1 फरवरी 2026 का पंचांग: माघी पूर्णिमा और रविदास जयंती एक साथ, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल
जानिए 1 फरवरी 2026 का संपूर्ण पंचांग। माघ पूर्णिमा, रविदास जयंती, शुभ समय, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त का विवरण।
1 फरवरी 2026, रविवार का दिन धार्मिक दृष्टि से काफी खास रहने वाला है। इस दिन माघ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है और इसी के साथ माघी पूर्णिमा व्रत और संत रविदास जयंती भी मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार इस दिन कई शुभ योग और नक्षत्र बन रहे हैं, जिनका पूजा-पाठ, स्नान-दान और व्रत के लिए विशेष महत्व माना जाता है। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार 1 फरवरी को पुष्य नक्षत्र, प्रीति योग और आयुष्मान योग का संयोग रहेगा। आइए जानते हैं इस दिन का पूरा पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और माघ पूर्णिमा का महत्व, वह भी आसान और साफ शब्दों में।
पूर्णिमा तिथि और योग-नक्षत्र का संयोग
पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 1 फरवरी 2026, रविवार की सुबह 5 बजकर 52 मिनट पर होगी। यह तिथि देर रात 3 बजकर 39 मिनट तक रहेगी, यानी 2 फरवरी की सुबह तक। उदया तिथि के अनुसार माघी पूर्णिमा का व्रत 1 फरवरी को ही रखा जाएगा। इस दिन सुबह 10 बजकर 19 मिनट तक प्रीति योग रहेगा, इसके बाद आयुष्मान योग शुरू हो जाएगा। वहीं पुष्य नक्षत्र रात 11 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इस दिन पृथ्वी लोक की भद्रा भी मानी जा रही है।
माघी पूर्णिमा और रविदास जयंती
1 फरवरी 2026 को माघी पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा। इसी दिन संत शिरोमणि रविदास जी की जयंती भी मनाई जाएगी। माघ पूर्णिमा के दिन गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है।
स्नान, दान और पूजा के शुभ मुहूर्त
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 मिनट से 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। प्रातः संध्या का समय सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 7 बजकर 13 मिनट तक है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से 1 बजकर 15 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 45 मिनट से 3 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
रविवार को राहुकाल अलग-अलग शहरों में अलग समय पर रहेगा। दिल्ली में यह शाम 4:38 से 5:59 बजे तक, मुंबई में 5:06 से 6:31 बजे तक और लखनऊ में 4:26 से 5:48 बजे तक रहेगा। सूर्योदय सुबह 7:13 बजे और सूर्यास्त शाम 6:32 बजे होगा।
माघ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
माघ पूर्णिमा को बहुत पुण्य देने वाली तिथि माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव और चंद्रदेव की पूजा का विधान है। सत्यनारायण भगवान की कथा करना विशेष फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन का व्रत पुत्र, सौभाग्य और सुख-समृद्धि प्रदान करता है।
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