फिरकापरस्तों को हराएंगे कहने वाले नसीमुद्दीन का नया फैसला, 20 दिन पहले छोड़ी कांग्रेस, अब सपा में होंगे शामिल
उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ मुस्लिम नेता नसीमउद्दीन सिद्दीकी समाजवादी पार्टी में शामिल होंगे। अखिलेश यादव महाशिवरात्रि के अवसर पर उन्हें पार्टी में शामिल करेंगे। पूरी राजनीतिक जानकारी और पृष्ठभूमि पढ़ें।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश के कद्दावर मुस्लिम नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी समाजवादी पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार शाम तक इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। बताया जा रहा है कि उनकी कई दौर की बातचीत सपा प्रमुख Akhilesh Yadav से हो चुकी है। महाशिवरात्रि के दिन अखिलेश यादव खुद उन्हें और अपना दल (एस) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार पाल सहित कई नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाएंगे। सपा में उन्हें पश्चिमी यूपी में अहम जिम्मेदारी दी जाएगी।
कांग्रेस से इस्तीफा और सियासी हलचल
नसीमुद्दीन ने 24 जनवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से उनके अगले कदम पर सबकी नजर थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि वे ऐसी पार्टी में जाएंगे जो फिरकापरस्त ताकतों को हरा सके या फिर नई पार्टी बनाएंगे। उनके साथ 73 अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी पार्टी छोड़ी थी, जिनमें कई पूर्व विधायक शामिल थे। वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
पश्चिमी यूपी में मुस्लिम वोट बैंक पर नजर
सहारनपुर और मुजफ्फरनगर समेत कई जिलों में मुस्लिम वोट बैंक पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। अभी कांग्रेस के इमरान मसूद पश्चिमी यूपी में सक्रिय हैं और सपा पर हमलावर रहते हैं। सपा नसीमुद्दीन के जरिए मुस्लिमों को यह संदेश देना चाहती है कि वही उनकी असली चिंता करने वाली पार्टी है। आजम खान के जेल जाने के बाद सपा में बड़ा मुस्लिम चेहरा नहीं बचा था, जिसे अब सिद्दीकी के जरिए पूरा करने की कोशिश होगी।
कांग्रेस में असंतोष और भविष्य की चिंता
2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें खास तवज्जो नहीं मिली। 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में वे कांग्रेस में अपने भविष्य को लेकर चिंतित थे। सहारनपुर सांसद इमरान मसूद का कद तेजी से बढ़ना भी एक वजह माना जा रहा है। अमौसी एयरपोर्ट पर राहुल गांधी के स्वागत के दौरान भी उन्हें आगे जगह नहीं मिली थी।
इस्तीफे में क्या लिखा
इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि वे कांग्रेस में संप्रदायवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने आए थे, लेकिन जमीन पर काम नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी के प्रति सम्मान जताया, पर कहा कि पार्टी में उनके लिए काम नहीं था।
सियासी सफर की कहानी
4 जून 1959 को जन्मे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने रेलवे ठेकेदारी से करियर शुरू किया। 1984 में वे बसपा में शामिल हुए और 1991 में बांदा से पहली बार विधायक बने। वे बसपा के पहले मुस्लिम विधायक थे। 2007 से 2012 तक की सरकार में उनके पास 18 मंत्रालय थे और उन्हें मिनी सीएम कहा जाता था। 2017 में बसपा से निकाले जाने के बाद उन्होंने नई पार्टी बनाई और 2018 में कांग्रेस में शामिल हो गए। अब 2027 चुनाव से पहले उन्होंने सपा का दामन थामने का फैसला किया है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
