इस बार कब मनाया जाएगा रक्षाबंधन का त्यौहार, कितने बजे तक बहन भाई को बांध सकती है राखी, जानिए राहुकाल और शुभ संयोग की पूरी कहानी  

रक्षाबंधन इस साल 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इस बार भद्रा का साया नहीं रहेगा और पूर्णिमा तिथि सुबह तक रहेगी। सुबह 6 बजे से 9:45 बजे तक राखी बांधने का अच्छा समय माना जा रहा है, जबकि 9:45 बजे से 12 बजे तक राहुकाल रहेगा। सुकर्मा योग और शतभिषा नक्षत्र के संयोग के बीच जानिए राखी बांधने का शुभ समय, पूजा विधि, श्रावणी पर्व और किस तरह की राखी बांधना शुभ माना जाता है।

Aug 25, 2026 - 12:42
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इस बार कब मनाया जाएगा रक्षाबंधन का त्यौहार, कितने बजे तक बहन भाई को बांध सकती है राखी, जानिए राहुकाल और शुभ संयोग की पूरी कहानी  

रक्षाबंधन का पर्व इस साल 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक यह पर्व इस बार कई शुभ संयोगों के साथ आ रहा है। सबसे खास बात यह है कि रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा, जिससे बहनों को राखी बांधने में किसी तरह की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे तक रहेगी। हिंदू धर्म में उदयातिथि की मान्यता होने के कारण रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पूर्णिमा तिथि के दौरान सुबह राखी बांधना विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। हालांकि, सुबह 9:45 बजे से दोपहर 12 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस दौरान राखी बांधने से बचने की सलाह दी गई है। इसके बाद दोपहर में भी बहनें अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं।

सुबह 6 बजे से 9:45 बजे तक रहेगा अच्छा समय
रक्षाबंधन के दिन दिनभर भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में राहुकाल को छोड़कर पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है। सुबह 6 बजे से 9:45 बजे तक राखी बांधने का अच्छा समय रहेगा। पूर्णिमा तिथि के दौरान राखी बांधना अधिक शुभ माना जाता है। इसके बाद सुबह 9:45 बजे से दोपहर 12 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस दौरान राखी बांधने से बचना चाहिए। राहुकाल समाप्त होने के बाद दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक राखी बांधने का दूसरा शुभ समय माना जा रहा है। इसके बाद भी भाई को राखी बांधी जा सकती है और इसमें किसी तरह का दोष नहीं बताया गया है। इस बार नहीं रहेगा भद्रा का साया रक्षाबंधन पर भद्रा को लेकर अक्सर लोगों में असमंजस की स्थिति रहती है। कई बार भद्रा काल समाप्त होने के बाद ही राखी बांधने की परंपरा निभाई जाती है। लेकिन इस बार रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा। ऐसे में बहनें बिना किसी बाधा के अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांध सकेंगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, राहुकाल के समय को छोड़कर दिन में राखी बांधने में कोई विशेष बाधा नहीं है।

सुकर्मा योग का भी बन रहा है संयोग
इस साल रक्षाबंधन पर सुकर्मा योग का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस योग में किए गए धार्मिक और शुभ कार्यों का फल शुभ माना जाता है। ऐसे में बहन द्वारा भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करना विशेष फलदायी माना जा रहा है। रक्षाबंधन पर बन रहे इस शुभ योग को भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और मजबूती से जोड़कर देखा जा रहा है।

शतभिषा नक्षत्र में मनाया जाएगा रक्षाबंधन
इस बार रक्षाबंधन का पर्व शतभिषा नक्षत्र में पड़ रहा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस नक्षत्र को मानसिक शांति और स्वास्थ्य से जुड़ा माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस नक्षत्र में भाई की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करना शुभ माना जाता है। ऐसे में इस बार रक्षाबंधन पर बहनें रक्षा सूत्र बांधने के साथ भाई के सुखी और स्वस्थ जीवन की प्रार्थना करेंगी। 

कार्टून वाली राखी की जगह मौली या रेशम की डोरी बांधना शुभ
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, रक्षाबंधन पर पारंपरिक रक्षा सूत्र का विशेष महत्व है। मौली या रेशम की डोरी से बनी राखी को शुभ माना जाता है। उनका कहना है कि कार्टून या अन्य सजावटी सामग्री वाली राखियों को पारंपरिक रक्षा सूत्र का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। छोटे और बड़े दोनों भाइयों को मौली या रेशम की डोरी से बना रक्षा सूत्र बांधना अधिक शुभ माना जाता है। छोटे बच्चों के लिए बहनें राखी के साथ कोई खिलौना या अन्य उपहार दे सकती हैं। पुराने समय में कच्चे सूत को पीले रंग में रंगकर रक्षा सूत्र बनाया जाता था। ब्राह्मण भी अपने यजमानों को इसी प्रकार का रक्षा सूत्र बांधकर उनके स्वस्थ और दीर्घ जीवन की कामना करते थे।

ऐसे करें राखी की पूजा
रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान का ध्यान और पूजा करनी चाहिए। इसके बाद भाई को तिलक लगाकर आरती उतारी जाती है और उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा जाता है। राखी बांधते समय बहन भाई की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करती है। वहीं, भाई अपनी बहन की रक्षा और उसके साथ हमेशा खड़े रहने का संकल्प लेता है। मान्यता के अनुसार, कुछ बहनें राखी बांधने से पहले उपवास भी रखती हैं और पूजा के बाद भाई को राखी बांधती हैं।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content