वंदे मातरम पर फिर सियासी संग्राम, अमित शाह बोले- कांग्रेस ने 1937 में राष्ट्रगीत के किए दो टुकड़े, अब फिर उसी रास्ते पर

वंदे मातरम के सिर्फ पहले दो छंद गाने के कांग्रेस के फैसले पर सियासत तेज हो गई है। अमित शाह ने इसे 1937 के फैसले और तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ते हुए कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। भाजपा इसे राष्ट्रगीत का अपमान बता रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा उसका भावनात्मक विषय है। जानिए 1937 में कांग्रेस ने सिर्फ दो छंद क्यों चुने थे, 2026 के नए कानून और गृह मंत्रालय के आदेश क्या कहते हैं और आखिर वंदे मातरम को लेकर फिर क्यों छिड़ गई है इतनी बड़ी राजनीतिक लड़ाई।

Aug 20, 2026 - 14:51
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वंदे मातरम पर फिर सियासी संग्राम, अमित शाह बोले- कांग्रेस ने 1937 में राष्ट्रगीत के किए दो टुकड़े, अब फिर उसी रास्ते पर

नई दिल्ली। वंदे मातरम के सिर्फ दो छंद गाने के कांग्रेस के फैसले ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस फैसले को लेकर कांग्रेस पर सीधा हमला बोला है। शाह ने कहा कि 1937 में कांग्रेस ने राष्ट्रगीत के दो टुकड़े कर मुस्लिम तुष्टीकरण किया था और अब एक बार फिर कांग्रेस उसी फैसले को आगे बढ़ा रही है। अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि वंदे मातरम को पूरा न गाने का फैसला हैरान करने वाला और देशविरोधी है। उनके मुताबिक, कांग्रेस के 1937 के फैसले ने दो-राष्ट्र सिद्धांत को मजबूती दी और आगे चलकर देश के विभाजन की नींव पड़ी। शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के उस पुराने फैसले को सुधारा है। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि वंदे मातरम के कितने छंद गाए जाएं, बल्कि विवाद इस बात पर पहुंच गया है कि कांग्रेस का नया फैसला कानून, इतिहास और राष्ट्रीय राजनीति के बीच किस तरह की बहस खड़ी करेगा।

कांग्रेस ने सिर्फ पहले 2 छंद गाने का किया ऐलान
इस पूरे विवाद की शुरुआत कांग्रेस वर्किंग कमेटी के एक फैसले से हुई। बुधवार को कांग्रेस ने घोषणा की कि पार्टी अपने सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के 6 में से सिर्फ शुरुआती दो छंद गाएगी। यह फैसला ऐसे समय में आया, जब 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के गायन को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। भाजपा ने आरोप लगाया था कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पूरा वंदे मातरम गाए जाने पर सोनिया गांधी ने इसे रोकने की कोशिश की। भाजपा ने इससे जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया और दावा किया कि राहुल गांधी भी पूरे गायन के दौरान असहज नजर आए। हालांकि कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

सोनिया गांधी के इशारे पर भी हुआ था विवाद
भाजपा के आरोपों के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस मुख्यालय में पूरा वंदे मातरम गाया गया था और इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं की गई। कांग्रेस के मुताबिक, सोनिया गांधी का इशारा गीत रुकवाने के लिए नहीं था। वह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं, क्योंकि वह लंबे समय से खड़े थे। लेकिन अब कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सिर्फ पहले दो छंद गाने के फैसले के बाद भाजपा ने एक बार फिर इस मुद्दे को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।

अमित शाह बोले- 1937 में तुष्टीकरण के लिए लिया गया था फैसला
गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ दो छंद गाने का फैसला तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा है। शाह के मुताबिक, 1937 में कांग्रेस ने वंदे मातरम को दो हिस्सों में बांटने का फैसला किया था। उस समय कांग्रेस ने राष्ट्रीय कार्यक्रमों में सिर्फ शुरुआती दो छंद गाने का निर्णय लिया था। अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का यह फैसला मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए लिया गया था और इसी तरह की राजनीति ने आगे चलकर दो-राष्ट्र सिद्धांत को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि देश में अब तुष्टीकरण की राजनीति नहीं चलेगी और भाजपा कांग्रेस के इस फैसले का विरोध जनता के बीच से लेकर संसद और विधानसभा तक करेगी।

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस को नई मुस्लिम लीग बताया
वंदे मातरम विवाद पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्रीय गीत का अपमान किया है। नितिन नवीन ने कांग्रेस को नई मुस्लिम लीग तक कह दिया। उनका कहना था कि यह फैसला उन शहीदों का अपमान है, जिन्होंने वंदे मातरम को अपने मन में रखकर देश की आजादी के लिए बलिदान दिया। भाजपा अब इस मुद्दे को सिर्फ कांग्रेस के एक संगठनात्मक फैसले के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद और तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।

