-दान और पूजा से मिलता है बत्तीस गुना पुण्य, जानिए इसका महत्व और खास उपाय
सफलता, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए माघ पूर्णिमा, स्नान, दान संबंधी अनुष्ठानों और विशेष उपायों के महत्व को जानें।
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है। हर महीने आने वाली पूर्णिमा का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन माघ महीने की पूर्णिमा को विशेष स्थान प्राप्त है। इसे माघ पूर्णिमा या माघी पूर्णिमा कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान, दान और पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। माघ पूर्णिमा को बत्तीसी पूर्णिमा भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन किया गया दान और पुण्य कार्य 32 गुना फल देता है। यही कारण है कि देशभर में श्रद्धालु इस दिन व्रत, स्नान और दान-पुण्य करते हैं।
माघ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य की वृद्धि होती है। साथ ही सभी तरह के दुख और परेशानियों से छुटकारा मिलता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा का पाठ करना भी बहुत शुभ माना गया है।
करियर और पारिवारिक सुख के लिए उपाय
धार्मिक विश्वास के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपने करियर में सफलता चाहता है, तो माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु को प्रणाम कर माघ माहात्म्य का पाठ करना चाहिए। परिवार में खुशहाली बनाए रखने के लिए इस दिन गेहूं का आटा, गुड़, घी और एक मौसमी फल किसी ब्राह्मण को दान करने की परंपरा है।
मानसिक शांति और सकारात्मकता के लिए उपाय
अगर जीवन में सकारात्मक सोच वाले लोगों का साथ चाहते हैं, तो माघ पूर्णिमा के दिन दूध, दही, शहद, गंगाजल और तुलसी दल से पंचामृत बनाकर भगवान विष्णु को भोग लगाना लाभकारी माना गया है। वहीं, जीवन की परेशानियों से मुक्ति और सौभाग्य बढ़ाने के लिए घर में सौभाग्य बीसा यंत्र की स्थापना करने की भी मान्यता है।
स्वास्थ्य, संतान और दांपत्य जीवन से जुड़े उपाय
स्वस्थ जीवन के लिए इस दिन बरगद की जड़ में जल चढ़ाकर उसकी मिट्टी का तिलक लगाने की परंपरा है। सुंदर और गुणवान संतान की इच्छा रखने वाले लोगों को सत्यनारायण कथा के साथ व्रत और तिल के लड्डुओं का दान करना चाहिए। पति-पत्नी के रिश्तों में मधुरता बनाए रखने के लिए विष्णु पूजा के बाद तुलसी के पौधे में जल अर्पित करना शुभ माना गया है।
धन-संपदा और विजय के लिए मान्यताएं
धन-संपत्ति में वृद्धि के लिए स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा और शाम को चंद्रदेव को अर्घ्य देने की परंपरा है। वहीं, जीवन में हार से बचने के लिए हवन में तिल मिलाकर आहुति देने और लाभ के लिए ब्रह्मवैवर्त पुराण को प्रणाम या दान करने की मान्यता बताई गई है। जरूरतमंद को ऊनी वस्त्र दान करने से हर क्षेत्र में सफलता मिलने की बात कही गई है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0