1 फरवरी से सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला होंगे महंगे, सरकार ने लागू किया नया टैक्स सिस्टम
नए उत्पाद शुल्क और स्वास्थ्य उपकर नियमों के कारण 1 फरवरी से सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला महंगे हो जाएंगे।
देश में तंबाकू और पान मसाला का सेवन करने वालों के लिए 1 फरवरी से जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है। केंद्र सरकार ने सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला पर टैक्स बढ़ाने का फैसला लागू कर दिया है। 1 फरवरी से इन उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और स्वास्थ्य उपकर लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। नए नियम लागू होते ही सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
नया टैक्स क्यों लगाया गया है
1 फरवरी से सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर लागू होगा। यह टैक्स जीएसटी की अधिकतम 40 प्रतिशत की दर के ऊपर लगाया जाएगा। इससे पहले इन उत्पादों पर 28 प्रतिशत जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर लगता था, जो 1 जुलाई 2017 से लागू था। अब नए टैक्स सिस्टम में पुराने सेस की जगह यह नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके साथ ही तंबाकू उत्पादों के लिए अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी के आधार पर टैक्स तय किया जाएगा।
तंबाकू उत्पादों के लिए नई व्यवस्था
1 फरवरी से चबाने वाला तंबाकू, फिल्टर खैनी, जर्दा युक्त सुगंधित तंबाकू और गुटखा पर टैक्स पैकेट पर लिखी कीमत के आधार पर लगेगा। इससे टैक्स चोरी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। वहीं पान मसाला बनाने वाली कंपनियों को स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून के तहत नया पंजीकरण कराना होगा। उन्हें अपनी सभी पैकिंग मशीनों पर सीसीटीवी लगाना होगा और उसकी रिकॉर्डिंग 24 महीने तक सुरक्षित रखनी होगी।
कीमत कितनी बढ़ेगी
सरकार ने सिगरेट की लंबाई के आधार पर टैक्स तय किया है। 65 मिमी तक की बिना फिल्टर सिगरेट पर 2.05 रुपये प्रति स्टिक टैक्स लगेगा। छोटी फिल्टर सिगरेट पर 2.10 रुपये प्रति स्टिक टैक्स देना होगा। 65 से 70 मिमी की सिगरेट पर 3.6 से 4 रुपये तक और 70 से 75 मिमी की सिगरेट पर 5.4 रुपये प्रति स्टिक टैक्स लगेगा। खास बनावट वाली सिगरेट पर सबसे ज्यादा 8.50 रुपये प्रति स्टिक टैक्स लगाया गया है।
गुटखा और पान मसाले पर भारी टैक्स
चबाने वाले तंबाकू और जर्दा पर 82 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी लगेगी, जबकि गुटखा पर 91 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। पान मसाले पर पहले की तरह 88 प्रतिशत टैक्स ही रहेगा। यह टैक्स अब उत्पादन की मात्रा नहीं, बल्कि मशीनों की क्षमता के आधार पर तय होगा।
बिक्री पर पड़ेगा असर
सरकार ने यह फैसला दिसंबर में संसद से पास कराया था। जीएसटी काउंसिल ने सितंबर 2025 में कंपनसेशन सेस खत्म होने के बाद यह निर्णय लिया था। क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, इस टैक्स बढ़ोतरी के बाद अगले वित्तीय वर्ष में सिगरेट की बिक्री में 6 से 8 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।
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