होली पर मथुरा-वृंदावन की अनोखी रौनक, लठमार से फूलों की होली तक 40 दिन चलता है जश्न
बरसाना में लठमार होली, बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होली और 40 दिवसीय ब्रज होली उत्सव सहित मथुरा और वृंदावन होली समारोह का अन्वेषण करें।
मथुरा और वृंदावन में साल भर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, लेकिन जैसे ही होली का त्योहार नजदीक आता है, यहां की रौनक कई गुना बढ़ जाती है। होली के दिन इन दोनों शहरों की वाइब बिल्कुल अलग होती है। देश-विदेश से लोग यहां खास तौर पर ब्रज की होली देखने पहुंचते हैं। अगर आप भी इस बार होली को खास बनाना चाहते हैं, तो दोस्तों, परिवार या अकेले मथुरा-वृंदावन घूमने का प्लान बना सकते हैं।
बरसाना और नंदगांव की लठमार होली
ब्रज की होली दुनिया भर में मशहूर है। खासतौर पर बरसाना और नंदगांव की लठमार होली देखने लायक होती है। यहां महिलाएं पुरुषों को लाठियों से प्रतीकात्मक रूप से मारती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं। इसके अलावा मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में भी भव्य होली उत्सव आयोजित होता है। इस उत्सव को देखने के लिए लोग कई दिन पहले ही पहुंच जाते हैं।
फूलों की होली और अन्य खास आयोजन
अगर आपने कभी फूलों की होली नहीं खेली, तो Banke Bihari Temple जरूर जाएं। यहां रंगों की जगह फूलों से होली खेली जाती है, जो बेहद खास अनुभव होता है। वहीं राधा रानी मंदिर में भी धूमधाम से होली मनाई जाती है। गोकुल की छड़ीमार होली भी काफी प्रसिद्ध है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं।
पहले से करें पूरी तैयारी
होली के आसपास मथुरा-वृंदावन में भारी भीड़ रहती है, इसलिए यात्रा से पहले होटल और अन्य बुकिंग कर लेना जरूरी है। खास बात यह है कि वृंदावन में होली का जश्न बसंत पंचमी से शुरू होकर करीब 40 दिनों तक चलता है। यानी यहां होली का उत्सव फरवरी से शुरू होकर मार्च तक जारी रहता है। अगर आप रंगों और भक्ति से भरी अनोखी होली देखना चाहते हैं, तो ब्रज की होली का अनुभव जरूर करें।
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