मेरठ में तैयार होगा भारत का पहला ड्रोन एयरबेस… BRO का मेगा प्लान, अब दुश्मनों की हर हरकत पर रहेगी नजर
केंद्र सरकार मेरठ को रक्षा प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है, जिसमें भारत का पहला समर्पित यूएवी और ड्रोन रनवे शामिल होगा। बीआरओ ने 406 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए निविदा जारी की है।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के मेरठ से देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद अब केंद्र सरकार मेरठ को रक्षा तकनीक का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसी क्रम में सीमा सड़क संगठन ने यहां देश का पहला समर्पित ड्रोन और मानव रहित विमान रनवे बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए औपचारिक टेंडर जारी कर दिया गया है। यह परियोजना पूरी होने के बाद भारत की सामरिक ताकत को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही यह सुविधा सैन्य जरूरतों के साथ-साथ नागरिक सेवाओं में भी अहम भूमिका निभाएगी।
मेरठ में बनेगा देश का पहला ड्रोन रनवे
सीमा सड़क संगठन (BRO) ने मेरठ में केवल ड्रोन और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (RPA) के लिए विशेष रनवे बनाने का टेंडर जारी किया है। अभी तक भारत में ड्रोन संचालन के लिए सामान्य एयरपोर्ट या हवाई पट्टियों का उपयोग किया जाता था, लेकिन यह पहली बार होगा जब पूरी तरह ड्रोन के लिए अलग अत्याधुनिक रनवे तैयार किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 406 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
900 एकड़ जमीन पर बनेगा आधुनिक ढांचा
परियोजना के लिए लगभग 900 एकड़ भूमि तय की गई है। इसे पूरा होने में करीब 85 महीने यानी लगभग सात वर्ष लग सकते हैं। इस रनवे से सीमाओं की निगरानी और सैन्य ऑपरेशन को नई गति मिलेगी। साथ ही यहां ड्रोन पायलटों के प्रशिक्षण के लिए देश का प्रमुख ट्रेनिंग सेंटर भी विकसित किया जाएगा।
भारी मालवाहक विमान भी कर सकेंगे संचालन
बीआरओ के अनुसार रनवे 2110 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा होगा। इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि ड्रोन के अलावा बड़े मालवाहक सैन्य विमान भी यहां सुरक्षित लैंडिंग और उड़ान भर सकें। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में सैन्य लॉजिस्टिक्स को काफी मदद मिलेगी।
मेरठ की रणनीतिक अहमियत
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित मेरठ सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों पर निगरानी करना आसान होगा। दिल्ली-एनसीआर के करीब होने से लॉजिस्टिक सपोर्ट और सैन्य गतिविधियों के संचालन में भी सुविधा रहेगी।
नागरिक सेवाओं में भी मिलेगा लाभ
यह रनवे केवल रक्षा जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा। बाढ़, भूकंप या अन्य आपदा के समय राहत और बचाव कार्य में ड्रोन की मदद ली जा सकेगी। दूरदराज इलाकों में दवाइयां और जरूरी सामान पहुंचाने में भी यह परियोजना उपयोगी साबित होगी।
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