ओलंपिक में भारत पीछे क्यों? PM मोदी ने बताई कड़वी सच्चाई, बोले- आधे खेलों में लेते ही नहीं हिस्सा
ओलंपिक में 140 करोड़ से ज्यादा आबादी वाला भारत मेडल की रेस में कई देशों से पीछे क्यों रह जाता है? पीएम नरेंद्र मोदी ने इसकी एक बड़ी वजह बताई है। उन्होंने कहा कि भारत ओलंपिक के आधे खेलों में भी हिस्सा नहीं लेता। पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत ने 32 में से 16 खेलों में ही भाग लिया था। पीएम मोदी ने नए खेलों में भागीदारी बढ़ाने, प्रतिभाओं की कम उम्र में पहचान करने और उन्हें तैयार करने पर जोर दिया।
नई दिल्ली। भारत की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है, देश में करोड़ों युवा हैं और खेलों में प्रतिभाओं की भी कमी नहीं है। इसके बावजूद ओलंपिक में भारत की मेडल संख्या कई देशों की तुलना में कम क्यों रहती है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सवाल का एक अहम कारण बताया है। पीएम मोदी ने कहा कि ओलंपिक में भारत कई ऐसे खेलों में हिस्सा ही नहीं लेता, जिनमें दूसरे देश मेडल के लिए मुकाबला करते हैं। उनके मुताबिक, जब भारत प्रतियोगिता में शामिल ही नहीं होगा तो उन खेलों से मेडल जीतने का सवाल भी नहीं उठता। उन्होंने इसे देश के लिए एक कड़वी सच्चाई बताया।
पीएम मोदी ने बताया मेडल बढ़ाने का रास्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेलो इंडिया संवाद कार्यक्रम में खिलाड़ियों, छात्रों और स्वयंसेवकों को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ओलंपिक में कई अलग-अलग खेल होते हैं, लेकिन भारतीय टीमें इनमें से आधे खेलों में भी हिस्सा नहीं लेती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत पदकों की कुल संख्या के एक बड़े हिस्से के लिए प्रतिस्पर्धा ही नहीं करता। दशकों से ऐसा होता आया है। दुनिया के दूसरे देश उन खेलों में पदक जीतते हैं, जबकि भारत उन खेलों में हिस्सा तक नहीं लेता। उन्होंने कहा कि अगर ओलंपिक में भारत की पदक संख्या बढ़ानी है तो उन खेलों में भी भागीदारी बढ़ानी होगी और उनमें महारत हासिल करनी होगी।
पेरिस ओलंपिक में 32 में से 16 खेलों में ही उतरा था भारत
पीएम मोदी की बात को पेरिस ओलंपिक 2024 के आंकड़ों से भी समझा जा सकता है। पेरिस ओलंपिक के कार्यक्रम में शामिल 32 खेलों में भारत ने 16 खेलों में हिस्सा लिया था। यानी जिन खेलों में भारत ने हिस्सा ही नहीं लिया, उनमें पदक जीतने का अवसर भी भारतीय खिलाड़ियों के पास नहीं था। प्रधानमंत्री का जोर इसी दायरे को बढ़ाने पर है। उनका मानना है कि सिर्फ उन खेलों पर निर्भर रहने से भारत की मेडल संख्या में बड़ा बदलाव नहीं आएगा, जिनमें देश पहले से हिस्सा लेता रहा है। नए खेलों में प्रतिभाओं को तलाशना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करना जरूरी है।
पीएम मोदी बोले- खेल सिर्फ मेडल जीतने तक सीमित नहीं
प्रधानमंत्री ने खेलों को लेकर अपने दृष्टिकोण को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि खेलों का मतलब केवल पदक जीतना नहीं है। खेल राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का भी अहम हिस्सा हैं। पीएम मोदी ने कहा कि खेल शक्ति और युवा शक्ति को एक साथ जोड़ना विकसित भारत के निर्माण के अभियान का हिस्सा है। यानी सरकार की खेल नीति का फोकस सिर्फ ओलंपिक की मेडल टैली बढ़ाने पर नहीं, बल्कि देश में खेलों का माहौल मजबूत करने और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को खेलों से जोड़ने पर भी है।
15 अगस्त को किया था देशव्यापी टैलेंट सर्च का ऐलान
पीएम मोदी ने अपने 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस भाषण का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने लाल किले की प्राचीर से भारत के खेल संबंधी दृष्टिकोण को देश के सामने रखा था। प्रधानमंत्री ने 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए देशव्यापी प्रतिभा खोज अभियान शुरू करने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य कम उम्र में ही खेल प्रतिभाओं की पहचान करना और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना है। सरकार की कोशिश है कि जिन बच्चों में किसी खेल की विशेष प्रतिभा है, उन्हें शुरुआती स्तर पर पहचाना जाए और सही प्रशिक्षण के जरिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाए।
नए खेलों में उतरना क्यों जरूरी है?
ओलंपिक में भारत की चुनौती केवल मौजूदा खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने की नहीं है। भारत के सामने उन खेलों का दायरा बढ़ाने की भी चुनौती है, जिनमें अभी उसकी भागीदारी सीमित है। पीएम मोदी के मुताबिक, दुनिया के कई देश ऐसे खेलों में भी पदक जीत रहे हैं, जिनमें भारत की मौजूदगी कम है। ऐसे में अगर भारत को ओलंपिक में अपनी पदक संख्या बढ़ानी है तो ज्यादा से ज्यादा खेलों में खिलाड़ियों को उतारना होगा। यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने नए खेलों में प्रतिभा तलाशने, खिलाड़ियों को तैयार करने और उनमें विशेषज्ञता विकसित करने पर जोर दिया।
मेडल से आगे की सोच पर पीएम मोदी का जोर
पीएम मोदी ने साफ किया कि खेलों को केवल मेडल के आंकड़े से नहीं देखा जाना चाहिए। खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने के साथ देश की युवा शक्ति को दिशा देने का माध्यम भी हैं। लेकिन ओलंपिक के स्तर पर भारत की स्थिति सुधारने के लिए एक बात स्पष्ट है-जितने ज्यादा खेलों में भारत उतरेगा, उतने ही ज्यादा पदकों के लिए मुकाबला करने के अवसर भी बढ़ेंगे। प्रधानमंत्री ने इसी कमी को भारत की कड़वी सच्चाई बताते हुए नए खेलों में भागीदारी बढ़ाने को ओलंपिक में मेडल बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बताया है।
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