यूपी के प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन का मौका, किराए के घर में रहने वालों के बच्चे नहीं कर पाएंगे आवेदन
उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों के लिए आरटीई प्रवेश 2026-27 शुरू कर दिया है। 21 लाख से अधिक सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन किराए के मकानों में रहने वाले बच्चे इसके लिए पात्र नहीं हैं। पूरी जानकारी प्राप्त करें।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई का सपना देखने वाले हजारों बच्चों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार के बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के तहत फ्री एडमिशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में बिना फीस पढ़ने का मौका मिलेगा। जिला स्तर पर 2 फरवरी 2026 से ऑनलाइन आवेदन शुरू हो चुके हैं। हालांकि इस बार सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिससे कई परिवारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
क्या है RTE के तहत फ्री एडमिशन का नियम
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत कक्षा 8वीं तक मुफ्त शिक्षा का प्रावधान है। इसके साथ ही प्राइवेट स्कूलों में प्री-प्राइमरी से पहली कक्षा तक 25 प्रतिशत सीटें EWS और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। इनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनाथ, दिव्यांग और विधवा आश्रित बच्चों को शामिल किया गया है। इन सीटों पर पढ़ने वाले बच्चों से कोई फीस नहीं ली जाती और स्कूल ड्रेस भी मुफ्त मिलती है।
2.10 लाख से ज्यादा सीटों पर मिलेगा एडमिशन
बेसिक शिक्षा विभाग के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों की नर्सरी से पहली कक्षा तक करीब 2 लाख 10 हजार से अधिक सीटों पर RTE के तहत एडमिशन दिया जाएगा। इच्छुक अभिभावक 16 फरवरी 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद लॉटरी के जरिए बच्चों का चयन किया जाएगा।
किराए के मकान में रहने वालों पर रोक
इस साल सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि किराए के मकान में रहने वाले अभिभावक अपने बच्चों के लिए RTE के तहत आवेदन नहीं कर सकेंगे। बेसिक शिक्षा विभाग की नई गाइडलाइन के अनुसार, केवल वही अभिभावक आवेदन कर सकते हैं जिनके मकान का पंजीकरण रजिस्ट्रार कार्यालय में दर्ज है। इस नियम के लागू होने से हजारों किराएदार परिवारों के बच्चे फ्री एडमिशन से बाहर हो सकते हैं।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
एडमिशन के लिए जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, गरीबी रेखा से नीचे का राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, अनाथ और दिव्यांग से जुड़े प्रमाण पत्र अनिवार्य होंगे। किराए पर रहने वाले परिवारों के बच्चों को आवेदन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
नियमों के खिलाफ उठी आवाज
नियमों में बदलाव के बाद विरोध भी शुरू हो गया है। शिक्षा के अधिकार के लिए काम करने वाली अधिवक्ता शिखा शर्मा बग्घा का कहना है कि यह नियम RTE की मूल भावना के खिलाफ है। उनका कहना है कि इससे सबसे ज्यादा नुकसान वंचित और गरीब बच्चों को होगा, जो पहले ही शिक्षा से दूर हैं।
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