संस्कृत पाठशालाओं में मानदेय शिक्षकों को पूर्णकालिक करने की मांग तेज
उत्तर प्रदेश में मानदेय प्राप्त संस्कृत शिक्षकों को पूर्णकालिक बनाने का मुद्दा विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने विधान परिषद में उठाया। शिक्षक रिक्त पदों पर नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की संस्कृत पाठशालाओं में कार्यरत मानदेय शिक्षकों को पूर्णकालिक करने की मांग अब तेज हो गई है। शुक्रवार को विधान परिषद में एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने यह महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन में कहा कि प्रदेश में सनातन परंपरा और देववाणी संस्कृत को जीवित रखने में इन शिक्षकों की बड़ी भूमिका है। लेकिन कम मानदेय और अस्थायी व्यवस्था के कारण कई संस्कृत पाठशालाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन शिक्षकों को जल्द से जल्द नियमित किया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो सके और संस्कृत भाषा का संरक्षण सही ढंग से हो सके।
विधान परिषद में उठा मुद्दा
शुक्रवार को विधान परिषद में एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने प्रदेश की संस्कृत पाठशालाओं में कार्यरत मानदेय शिक्षकों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि संस्कृत हमारी सनातन परंपरा और देववाणी की भाषा है। इसे जीवित और मजबूत बनाए रखने में इन शिक्षकों की बड़ी भूमिका है। इसके बावजूद उन्हें बहुत कम मानदेय पर काम करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि हाईस्कूल स्तर पर कार्यरत शिक्षकों को 20,000 रुपये और इंटर स्तर के शिक्षकों को 25,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। यह राशि भी साल में केवल 11 महीने ही मिलती है।
अस्थायी व्यवस्था से बढ़ी चिंता
सदन में बताया गया कि प्रदेश की कई संस्कृत पाठशालाएं पूर्णकालिक शिक्षकों के अभाव में केवल मानदेय शिक्षकों के भरोसे चल रही हैं। हजारों की संख्या में कार्यरत ये शिक्षक लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि रिक्त पदों के सापेक्ष उन्हें पूर्णकालिक शिक्षक बनाया जाए। अस्थायी व्यवस्था के कारण उनमें असंतोष बढ़ रहा है और शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। इस मांग को बुद्धिजीवियों, संस्कृत प्रेमियों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों का भी समर्थन मिला है। सदन के माध्यम से सरकार से आग्रह किया गया कि संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत मानदेय शिक्षकों को जल्द से जल्द पूर्णकालिक किया जाए, ताकि शिक्षा सुचारु रूप से चल सके। अध्यक्ष ने इस विषय पर सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश देने की बात कही है।
शिक्षकों ने जताया आभार
विधान परिषद में यह मुद्दा उठाए जाने के बाद जनपद के मानदेय संस्कृत शिक्षकों ने एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी का आभार व्यक्त किया। संस्कृत शिक्षक उत्थान समिति के प्रदेश अध्यक्ष राजीव कुमार मिश्र, उपाध्यक्ष पुष्कर पांडेय, महामंत्री रवींद्र कुमार मिश्र, मंत्री डॉ. दीप नारायण शुक्ल, संयुक्त मंत्री दया शंकर पाठक और कोषाध्यक्ष अजय कुमार शुक्ल ने शिक्षक विधायक को धन्यवाद दिया। साथ ही सरकार से मांग की कि संस्कृत शिक्षकों को शीघ्र नियमित किया जाए।
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