UGC के नए नियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा पर होगी सुनवाई

UGC के इन नए नियमों को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारी इन नियमों को तुरंत वापस लेने या इनमें संशोधन की मांग कर रहे हैं।

Jan 28, 2026 - 21:19
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UGC के नए नियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा पर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल में अधिसूचित नए नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जता दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस नियम में जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है और कुछ वर्गों को संस्थागत संरक्षण के दायरे से बाहर कर दिया गया है। यह मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष उठाया गया, जहां याचिकाकर्ता की ओर से तत्काल सुनवाई की मांग की गई।

CJI ने दिया बड़ा बयान 
याचिका पर बहस के दौरान वकील ने दलील दी कि UGC द्वारा अधिसूचित नए नियम सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। वकील ने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि यह याचिका ‘राहुल दीवान एवं अन्य बनाम भारत सरकार’ के तहत दायर की गई है। इस पर चीफ जस्टिस ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें पता है कि क्या हो रहा है। सुनिश्चित करें कि खामियां दूर कर दी जाएं। हम इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे।

याचिका में क्या हैं आपत्तियां?
याचिका में कहा गया है कि नए नियमों में जाति-आधारित भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तक सीमित कर दिया गया है। इससे अन्य वर्गों के खिलाफ होने वाले भेदभाव को नजरअंदाज किए जाने का खतरा पैदा हो सकता है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह परिभाषा समावेशी नहीं है और इससे कुछ सामाजिक वर्ग संस्थागत संरक्षण से बाहर हो जाते हैं।

देशभर में हो रहे हैं विरोध प्रदर्शन
UGC के इन नए नियमों को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारी इन नियमों को तुरंत वापस लेने या इनमें संशोधन की मांग कर रहे हैं।

क्या है UGC का नया नियम?
UGC ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) रेगुलेशन, 2026 को 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया था। यह नियम भारत के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों पर लागू होता है। इसका उद्देश्य धर्म, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान, जाति या विकलांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना और उच्च शिक्षा में समानता व समावेशन को बढ़ावा देना बताया गया है।

किन वर्गों पर विशेष जोर?
नए नियम के तहत खास तौर पर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), दिव्यांगजन, महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को रोकने पर जोर दिया गया है। साथ ही, संबंधित समितियों में इन वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल करना अनिवार्य किया गया है।

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