अयोध्या से चुनाव नहीं लड़ेंगे बृजभूषण शरण सिंह, कहा– पहला हक विनय कटियार का
अयोध्या में पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने स्पष्ट किया कि वह अयोध्या-फैजाबाद लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे और कहा कि वरिष्ठ नेता विनय कटियार को यहां से चुनाव लड़ने का पहला अधिकार है।
अयोध्या लोकसभा सीट को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने स्थिति साफ कर दी है। राष्ट्रकथा के समापन के बाद पहली बार अयोध्या पहुंचे बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे अयोध्या-फैजाबाद सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने इस सीट पर वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद विनय कटियार का पहला अधिकार बताया। अयोध्या दौरे के दौरान उन्होंने धार्मिक स्थलों पर दर्शन-पूजन किया और कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
अयोध्या आगमन और धार्मिक कार्यक्रम
राष्ट्रकथा कार्यक्रम के समापन के बाद बृजभूषण शरण सिंह अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले दशरथ गद्दी पहुंचकर महंत बृजमोहन दास के भाई श्याम जी ओझा को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वे हनुमानगढ़ी पहुंचे, जहां वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास के साथ विधिवत दर्शन-पूजन किया। इस दौरान स्थानीय लोगों और समर्थकों से भी उनकी मुलाकात हुई।
चुनाव को लेकर साफ किया रुख
लोकसभा चुनाव को लेकर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने अयोध्या-फैजाबाद सीट से चुनाव लड़ने से साफ इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अयोध्या से चुनाव लड़ने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे चुनाव के उद्देश्य से अयोध्या नहीं आते। उनके अनुसार इस सीट पर चुनाव लड़ने का पहला हक वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद विनय कटियार का है और उन्हें ही यहां से उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए।
राष्ट्रकथा और निजी बातों पर बयान
बृजभूषण शरण सिंह ने बताया कि नंदिनीनगर में राष्ट्रकथा का आयोजन हर वर्ष होता रहेगा और जब तक वे जीवित रहेंगे, यह कार्यक्रम लगातार चलता रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि 8 जनवरी को उनका जन्मदिन था, लेकिन राष्ट्रकथा के आयोजन की व्यस्तता के कारण वह इसे नहीं मना सके।
यूजीसी विवाद और अन्य मुद्दों पर प्रतिक्रिया
यूजीसी (UGC) विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का आभार जताया। उन्होंने कहा कि देश एक बड़े विवाद से बच गया और अब यह मुद्दा समाप्त हो चुका है। उनके अनुसार यदि यूजीसी का वह स्वरूप लागू होता, तो देश का सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो सकता था।
खेल, शिक्षा और जाति पर विचार
कुश्ती और जाति के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि खेल और शिक्षा में कभी जाति नहीं देखी जाती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उनके विद्यालय में हर जाति के लोग पढ़ते और खेलते हैं। हनुमानगढ़ी पर कुश्ती के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वहां कभी किसी की जाति नहीं पूछी जाती थी, खिलाड़ी की पहचान उसके खेल से होती है, न कि जाति से।
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