कांग्रेस का पलटवार- वंदे मातरम हमारे लिए भावनात्मक मुद्दा 
भाजपा के हमलों के बाद कांग्रेस ने भी जवाब दिया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि वंदे मातरम स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा रहा है और कांग्रेस के लिए यह भावनात्मक मुद्दा है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा नहीं थी और इसलिए उसके लिए वंदे मातरम एक राजनीतिक मुद्दा हो सकता है, लेकिन कांग्रेस के लिए इसका अलग ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व है। 

1937 में आखिर कांग्रेस ने पहले 2 छंद ही क्यों चुने थे?
इस विवाद की जड़ 89 साल पुराना वह फैसला है, जिसे लेकर अब एक बार फिर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। द नेहरू आर्काइव के मुताबिक, 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 1937 के बीच कांग्रेस वर्किंग कमेटी की कलकत्ता बैठक हुई थी। इस बैठक में फैसला लिया गया कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सिर्फ पहले दो छंद गाए जाएंगे। उस समय इसके पीछे तर्क दिया गया था कि वंदे मातरम के बाद के हिस्सों में धार्मिक और देवी-देवताओं से जुड़े संदर्भ हैं, जिन पर कुछ मुस्लिम नेताओं को आपत्ति थी। 29 अक्टूबर 1937 को जवाहरलाल नेहरू ने इस मुद्दे पर अपनी राय स्पष्ट की थी। उनके मुताबिक, पहले दो छंदों में ऐसी कोई बात नहीं थी जो किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ हो, जबकि बाद के हिस्सों में धार्मिक प्रतीक, कल्पना और रूपक आते हैं। इसलिए कांग्रेस ने उस समय ऐसा हिस्सा चुनने का फैसला किया, जिसे सभी समुदाय आसानी से स्वीकार कर सकें। नेहरू ने 6 अप्रैल 1938 को मोहम्मद अली जिन्ना को लिखे पत्र में भी इसी तर्क को दोहराया था।

अब कानून और सरकारी आदेश क्या कहते हैं?
वंदे मातरम को लेकर राजनीतिक बहस के बीच कानूनी स्थिति भी महत्वपूर्ण हो गई है। वर्ष 2026 में इससे जुड़े दो सरकारी आदेश और एक संशोधित कानून सामने आए हैं। 31 जनवरी 2026 को गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत से संबंधित आदेश जारी किया था। इसमें वंदे मातरम के पूरे 6 छंदों को आधिकारिक संस्करण बताया गया। आदेश के मुताबिक, जब राष्ट्रगीत गाया जाए तो आधिकारिक संस्करण का पालन किया जाना चाहिए। इसके लिए 3 मिनट 10 सेकेंड की समय-सीमा भी बताई गई। आदेश में राष्ट्रगीत के गायन या वादन के दौरान सम्मान और शिष्टाचार बनाए रखने तथा सुनने वालों को सावधान मुद्रा में खड़े होने का निर्देश दिया गया। इसके बाद 9 जुलाई 2026 को गृह मंत्रालय ने राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों को राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान से जुड़े प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। निर्देश में कहा गया कि दोनों के सही पाठ, उच्चारण और तय प्रोटोकॉल का पालन किया जाए। यदि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों गाए या बजाए जाते हैं तो पहले राष्ट्रगीत और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। हालांकि इन आदेशों में 6 छंद पूरे न गाने पर किसी अलग कार्रवाई या सजा का स्पष्ट प्रावधान नहीं बताया गया है।

नया कानून क्या कहता है?
जुलाई 2026 में प्रेवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल ऑनर अमेंडमेंट बिल लाया गया था। राज्यसभा ने इसे 29 जुलाई और लोकसभा ने 30 जुलाई 2026 को पारित किया। 11 अगस्त को यह कानून बन गया।  इस संशोधन का उद्देश्य वंदे मातरम को 1971 के कानून के तहत कानूनी सुरक्षा देना है। कानून के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकता है या उस सभा में रुकावट डालता है जहां राष्ट्रीय गीत गाया जा रहा है, तो उसे 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। हालांकि कानून में यह स्पष्ट नहीं है कि वंदे मातरम के पूरे 6 छंद न गाना अपने आप में अपराध होगा। यही वजह है कि कांग्रेस के सिर्फ पहले दो छंद गाने के फैसले पर राजनीतिक विवाद तो तेज हो गया है, लेकिन कानूनी बहस अब भी अलग सवाल खड़ा करती है।

150 साल पुराना गीत, जो आजादी की लड़ाई का नारा बन गया 
वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को लिखा था। बाद में 1882 में यह उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में प्रकाशित हुआ। वर्ष 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम का गायन किया। इसके बाद यह गीत राष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाने लगा। धीरे-धीरे वंदे मातरम स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख नारा बन गया। देश को औपनिवेशिक शासन से आजाद कराने की लड़ाई लड़ रहे स्वतंत्रता सेनानियों के लिए यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की आवाज बन गया।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content