15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी महाशिवरात्रि, जानिए भगवान शिव के 108 नाम और जाप की विधि
महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। भगवान शिव के 108 नामों का महत्व और उनके जाप की सही विधि जानें।
सनातन धर्म में भगवान शिव की उपासना के लिए महाशिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन को भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस शुभ तिथि पर शिव आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और शिव मंत्रों का जाप करते हैं।
108 नामों के जाप का विशेष महत्व
शास्त्रों और पुराणों में भगवान शिव के कई चमत्कारी स्तोत्र और श्लोक वर्णित हैं। इनमें भगवान शिव के 108 नामों का जाप विशेष फलदायी माना गया है। इन नामों में महाकाल, रुद्रनाथ, नटराज, भोलेनाथ, कैलाशपति, विश्वनाथ, उमापति, नीलकंठ, त्रिलोकिनाथ, त्रिनेत्रधारी, अर्धनारीश्वर, पशुपति, आशुतोष, महादेव, सर्वेश्वर, नागेश्वर, केदारनाथ, सोमनाथ, रामेश्वर और ओंकारेश्वर जैसे पवित्र नाम शामिल हैं। भक्त इन सभी 108 नामों का श्रद्धा के साथ उच्चारण करते हैं। माना जाता है कि इन नामों का स्मरण करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
कैसे करें 108 नामों का जाप
भगवान शिव के 108 नामों का जप अत्यंत पवित्र साधना मानी जाती है। इसे मानसिक, उपांशु या वाचिक तीनों तरीकों से किया जा सकता है। जप से पहले किसी शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठें। संभव हो तो शिवलिंग या भगवान शिव की तस्वीर के सामने बैठकर पूजा करें। 108 दानों वाली रुद्राक्ष माला का उपयोग करना शुभ माना जाता है। जप की शुरुआत “ॐ नमः शिवाय” मंत्र से करें और फिर एक-एक कर सभी नामों का श्रद्धा और एकाग्रता के साथ उच्चारण करें। अंत में भगवान शिव को प्रणाम कर आभार व्यक्त करें। नियमित और सच्ची आस्था से किया गया जप जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति देता है।
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