होलाष्टक 2026 में करें श्री नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ, ग्रह दोष से मिलेगी राहत
ब्रह्मांड पुराण में वर्णित नवग्रह पीड़ार स्तोत्र नौ ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सहायक माना जाता है। होलाष्टक 2026 24 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगा।
हिंदू धर्म में ग्रहों की स्थिति का विशेष महत्व माना जाता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रह अशुभ स्थिति में होते हैं, तो जीवन में कई तरह की बाधाएं और परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे समय में धार्मिक ग्रंथों में बताए गए स्तोत्र और मंत्रों का पाठ लाभकारी माना जाता है। इन्हीं में से एक है श्री नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र। इस स्तोत्र का वर्णन ब्रह्माण्ड पुराण में मिलता है। मान्यता है कि इसका श्रद्धा से पाठ करने पर नौ ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है।
क्या है श्री नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र
श्री नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र की शुरुआत “श्री गणेशाय नमः” से होती है। इसके बाद नौ ग्रहों की स्तुति की गई है। इसमें सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु से प्रार्थना की जाती है कि वे विषम स्थान से उत्पन्न पीड़ा को दूर करें। प्रत्येक श्लोक में संबंधित ग्रह से कष्ट हरने की विनती की गई है। अंत में इसे वेदव्यास रचित बताया गया है।
कब करना चाहिए पाठ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस स्तोत्र का पाठ होलाष्टक के समय करना विशेष फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि होलाष्टक के दौरान नकारात्मक शक्तियां सक्रिय रहती हैं। ऐसे समय में नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। वर्ष 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026 तक रहेंगे। इसके अलावा हर शनिवार और रविवार को भी इसका पाठ करना शुभ माना गया है।
क्या हैं इसके लाभ
मान्यता है कि इस स्तोत्र के नियमित पाठ से सूर्य से आत्मबल, चंद्रमा से मानसिक शांति, मंगल से साहस, बुध से बुद्धि, बृहस्पति से ज्ञान, शुक्र से सुख, शनि से धैर्य तथा राहु-केतु से संबंधित कष्टों में कमी आती है। यह स्तोत्र ग्रहों को शांत कर जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है। धार्मिक आस्था रखने वाले लोग अपनी कुंडली में ग्रहों की स्थिति सुधारने और जीवन में सुख-शांति लाने के लिए इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
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