अवध विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बेटियों का दबदबा, 120 में 86 स्वर्ण पदक छात्राओं के नाम, राज्यपाल ने कहा- यही है बदलते भारत की तस्वीर

अयोध्या के अवध विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में 1 लाख 66 हजार 55 विद्यार्थियों को उपाधियां दी गईं। 120 स्वर्ण पदकों में 86 छात्राओं ने हासिल किए। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बेटियों की उपलब्धि को बदलते भारत की तस्वीर बताया। जानिए समारोह में शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, नशामुक्ति और पर्यावरण को लेकर क्या संदेश दिया गया।

Aug 13, 2026 - 11:59
Aug 13, 2026 - 12:00
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अवध विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बेटियों का दबदबा, 120 में 86 स्वर्ण पदक छात्राओं के नाम, राज्यपाल ने कहा- यही है बदलते भारत की तस्वीर

अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा उन बेटियों की रही, जिन्होंने स्वर्ण पदकों की दौड़ में छात्रों को काफी पीछे छोड़ दिया। समारोह में कुल 120 स्वर्ण पदक वितरित किए गए, जिनमें 86 छात्राओं और 34 छात्रों के हिस्से आए। राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने छात्राओं की इस उपलब्धि को बदलते भारत की तस्वीर बताया और कहा कि बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रही हैं। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल की मौजूदगी में 1 लाख 66 हजार 55 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इसी दौरान उपाधियों और अंकपत्रों को डिजिलॉकर में उपलब्ध कराने की प्रक्रिया का भी शुभारंभ किया गया। समारोह में शिक्षा, शोध, महिला सशक्तीकरण, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े कई कार्यक्रमों को भी आगे बढ़ाया गया।

120 स्वर्ण पदकों में 86 बेटियों के नाम
दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक वितरण का पल विद्यार्थियों और उनके परिवारों के लिए खास रहा। कुल 120 स्वर्ण पदकों में 86 छात्राओं ने अपने नाम किए, जबकि 34 स्वर्ण पदक छात्रों को मिले। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्राओं की इस उपलब्धि को केवल विश्वविद्यालय की सफलता नहीं बल्कि बदलते सामाजिक और शैक्षिक परिवेश का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रही हैं और उनकी यह सफलता देश में हो रहे बदलाव को दिखाती है। स्वर्ण पदक पाने वाले विद्यार्थियों के माता-पिता और अभिभावकों को भी मंच पर बुलाया गया। इसके जरिए विद्यार्थियों की सफलता के पीछे परिवार के योगदान और सहयोग को सम्मान दिया गया।

1.66 लाख विद्यार्थियों को मिलीं उपाधियां
अवध विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में कुल 1 लाख 66 हजार 55 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। विद्यार्थियों के लिए इस उपलब्धि को और सुविधाजनक बनाने की दिशा में उपाधियों और अंकपत्रों को डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। इससे विद्यार्थियों को अपने शैक्षिक दस्तावेज डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर आसानी से इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।

कला और शिक्षा के क्षेत्र में भी सम्मान
समारोह में कला एवं शिल्प के क्षेत्र में योगदान के लिए श्री भग्गालाल कुमार को विद्यावाचस्पति की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इसके अलावा शोध और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चार शिक्षकों को सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार प्रदान किए गए। विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा लिखी गई पुस्तकों का लोकार्पण भी समारोह के दौरान किया गया। इस तरह दीक्षांत समारोह केवल विद्यार्थियों को डिग्री और पदक देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा और शोध के क्षेत्र में योगदान देने वाले शिक्षकों और कला के क्षेत्र में काम करने वाली प्रतिभाओं को भी सम्मान मिला।

गांवों के स्कूलों में पहुंचेगी प्रेरणात्मक किताबें
राज्यपाल ने गोद लिए गए गांवों के विद्यालयों में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। मुमताज नगर और सरायामा के विद्यालयों की लाइब्रेरी के लिए 100-100 प्रेरणात्मक पुस्तकें दी गईं। इसके साथ ही बाराबंकी और सुल्तानपुर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को किट वितरित की गईं। राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश में अब तक 75 हजार से अधिक आंगनवाड़ी किट पहुंचाई जा चुकी हैं। समारोह में एचपीवी टीकाकरण से जुड़े प्रशस्ति-पत्र भी वितरित किए गए।

महिला और बाल कल्याण को विकास से जोड़ा
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए महिला एवं बाल कल्याण, पोषण और टीकाकरण से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के जरिए महिलाओं और बच्चों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया जा रहा है। उनका जोर इस बात पर रहा कि विकास का मतलब केवल आर्थिक प्रगति नहीं है। जब महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसर मिलेंगे, तभी विकास का दायरा व्यापक होगा।

युवाओं को दिया नशे से दूर रहने का संदेश
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने युवाओं को नशे से दूर रहने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि नशा युवा शक्ति नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से खुद नशे से दूर रहने के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों को भी इसके नुकसान के प्रति जागरूक करने की अपील की। राज्यपाल का संदेश खास तौर पर उन युवाओं के लिए था, जिन्हें देश के भविष्य के रूप में देखा जाता है।

काशी की महिलाओं का उदाहरण देकर समझाया महिला सशक्तीकरण
महिला सशक्तीकरण और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए राज्यपाल ने काशी की महिलाओं का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि वहां महिलाएं तालाबों और नदियों की सफाई में योगदान देने के साथ-साथ बेकार कपड़ों से उपयोगी वस्तुएं तैयार कर रोजगार भी हासिल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त किए बिना विकसित भारत और विश्वगुरु भारत के लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता। यह उदाहरण देकर उन्होंने विद्यार्थियों को यह संदेश देने की कोशिश की कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी होना चाहिए।

डिग्री के बाद असली परीक्षा शुरू होगी
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से शिक्षा को केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य शोध, नवाचार और कौशल विकास से जुड़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी शिक्षा का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण में करने का आह्वान किया। उनके संदेश का मूल यही रहा कि विश्वविद्यालय से मिलने वाली डिग्री मंजिल नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत है। अवध विश्वविद्यालय का 31वां दीक्षांत समारोह इसी संदेश के साथ कई उपलब्धियों को समेटे नजर आया। एक तरफ जहां 1 लाख 66 हजार से अधिक विद्यार्थियों को उपाधियां मिलीं, वहीं 120 स्वर्ण पदकों में 86 पर बेटियों का कब्जा रहा। मंच पर माता-पिता को सम्मान देना, गांवों की लाइब्रेरी के लिए किताबें देना और महिला-बाल कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना समारोह को केवल शैक्षिक आयोजन के बजाय सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ता नजर आया।

रिपोर्ट- अनूप कुमार 

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