मोबाइल गेम का खौफनाक सच: एक टास्क ने छीनी तीन बहनों की जिंदगी, देश को झकझोर देने वाली घटना
गाजियाबाद त्रासदी ने मोबाइल गेमिंग की लत के घातक प्रभाव को उजागर किया है, जहां एक गेम चैलेंज के बाद तीन नाबालिग बहनों की मौत हो गई। विशेषज्ञों ने माता-पिता को चेतावनी दी है।
एक गेम, एक टास्क और कुछ ही सेकंड में पूरा परिवार तबाह हो गया। गाजियाबाद से सामने आई यह दर्दनाक घटना आज के डिजिटल दौर की सबसे भयावह तस्वीर दिखाती है। 3 फरवरी 2026 की रात गाजियाबाद में तीन सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। इन बच्चियों की उम्र महज 16 साल, 14 साल और 12 साल थी। बताया जा रहा है कि तीनों एक मोबाइल गेम ‘कोरियन लवर’ की आदी थीं और गेम के आखिरी टास्क के नाम पर उन्होंने यह खौफनाक कदम उठाया। घर में माता-पिता मौजूद थे, लेकिन बच्चों की दुनिया पूरी तरह मोबाइल स्क्रीन तक सिमट चुकी थी।
सुसाइड नोट ने खोले कई डरावने राज
पुलिस को मौके से जो सुसाइड नोट मिला, उसने सबको हिला दिया। नोट से साफ हुआ कि मोबाइल गेम बच्चों की जिंदगी का केंद्र बन चुका था। तीनों बहनें पिछले करीब तीन साल से इस गेम की गिरफ्त में थीं। माता-पिता को इसका अंदाजा तक नहीं हुआ। यह कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले कर्नाटक में एक 13 साल का बच्चा मोबाइल गेम के चैलेंज के चलते छत से कूद गया था, जबकि उसकी मां घर के अंदर मौजूद थी। ये घटनाएं बताती हैं कि ऑनलाइन गेम अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि जानलेवा बनते जा रहे हैं।
भारत में बढ़ती गेमिंग लत
आंकड़ों के मुताबिक भारत में इस समय करीब 59 करोड़ गेमर्स हैं। इनमें से लगभग 74 प्रतिशत Gen Z हर हफ्ते 6 घंटे से ज्यादा गेम खेलते हैं। डॉक्टरों के अनुसार हर हफ्ते 4 से 5 मामले सिर्फ गेमिंग एडिक्शन के सामने आ रहे हैं। कर्नाटक में कुछ ही महीनों में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े 32 सुसाइड केस दर्ज किए गए, जिसने चिंता और बढ़ा दी है।
बच्चों के दिमाग पर गेम का असर
हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि गेम जीतने पर दिमाग में डोपामिन रिलीज होता है, जो धीरे-धीरे लत में बदल जाता है। हार होने पर गुस्सा, चिड़चिड़ापन, नींद खराब होना, पढ़ाई से दूरी और रिश्तों में तनाव बढ़ने लगता है। 2026 की एक स्टडी के अनुसार भारत में 60 प्रतिशत मानसिक बीमारियां 35 साल से कम उम्र में शुरू हो रही हैं, जिनकी बड़ी वजह मोबाइल, स्क्रीन और ऑनलाइन गेमिंग का बढ़ता नशा है।
सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम के गंभीर नुकसान
सोशल मीडिया और ज्यादा स्क्रीन टाइम से घबराहट, अकेलापन, अनिद्रा, डिप्रेशन और हकीकत से दूरी बढ़ रही है। ‘टेक्स्ट नेक सिंड्रोम’ के कारण सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, पीठ दर्द और झुनझुनी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। 14 से 24 साल के युवाओं में ऐसे मामलों में पिछले एक साल में 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ज्यादा मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल से मोटापा, डायबिटीज, हार्ट और आंखों की गंभीर समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
जरूरत है समझने और बात करने की
विशेषज्ञों का कहना है कि अब सिर्फ रोक-टोक काफी नहीं है। माता-पिता को बच्चों से खुलकर बात करनी होगी और उनके मन को समझना होगा। वरना किसी गेम के एक छोटे से टास्क के नाम पर ऐसे दर्दनाक हादसे यूं ही जिंदगी तबाह करते रहेंगे।
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