वाराणसी में गंगा बोटिंग पर सख्ती… चलती नाव में REEL या सेल्फी ली तो सीधा जेल, नए नियम लागू
वाराणसी में गंगा में नाव चलाने को लेकर प्रशासन ने नए सख्त नियम लागू किए हैं। अब चलती नाव में सेल्फी या रील बनाना प्रतिबंधित रहेगा। नियम तोड़ने पर जेल और जुर्माने की चेतावनी दी गई है।
Uttar Pradesh News: मंदिरों का शहर मोक्ष की नगरी काशी, बनारस, वाराणसी के नाम से जाने जाने वाला शहर में आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। अब बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद गंगा में नाव की सवारी करते समय सोशल मीडिया के लिए रील बनाना या चलती नाव में खड़े होकर सेल्फी लेना भारी पड़ सकता है। ऐसा करने पर जेल या जुर्माना दोनों का सामना करना पड़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी नाविक की भी मानी जाएगी। प्रशासन ने गंगा में बढ़ती दुर्घटनाओं को देखते हुए नाव संचालन के लिए नई सख्त गाइडलाइन जारी की है, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और हादसों को रोका जा सके।
हाल की दुर्घटना के बाद प्रशासन सख्त
यह फैसला हाल ही में गंगा नदी में नाव डूबने की एक बड़ी घटना के बाद लिया गया है, जिसमें पांच लोगों की जान बाल-बाल बची थी। इस घटना ने प्रशासन को सुरक्षा नियमों को और सख्त करने के लिए मजबूर कर दिया। अब नाव संचालकों और पर्यटकों दोनों के लिए नियमों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है।
चलती नाव में रील और सेल्फी पर पूरी तरह रोक
जारी निर्देशों के अनुसार, अब चलती नाव में खड़े होकर फोटो खिंचवाना, वीडियो बनाना या रील शूट करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नाविक की जिम्मेदारी होगी कि कोई यात्री ऐसा न करे। बिना लाइफ जैकेट किसी भी यात्री को नाव में बैठाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही नावों के रूट भी तय किए गए हैं, जिसमें अस्सी घाट से नमो घाट जाने वाली नावें बालू वाले हिस्से से चलेंगी और नमो घाट से अस्सी आने वाली नावें घाट की तरफ से चलेंगी।
नाविकों के लिए भी कड़े नियम
प्रशासन ने साफ किया है कि नाव चालक नशे की हालत में नाव नहीं चलाएंगे और यात्रियों से मर्यादित व्यवहार करेंगे। तय किराए से ज्यादा पैसे नहीं वसूले जा सकेंगे और नाव की गति सीमा भी निर्धारित रहेगी। केवल पंजीकृत और प्रदूषण रहित मोटर बोट को ही संचालन की अनुमति दी जाएगी।
नियम तोड़ने पर जेल और जुर्माना
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 282 के तहत कार्रवाई होगी। दोषी को 6 महीने तक की जेल, 10 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा एक साथ हो सकती है। नाव संचालकों को यह भी निर्देश दिया गया है कि क्षमता से अधिक सवारी न बैठाएं और यात्रियों को चढ़ाने-उतारने में विशेष सावधानी बरतें। प्रशासन का उद्देश्य काशी आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और गंगा यातायात को व्यवस्थित करना है।
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