क्या च्यूइंग गम से कम हो सकता है कैंसर का खतरा? नई रिसर्च में 93 फीसदी तक घटा HPV, जानिए पूरा मामला
क्या च्यूइंग गम चबाने से सिर और गर्दन के कैंसर का खतरा कम हो सकता है? नई रिसर्च में बायोइंजीनियर्ड च्यूइंग गम से ओरल HPV का स्तर 93% तक कम होने का दावा किया गया है। जानिए रिसर्च में क्या मिला और डॉक्टर इसे लेकर क्या कहते हैं।
क्या च्यूइंग गम चबाने से मुंह में मौजूद ऐसे वायरस और बैक्टीरिया कम किए जा सकते हैं, जो आगे चलकर कैंसर के खतरे से जुड़े हो सकते हैं? नई रिसर्च ने इस दिशा में उम्मीद जरूर जगाई है। वैज्ञानिकों ने एक बायोइंजीनियर्ड च्यूइंग गम विकसित किया है, जिसके शुरुआती अध्ययन में ओरल ह्यूमन पैपिलोमावायरस यानी HPV के स्तर में करीब 93% तक कमी देखी गई। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सामान्य च्यूइंग गम चबाने से कैंसर से बचा जा सकता है या मौजूदा कैंसर का इलाज हो सकता है। यह एक शुरुआती वैज्ञानिक शोध है और इंसानों में कैंसर की रोकथाम के लिए इसकी प्रभावशीलता अभी साबित होना बाकी है।
आखिर कैसे काम करती है यह बायोइंजीनियर्ड च्यूइंग गम?
वैज्ञानिकों का ध्यान अब सिर्फ कैंसर बनने के बाद उसके इलाज तक सीमित नहीं है। ओरल हेल्थ और मुंह में मौजूद माइक्रोबायोम यानी बैक्टीरिया और वायरस के कैंसर से संभावित संबंधों पर भी रिसर्च बढ़ रही है। इसी दिशा में विकसित की गई बायोइंजीनियर्ड च्यूइंग गम का उद्देश्य मुंह में मौजूद कुछ वायरस और हानिकारक सूक्ष्मजीवों के स्तर को कम करना है। शुरुआती नतीजों में खासतौर पर ओरल HPV के स्तर में बड़ी कमी देखी गई है। डॉक्टर्स के मुताबिक ये निष्कर्ष उत्साहजनक हैं, लेकिन इसे नए मरीजों के लिए तुरंत उपलब्ध समाधान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक यह अभी प्रारंभिक वैज्ञानिक सफलता है।
93% HPV कम होने का मतलब कैंसर का खतरा 93% कम होना नहीं
रिसर्च से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि HPV के स्तर में कमी और कैंसर के खतरे में कमी को एक जैसा नहीं माना जा सकता। अध्ययन में ओरल HPV के स्तर में करीब 93% तक कमी की बात सामने आई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि च्यूइंग गम चबाने से सिर और गर्दन के कैंसर का जोखिम भी 93% कम हो जाएगा। कैंसर एक जटिल बीमारी है और इसके पीछे कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। इसलिए इस रिसर्च को कैंसर की रोकथाम की संभावित नई दिशा के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा।
भारत में HPV से जुड़े कैंसर का क्या है कनेक्शन?
HPV की भूमिका सिर और गर्दन के सभी कैंसर में एक जैसी नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार भारत में करीब 4% ओरल कैविटी कैंसर HPV संक्रमण से जुड़े पाए जाते हैं। वहीं ऑरोफरीन्जियल कैंसर, जिसमें टॉन्सिल और जीभ के आधार से जुड़े कैंसर शामिल हैं, के करीब 30% मामले HPV से संबंधित हो सकते हैं। वहीं भारत के बाहर कई देशों में ऑरोफरीन्जियल कैंसर के लगभग 60% मामले HPV संक्रमण से जुड़े बताए जाते हैं। इस अंतर की वजह से HPV और सिर-गर्दन के कैंसर के बीच संबंध को समझने के लिए अलग-अलग आबादी में लगातार रिसर्च की जा रही है।
HPV संक्रमण के तुरंत बाद कैंसर नहीं होता
HPV से संक्रमित होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को तुरंत कैंसर हो जाएगा। कैंसर विकसित होने की प्रक्रिया आमतौर पर लंबी होती है। लगातार HPV संक्रमण और मुंह में मौजूद अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों की भूमिका समय के साथ महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी वजह से वैज्ञानिक ऐसी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं, जिनसे मुंह में मौजूद संभावित जोखिम वाले वायरस और माइक्रोऑर्गेनिज्म के स्तर को नियंत्रित किया जा सके। इसी संदर्भ में चिकित्सीय च्यूइंग गम को भविष्य की संभावित रोकथाम रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
एक बार चबाने से नहीं होगा फायदा
अगर भविष्य में इस तरह की च्यूइंग गम को क्लिनिकल इस्तेमाल की मंजूरी मिलती है, तो इसका उद्देश्य एक बार इस्तेमाल करके समस्या खत्म करना नहीं होगा। डॉक्टरों के मुताबिक HPV या अन्य हानिकारक माइक्रोऑर्गेनिज्म के स्तर को नियंत्रित करने के लिए किसी भी संभावित थेरेपी का नियमित इस्तेमाल जरूरी हो सकता है। हालांकि इसकी सही मात्रा, अवधि और प्रभाव को लेकर अभी और क्लिनिकल रिसर्च की जरूरत है।
अभी आम च्यूइंग गम को इलाज न समझें
इस रिसर्च के बाद सबसे जरूरी सावधानी यह है कि बाजार में मिलने वाली सामान्य च्यूइंग गम को कैंसर से बचाव का इलाज न माना जाए। बायोइंजीनियर्ड च्यूइंग गम एक विशेष वैज्ञानिक अवधारणा है। इसके शुरुआती परिणाम लैब और रिसर्च स्तर पर उत्साहजनक बताए गए हैं, लेकिन इंसानों में कैंसर की रोकथाम के लिए इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता अभी साबित होनी बाकी है। इसलिए फिलहाल इसे कैंसर की रोकथाम या इलाज का विकल्प नहीं माना जा सकता।
कैंसर के खतरे को कम करने के लिए अभी क्या करें?
सिर और गर्दन के कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए विशेषज्ञ कई स्थापित सावधानियों पर जोर देते हैं। इनमें तंबाकू से दूरी बनाना, ज्यादा शराब के सेवन से बचना, मुंह की नियमित सफाई रखना और किसी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करना शामिल है। HPV से बचाव के लिए उपलब्ध वैक्सीनेशन भी महत्वपूर्ण हो सकता है। किसी व्यक्ति को मुंह में लंबे समय तक घाव, गांठ, दर्द, निगलने में परेशानी, आवाज में बदलाव या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
कैंसर रिसर्च में क्यों अहम है यह च्यूइंग गम?
बायोइंजीनियर्ड च्यूइंग गम की यह रिसर्च इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह कैंसर को बीमारी बनने के बाद नियंत्रित करने के बजाय उसके संभावित जोखिम कारकों को पहले ही कम करने की दिशा में एक नया विचार सामने रखती है।
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