बाबा नीम करौरी की जन्मस्थली की संपत्ति पर विवाद, 6 पोतियों ने ट्रस्ट पर लगाया कब्जे का आरोप, DM ने बनाई जांच कमेटी
बाबा नीम करौरी की जन्मस्थली फिरोजाबाद के अकबरपुर गांव में पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद सामने आया है। बाबा की छह पोतियों ने श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट पर पैतृक घर, मंदिर और डाक बंगलिया पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। परिवार ने मंदिर के चंदे और ट्रस्ट के प्रबंधन पर भी सवाल उठाए हैं। डीएम ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है।
देश और दुनिया में लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र बाबा नीम करौरी की जन्मस्थली से अब संपत्ति विवाद जुड़ गया है। फिरोजाबाद के टूंडला क्षेत्र स्थित अकबरपुर गांव में बाबा की पैतृक संपत्ति, मंदिर और उससे जुड़े चंदे को लेकर परिवार और श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट आमने-सामने आ गए हैं। बाबा की छह पोतियों ने जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा को शिकायती पत्र देकर ट्रस्ट पर पैतृक घर, मंदिर और डाक बंगलिया पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि इन संपत्तियों को ट्रस्ट को दान नहीं किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने जांच के आदेश दिए हैं। एडीएम न्यायिक अरविंद कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है, जो पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेगी।
बाबा की जन्मस्थली से जुड़ा है पूरा विवाद
बाबा नीम करौरी, जिन्हें लक्ष्मी नारायण शर्मा के नाम से भी जाना जाता था, का जन्म फिरोजाबाद के अकबरपुर गांव में एक संपन्न परिवार में हुआ था। बाबा के परिवार में दो बेटे और एक बेटी थी। बड़े बेटे अनेक शर्मा, छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा और बेटी गिरिजा देवी थीं। परिवार के मुताबिक, बड़े बेटे अनेक शर्मा के एक बेटा और एक बेटी हैं। वहीं, छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियां हैं। इन्हीं छह पोतियों की ओर से अब बाबा की पैतृक संपत्ति को लेकर प्रशासन से शिकायत की गई है। परिवार का कहना है कि अकबरपुर स्थित बाबा की जन्मस्थली के पास मौजूद पैतृक घर से उनका भावनात्मक और पारिवारिक संबंध है, लेकिन अब उन्हें वहां प्रवेश करने से रोका जा रहा है।
घर में प्रवेश पर रोक और धमकी देने का आरोप
17 अगस्त को बाबा की बड़ी पोती भावना रावत के पति मनोज रावत ने प्रशासन को दी शिकायत में कहा कि परिवार के सदस्य अलग-अलग शहरों में रहते हैं। गांव आने पर वे अकबरपुर स्थित इसी पैतृक घर में रुकते थे। आरोप है कि अब परिवार के लोगों को घर में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है और उन्हें धमकाया भी जा रहा है। परिवार की ओर से यह भी मांग की गई है कि श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट का संचालन प्रशासन अपने अधीन ले। मनोज रावत ने डीएम से मिलकर सुझाव दिया कि जिलाधिकारी को ट्रस्ट का पदेन अध्यक्ष बनाया जाए और एसएसपी समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी ट्रस्ट के प्रबंधन में शामिल किया जाए।
मंदिर के चंदे और संपत्तियों के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
शिकायत में मंदिर और उससे जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन पर भी सवाल उठाए गए हैं। परिवार का आरोप है कि सरकारी स्तर पर बाबा नीम करौरी की जन्मस्थली के विकास का काम किया जा रहा है, इसके बावजूद मंदिर के नाम पर चंदा एकत्र किया जा रहा है। यह भी आरोप लगाया गया कि मंदिर और उससे जुड़ी संपत्तियों का निजी उपयोग किया जा रहा है। परिवार ने पूरे मामले की जांच कराने और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली की जांच करने की मांग की है।
ट्रस्ट ने आरोपों को किया खारिज
श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने परिवार की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि बाबा का घर, मंदिर और डाक बंगलिया ट्रस्ट को विधिवत दिए गए थे और ट्रस्ट कई वर्षों से इन संपत्तियों की देखरेख कर रहा है। उनके मुताबिक, ट्रस्ट का गठन वर्ष 1996 में बाबा की पत्नी रामबेटी ने किया था। वर्तमान में ट्रस्ट में 18 सदस्य हैं और बाबा की बेटी गिरिजा भटेले इसकी अध्यक्ष हैं। ट्रस्ट का कहना है कि उससे जुड़े लोग सेवा भावना के साथ काम कर रहे हैं और किसी भी संपत्ति का निजी उपयोग नहीं किया जा रहा है।
DM ने बनाई तीन सदस्यीय जांच कमेटी
पारिवारिक पक्ष और ट्रस्ट के दावों के सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच कराने का फैसला लिया है। डीएम संतोष कुमार शर्मा ने एडीएम न्यायिक अरविंद कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। कमेटी संपत्तियों के स्वामित्व, ट्रस्ट के गठन, दान से जुड़े दस्तावेजों और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा।
जन्मस्थली को धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब फिरोजाबाद प्रशासन बाबा नीम करौरी की जन्मस्थली अकबरपुर के विकास की योजना पर काम कर रहा है। प्रशासन यहां धार्मिक पर्यटन से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की तैयारी कर रहा है। जन्मस्थली परिसर का निरीक्षण भी किया जा चुका है। इसके अलावा अकबरपुर गांव का नाम बदलकर बाबा नीम करौरी धाम करने का प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में जन्मस्थली के विकास की योजना और उससे जुड़ी संपत्तियों के अधिकार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और महत्वपूर्ण हो गया है।
कैंची धाम से भी जुड़ा है बाबा का नाम
बाबा नीम करौरी की पहचान सिर्फ फिरोजाबाद तक सीमित नहीं है। उनका सबसे प्रसिद्ध आश्रम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम है। बाबा ने 15 जून 1964 को कैंची में आश्रम की स्थापना की थी। समय के साथ कैंची धाम देश और विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बन गया। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु कैंची धाम पहुंचते हैं। अमेरिका समेत कई देशों में बाबा नीम करौरी के अनुयायी हैं। इस वजह से फिरोजाबाद के अकबरपुर स्थित उनकी जन्मस्थली और नैनीताल के कैंची धाम के बीच एक गहरा आध्यात्मिक और भावनात्मक संबंध माना जाता है।
कैंची धाम के चढ़ावे को लेकर भी उठे थे सवाल
बाबा नीम करौरी से जुड़े धार्मिक संस्थानों और ट्रस्ट के प्रबंधन को लेकर इसी साल उत्तराखंड में भी सवाल उठे थे। नैनीताल स्थित कैंची धाम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और ट्रस्ट के खातों में पारदर्शिता से जुड़ा मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट तक पहुंचा था। कोर्ट ने सरकार से मंदिर में आने वाले दान और उसके प्रबंधन से संबंधित जानकारी मांगी थी। अब फिरोजाबाद में बाबा की पैतृक संपत्ति और ट्रस्ट के अधिकार को लेकर सामने आया विवाद एक बार फिर धार्मिक ट्रस्टों की संपत्ति, प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल इस मामले में परिवार और ट्रस्ट दोनों अपने-अपने दावों पर कायम हैं। अब तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट से ही साफ हो सकेगा कि अकबरपुर स्थित बाबा नीम करौरी की पैतृक संपत्तियों का स्वामित्व किसके पास है और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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