वाराणसी में महिला कॉलेज की जमीन पर होटल निर्माण से बवाल, BHU से जुड़ा विवाद, Annie Besant की विरासत पर सवाल

वाराणसी में बसंत गर्ल्स इंटर कॉलेज की जमीन को एक होटल समूह को 30 साल के लिए पट्टे पर देने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बीएचयू के पूर्व छात्रों और कार्यकर्ताओं ने एनी बसंत की विरासत का हवाला देते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

Feb 16, 2026 - 15:19
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वाराणसी में महिला कॉलेज की जमीन पर होटल निर्माण से बवाल, BHU से जुड़ा विवाद, Annie Besant की विरासत पर सवाल

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बसंत महिला इंटर कॉलेज की जमीन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गर्ल्स हॉस्टल के पास स्थित 16 बिस्वा जमीन को 30 साल के लिए लीज पर देकर वहां होटल निर्माण शुरू किया गया है, जिसके बाद शहर में विरोध तेज हो गया है। करीब 150 साल पुरानी Theosophical Society की इस जमीन को पहले छात्राओं के उपयोग के लिए आवंटित बताया जा रहा है। अब इस पर होटल बनने से बीएचयू से जुड़े पूर्व छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग नाराज हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि यह एनी बेसेंट की विरासत और शिक्षा की भावना के खिलाफ कदम है।

एनी बेसेंट की विरासत को लेकर नाराजगी
स्थानीय लोगों ने कहा कि (Banaras Hindu University) की स्थापना में (Annie Besant) की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। ऐसे में उनकी संस्था की जमीन पर व्यावसायिक होटल बनाना उचित नहीं है। इस मुद्दे ने वाराणसी के बौद्धिक वर्ग में भी हलचल पैदा कर दी है।

नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाया मुद्दा
समाजवादी पार्टी के विधायक और बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह ने विधानसभा में यह मामला उठाकर सरकार से जवाब मांगा है। वहीं बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री और सामाजिक न्याय मंच के संयोजक डॉ. सूबेदार सिंह ने इसे काशी की धरोहर से खिलवाड़ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि एनी बेसेंट की तपोभूमि को व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और इसके खिलाफ बड़ा जन आंदोलन होगा।

कॉलेज का इतिहास और उद्देश्य
बसंत कन्या इंटर कॉलेज, जिसे वीकेएम भी कहा जाता है, की स्थापना 1954 में डॉ. रोहित मेहता ने एनी बेसेंट से प्रेरित होकर की थी। यह संस्थान बेसेंट एजुकेशन फेलोशिप द्वारा संचालित है और वाराणसी के कमच्छा स्थित थियोसोफिकल सोसाइटी परिसर में है। महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना इसका मुख्य उद्देश्य रहा है।

होटल निर्माण पर कानूनी और सामाजिक सवाल
अधिवक्ता शम्मी कुमार ने भी होटल निर्माण का विरोध करते हुए कहा कि हॉस्टल के पास होटल बनने से भविष्य में पब जैसी गतिविधियां शुरू हो सकती हैं, जो उचित नहीं होगा। बीएचयू के पूर्व छात्र और समाजवादी नेता कुंवर सुरेश सिंह ने 21 फरवरी को बड़े धरने का ऐलान किया है और जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट जाने की बात कही है।

निर्माण कर रही कंपनी और सोसाइटी का पक्ष
रथयात्रा चौराहे के पास रोपवे स्टेशन से सटे क्षेत्र में दयाल ग्रुप द्वारा 65 कमरों का थ्री-स्टार होटल बनाया जा रहा है। दयाल प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि जुगनू सिंह के अनुसार निर्माण सोसाइटी और कंपनी के समझौते के बाद ही शुरू हुआ और वीडीए की मंजूरी भी ली गई है। सोसाइटी के सेक्रेटरी शशिनंदन राजदर ने कहा कि यह जमीन संस्था की ही है और पहले भी यहां डाकघर व प्रिंटिंग प्रेस जैसी व्यावसायिक गतिविधियां हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि संस्था चार शैक्षणिक संस्थान और लड़कियों के हॉस्टल चला रही है, जिनमें बसंत कन्या महाविद्यालय, बसंत कन्या इंटर कॉलेज, बीटीएस हायर सेकेंडरी स्कूल, एनी बेसेंट स्कूल और बसंत बालिका विहार शामिल हैं। होटल से होने वाली आय से संस्था की शैक्षणिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि होटल का किसी हॉस्टल या संस्थान से सीधा संबंध नहीं होगा और सभी का अलग परिसर रहेगा।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी, UP News Network में सब-एडिटर हैं। वे राजनीति, क्राइम, स्पोर्ट्स, ज्योतिष और धार्मिक विषयों से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से काम करते हैं। मीडिया जगत में उन्हें 2 वर्ष का अनुभव है। उन्होंने रिपोर्टिंग, स्पेशल स्टोरीज़ और स्पेशल खरी-खोटी जैसे कार्यक्रमों पर काम किया है। कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एंकरिंग का भी अनुभव रखते हैं। SumanTV, Hyderabad (डिजिटल प्लेटफॉर्म) के साथ कार्य कर चुके हैं और ZEE News व India Watch जैसे प्रतिष्ठित न्यूज़ संस्थानों में इंटर्नशिप का अनुभव हासिल किया है। पिछले 1 साल से वे यूपी न्यूज़ नेटवर्क (डिजिटल) से जुड़े हैं और उत्तर प्रदेश से जुड़ी अहम खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। एमजेएमसी की पढ़ाई कर चुके अश्वनी तिवारी की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, ज़मीनी मुद्दों और दर्शकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने वाली पत्रकारिता से है। उनकी जन्मस्थली वाराणसी है, जबकि कार्य के दौरान वे कई शहरों में रहकर पत्रकारिता कर चुके हैं।