एक नंबर, 24 पासपोर्ट… गाजियाबाद के 5 गांवों में कैसे खुला फर्जीवाड़े का पूरा खेल?
गाजियाबाद में फर्जी पासपोर्ट रैकेट का पर्दाफाश हुआ, जहां जाली दस्तावेजों, एक ही फोन नंबर और पते का इस्तेमाल करके 24 पासपोर्ट जारी किए गए थे। पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां फर्जी दस्तावेजों के सहारे एक ही मोबाइल नंबर और एक जैसे पते पर 24 पासपोर्ट बनवाए जाने का खुलासा हुआ है। इस मामले के सामने आते ही पुलिस और खुफिया एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। 1 फरवरी को जैसे ही यह मामला संज्ञान में आया, पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज की और त्वरित कार्रवाई करते हुए पोस्टमैन समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इस खुलासे ने पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया और पुलिस जांच व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक ही नंबर, एक जैसे पते और 24 पासपोर्ट
यह मामला भोजपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि गाजियाबाद के गांव त्योडी, भोजपुर, कलछिना, सैदपुर हुसैन और अतरौली से कुल 24 पासपोर्ट के लिए आवेदन किए गए थे। इनमें 7 आवेदन भोजपुर गांव से, 12 त्योडी से, 3 सैदपुर हुसैन से, जबकि 1-1 आवेदन कलछिना और अतरौली गांव से किया गया था। हैरानी की बात यह रही कि इन सभी 24 आवेदनों में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज किया गया था।
पुलिस सत्यापन के बाद भी बन गए पासपोर्ट
इन सभी आवेदनों की पुलिस वेरिफिकेशन भी की गई और इसके बाद पासपोर्ट बनकर भी आ गए। आमतौर पर पासपोर्ट बनने से पहले लोकल पुलिस और एलआईयू की जांच जरूरी होती है। इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आना कई सवाल खड़े करता है।
दो नए आवेदन से खुली पोल
पूरा मामला तब सामने आया जब दो नए पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया। इन दोनों आवेदनों में भी वही पता और वही मोबाइल नंबर दर्ज था। संदेह होने पर क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ने 11 दिसंबर को दिल्ली से एक पत्र भेजकर पुलिस से सभी आवेदकों की दोबारा जांच कराने को कहा। जब पुलिस ने 24 लोगों के पते पर जाकर जांच की, तो एक भी व्यक्ति वहां नहीं मिला।
पांच आरोपी गिरफ्तार, जांच का दायरा बढ़ा
मामला उजागर होते ही गाजियाबाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए विवेक गांधी, प्रकाश सुब्बा, पोस्टमैन अरुण कुमार, अमनदीप सिंह और सतवंत कौर को गिरफ्तार कर लिया। सभी पासपोर्ट अगस्त और सितंबर 2022 के बीच बनवाए गए थे। आरोपियों के पास से कई फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में जांच करने वाले पुलिसकर्मियों और खुफिया विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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