महाशिवरात्रि पर जानें अच्छी नींद का महत्व, बदलते मौसम में क्यों बिगड़ती है बॉडी क्लॉक

जानिए मौसमी बदलाव नींद के चक्र को कैसे प्रभावित करते हैं, नींद की कमी से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम क्या हैं, और महाशिवरात्रि के दौरान नींद में सुधार के लिए विशेषज्ञों के सुझाव क्या हैं।

Feb 15, 2026 - 10:30
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महाशिवरात्रि पर जानें अच्छी नींद का महत्व, बदलते मौसम में क्यों बिगड़ती है बॉडी क्लॉक

महाशिवरात्रि को तप और प्रेम की रात कहा जाता है। भगवान शिव को शरीर और मन के ‘रीसेट बटन’ के रूप में भी देखा जाता है, जबकि माता पार्वती संतुलन और सुकून की प्रतीक हैं। फागुन का महीना चल रहा है और सर्दी की विदाई के साथ मौसम बदल रहा है। इसी समय कई लोगों की नींद का पैटर्न बिगड़ जाता है। रात में बार-बार नींद खुलना, सुबह उठते ही थकान महसूस होना और दिनभर दिमाग का सुस्त रहना आम समस्या बन जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे मौसमी अनिद्रा या सीजनल एफेक्टिव डिसऑर्डर बताते हैं।

स्टडी में क्या सामने आया?
स्टडी के मुताबिक मौसम बदलने से हमारी बॉडी क्लॉक यानी सर्केडियन रिदम प्रभावित होती है। धूप कम मिलने पर शरीर में सेरोटोनिन का स्तर घटता है और मेलाटोनिन का संतुलन बिगड़ जाता है। National Heart, Lung, and Blood Institute के अनुसार एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी है। नींद केवल आराम नहीं, बल्कि शरीर का रिपेयरिंग प्रोसेस है। नींद खराब होने पर दिमाग की एकाग्रता और याददाश्त कमजोर होती है। साथ ही दिल पर दबाव बढ़ता है, ब्लड शुगर कंट्रोल बिगड़ सकता है और इम्यूनिटी भी कम हो जाती है।

क्या है समाधान?
विशेषज्ञों के अनुसार सुबह की धूप लेना बेहद फायदेमंद है। धूप शरीर में सेरोटोनिन बढ़ाती है, जिससे मूड और नींद दोनों बेहतर होते हैं। जरूरत पड़ने पर लाइट थेरेपी भी बॉडी क्लॉक को दोबारा संतुलित करने में मदद कर सकती है। योगगुरु स्वामी रामदेव का कहना है कि अच्छी नींद ही सेहतमंद जीवन की सबसे पवित्र साधना है। गहरी नींद शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है और अवचेतन अवस्था में शरीर की मरम्मत का काम शुरू होता है।

नींद की कमी के खतरे
यूरोपीय कार्डियोलॉजी सोसायटी की स्टडी के अनुसार अधूरी नींद की भरपाई करना जरूरी है, इससे हार्ट प्रॉब्लम का खतरा 20 प्रतिशत तक कम हो सकता है। 18 घंटे बिना सोए रहने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। 24 घंटे तक नींद न लेने पर चिड़चिड़ापन बढ़ता है। 36 घंटे जागने से एकाग्रता और फैसले लेने की क्षमता प्रभावित होती है। 48 घंटे से ज्यादा जागने पर तनाव, गुस्सा, मतिभ्रम और नकारात्मक सोच जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

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Aniket Prajapati अनिकेत प्रजापति UP News Network असिस्टेंट न्यूज़ एडिटर है। वे 1 साल से ज्योतिष और धार्मिक, बिजनेस, नेशनल, उत्तर प्रदेश, गैजेट्स, हेल्थ आदि से जुड़े मुद्दों को कवर कर रहे हैं। अनिकेत प्रजापति पिछले 1 साल से UP News Network, (Digital) के साथ जुड़े हैं। वह TV 24 Network में भी काम कर चुके हैं। अनिकेत प्रजापति ने भारतीय जनसंचार संस्थान University of Lucknow से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है।