IIT कानपुर का कमाल: फैटी लिवर के इलाज के लिए बना क्रांतिकारी स्प्रे, लाखों मरीजों को नई उम्मीद
आईआईटी कानपुर ने फैटी लिवर के इलाज के लिए एक अभिनव स्प्रे-आधारित पुनर्योजी चिकित्सा विकसित की है। प्रारंभिक परीक्षणों में इस नई विधि के आशाजनक परिणाम सामने आए हैं और यह भारत में किफायती उपचार प्रदान कर सकती है।
\भारत में फैटी लिवर की बीमारी तेजी से बढ़ती हुई एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस पर चिंता जताई है, खासतौर पर महानगरों में इसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नॉन-एल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) अब हर तीसरे व्यक्ति को प्रभावित कर रही है। अनियमित जीवनशैली, जंक फूड, ज्यादा तेल-मसालेदार खाना और शराब का सेवन इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी सिर्फ लिवर को ही नहीं बल्कि डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य गंभीर समस्याओं को भी जन्म देती है। अब तक इसका कोई प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं था।
IIT कानपुर की नई खोज
इसी बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर ने इस क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अशोक कुमार और उनकी टीम ने एक खास स्प्रे-आधारित थेरेपी विकसित की है। यह थेरेपी रीजेनेरेटिव मेडिसिन की श्रेणी में आती है और लिवर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को ठीक करने में मदद करती है।
स्प्रे कैसे करेगा काम
यह स्प्रे स्वस्थ कोशिकाओं से प्राप्त एक्सोजोम्स (Exosomes) को विशेष प्राकृतिक पॉलिमर सॉल्यूशन में मिलाकर तैयार किया जाता है। इसे लेप्रोस्कोपिक यानी मिनिमली इनवेसिव तकनीक से लिवर में स्प्रे किया जाता है। शरीर के अंदर पहुंचते ही यह तरल जैल में बदल जाता है। यह जैल क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत करता है, लिवर में जमा फैट को कम करता है और नई कोशिकाओं के विकास में मदद करता है। शुरुआती परीक्षण चूहों पर किए गए, जहां फैटी लिवर पूरी तरह सामान्य हो गया। यह स्प्रे व्यायाम से भी ज्यादा प्रभावी पाया गया।
जल्द शुरू होंगे मानव परीक्षण
इस रिसर्च को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) से क्लिनिकल ट्रायल की मंजूरी मिल चुकी है। ट्रायल एक से दो साल में पूरे होने की उम्मीद है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इसका असर एक हफ्ते में दिख सकता है और 2–3 महीनों में लिवर पूरी तरह ठीक हो सकता है। यह थेरेपी फैटी लिवर के साथ-साथ आंत की सूजन संबंधी बीमारियों जैसे IBD में भी उपयोगी हो सकती है।
कीमत रहेगी किफायती
प्रोफेसर अशोक कुमार के अनुसार, यह स्प्रे प्राकृतिक पॉलिमर से तैयार किया गया है जो भारत में ही बनता है। इसलिए इसकी कीमत कम रखने की कोशिश की जाएगी ताकि आम लोग भी इसका लाभ उठा सकें। यदि मानव परीक्षण सफल रहे, तो यह खोज लाखों मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है और रीजेनेरेटिव मेडिसिन के क्षेत्र में भारत की नई पहचान बना सकती है।
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