बजट 2026 से पहले सरकार की बल्ले-बल्ले, खजाने में आए 1.93 लाख करोड़, जानिए पूरा मामला
जनवरी 2026 के लिए भारत के जीएसटी संग्रह में 6.2% की वृद्धि हुई और यह 1.93 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो बजट 2026 से पहले मजबूत घरेलू मांग और आयात वृद्धि को दर्शाता है।
Budget 2026: बजट 2026 के पेश होने से पहले केंद्र सरकार को राजस्व के मोर्चे पर एक बड़ी और राहत भरी खबर मिली है। जनवरी महीने में देश का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी GST कलेक्शन मजबूत रहा है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में GST संग्रह 6.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.93 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। यह बढ़ोतरी घरेलू मांग में मजबूती और इंपोर्ट से मिलने वाले रेवेन्यू में अच्छी ग्रोथ का संकेत देती है। आर्थिक गतिविधियों में सुधार का असर सीधे टैक्स कलेक्शन पर दिखाई दे रहा है, जिससे सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिली है।
जनवरी में GST कलेक्शन की पूरी तस्वीर
सरकार ने बताया कि जनवरी 2026 में कुल GST कलेक्शन 1,93,384 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल जनवरी 2025 में यह आंकड़ा 1,82,094 करोड़ रुपये था। इस तरह साल-दर-साल आधार पर 6.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि घरेलू बाजार में खरीदारी और उत्पादन गतिविधियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं।
अप्रैल से जनवरी तक सालाना प्रदर्शन
अगर पूरे वित्त वर्ष की बात करें तो अप्रैल से जनवरी 2025-26 के बीच कुल GST कलेक्शन बढ़कर 18,43,423 करोड़ रुपये हो गया। इसमें 8.3 प्रतिशत की मजबूत सालाना ग्रोथ देखने को मिली है। वहीं, जनवरी महीने के लिए नेट GST रेवेन्यू 1,70,719 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 7.6 प्रतिशत ज्यादा है। पूरे साल का नेट रेवेन्यू 15,95,752 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें 6.8 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
रिफंड, घरेलू और इंपोर्ट कलेक्शन की स्थिति
जनवरी में कुल GST रिफंड 22,665 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 3.1 प्रतिशत कम है। घरेलू रिफंड 7.1 प्रतिशत घटकर 13,119 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक्सपोर्ट रिफंड 2.9 प्रतिशत बढ़कर 9,546 करोड़ रुपये हो गया। घरेलू GST कलेक्शन 4.8 प्रतिशत बढ़कर 1,41,132 करोड़ रुपये पहुंचा। वहीं, इंपोर्ट GST कलेक्शन 10.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 52,253 करोड़ रुपये रहा।
कंपनसेशन सेस और राज्यों का प्रदर्शन
कंपनसेशन सेस से मिलने वाला रेवेन्यू घटकर 5,768 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल 13,009 करोड़ रुपये था। इसमें 55.6 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज हुई। राज्यवार आंकड़ों में इंडस्ट्रियल राज्यों ने बेहतर प्रदर्शन किया। हरियाणा में 27 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 15 प्रतिशत और गुजरात में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और कुछ छोटे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में गिरावट देखने को मिली। चंडीगढ़ और पुडुचेरी में बढ़त रही, जबकि लक्षद्वीप में 30 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई।
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