फेसबुक और इंस्टाग्राम से युवाओं की बिगड़ रही मेंटल हेल्थ, कोर्ट ने मेटा पर लगाया 9030 करोड़ का जुर्माना, जानिए क्या है पूरा मामला 

अमेरिकी कोर्ट ने Meta पर 9030 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। अदालत ने माना कि Facebook और Instagram के कारण युवाओं की मानसिक सेहत प्रभावित हुई। जुर्माने का बड़ा हिस्सा इलाज, जागरूकता और प्रिवेंशन कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा।

Aug 7, 2026 - 12:07
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फेसबुक और इंस्टाग्राम से युवाओं की बिगड़ रही मेंटल हेल्थ, कोर्ट ने मेटा पर लगाया 9030 करोड़ का जुर्माना, जानिए क्या है पूरा मामला 

नई दिल्ली। फेसबुक और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी Meta को अमेरिका में बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिकी राज्य न्यू मैक्सिको की अदालत ने कंपनी पर 942 मिलियन डॉलर यानी करीब 9030 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। अदालत का मानना है कि Meta के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने युवाओं की मानसिक सेहत पर नकारात्मक असर डाला और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर कंपनी पर्याप्त कदम नहीं उठा सकी। अदालत ने यह भी तय किया है कि जुर्माने की रकम का बड़ा हिस्सा सीधे युवाओं की मदद पर खर्च किया जाएगा। कुल राशि में से 420 मिलियन डॉलर यानी करीब 3993 करोड़ रुपए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी उपचार सेवाओं के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। बाकी राशि अगले पांच वर्षों में जागरूकता अभियान, रोकथाम कार्यक्रम और स्क्रीनिंग सेवाओं पर खर्च होगी।

दो चरणों में चला मुकदमा, कुल 9030 करोड़ का जुर्माना
यह मामला दो अलग-अलग चरणों में अदालत के सामने आया। पहले चरण में अदालत ने Meta पर 375 मिलियन डॉलर यानी करीब 3571 करोड़ रुपए का सिविल जुर्माना लगाया। अदालत ने माना कि कंपनी को यह जानकारी थी कि उसके प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामले सामने आए, लेकिन कंपनी ने इस खतरे को प्रभावी तरीके से नहीं रोका। दूसरे चरण में अदालत ने अतिरिक्त 567 मिलियन डॉलर यानी करीब 5390 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। दोनों चरणों को मिलाकर Meta पर कुल 942 मिलियन डॉलर यानी लगभग 9030 करोड़ रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया।

कोर्ट में Meta के सिस्टम में बदलाव की भी मांग
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत से Meta के प्लेटफॉर्म में कई बुनियादी बदलाव लागू कराने की मांग की। इनमें युवाओं को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर रोके रखने वाले फीचर्स को सीमित करना, एज वैरिफिकेशन प्रक्रिया को मजबूत बनाना, डिफॉल्ट प्राइवेसी सेटिंग्स को सुरक्षित करना और बच्चों के यौन शोषण को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाना शामिल था।

न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल ने दायर किया था मुकदमा
यह मुकदमा न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेस ने दायर किया था। उनका आरोप था कि Meta के फेसबुक और इंस्टाग्राम बच्चों के लिए पर्याप्त रूप से सुरक्षित नहीं हैं और कंपनी ने संभावित खतरों को जानते हुए भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि Meta का एल्गोरिदम इस तरह तैयार किया गया है, जिससे बच्चे और किशोर ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहें। अभियोजन पक्ष का दावा था कि इससे सोशल मीडिया की लत, डिप्रेशन और दूसरी मानसिक समस्याओं का खतरा बढ़ता है। मुकदमे में यह आरोप भी लगाया गया कि प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बच्चों को फंसाने और यौन शोषण जैसे अपराधों के लिए किया गया तथा कंपनी को इसकी जानकारी होने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए।

अब Meta के सामने क्या विकल्प हैं ?
Meta ने अदालत के फैसले से असहमति जताई है और साफ किया है कि वह इस जुर्माने के खिलाफ अपील करेगी। कंपनी का कहना है कि वह अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है, लेकिन हर गलत गतिविधि को पूरी तरह रोकना चुनौतीपूर्ण है। मामले के अगले चरण में अदालत यह भी तय कर सकती है कि क्या Meta को अपने एल्गोरिदम में अनिवार्य बदलाव करने होंगे और क्या बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों में कंपनी की आर्थिक जिम्मेदारी और बढ़ाई जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद अमेरिका के 40 से अधिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल भी Meta के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठा सकते हैं। इससे कंपनी पर भविष्य में और अधिक नियामकीय दबाव बनने की संभावना है।

अदालत ने एज वैरिफिकेशन पर भी रखी अपनी राय
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अमेरिका का चिल्ड्रन्स ऑनलाइन प्राइवेसी एक्ट (COPPA) Meta को 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए ऐसे एज वैरिफिकेशन टूल लागू करने की अनुमति नहीं देता, जिनमें बच्चों का निजी डेटा एकत्र करना या उन्हें ऑनलाइन ट्रैक करना शामिल हो। अदालत ने यह भी माना कि सिर्फ Meta ही नहीं, बल्कि अन्य सोशल मीडिया कंपनियों को भी इस तरह के अनिवार्य एज वैरिफिकेशन के आदेश देना व्यावहारिक नहीं होगा और इससे कंपनियों पर अत्यधिक बोझ पड़ सकता है।

एल्गोरिदम कैसे बढ़ाता है सोशल मीडिया की लत ?
विशेषज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम इस तरह डिजाइन किया जाता है कि यूजर अधिक से अधिक समय तक ऐप पर बना रहे। लगातार नए वीडियो, पोस्ट, नोटिफिकेशन और लाइक्स यूजर को बार-बार प्लेटफॉर्म पर लौटने के लिए प्रेरित करते हैं। समय के साथ यही व्यवहार आदत और फिर लत का रूप ले सकता है।

रिसर्च क्या कहती है ?
प्यू रिसर्च सेंटर की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 46 प्रतिशत अमेरिकी किशोरों ने स्वीकार किया कि वे लगभग हर समय ऑनलाइन रहते हैं। अमेरिका के सर्जन जनरल ने 2023 की एडवाइजरी में चेतावनी दी थी कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों और किशोरों में डिप्रेशन तथा एंग्जायटी का खतरा बढ़ा सकता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की रिसर्च के अनुसार सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स और लगातार नया कंटेंट देखने से दिमाग में डोपामिन रिलीज होता है। यह वही रसायन है जो किसी आदत या नशे जैसी प्रतिक्रिया पैदा करता है।

लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम क्यों चिंता का विषय ?
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से स्क्रीन टाइम बढ़ता है। इसका सीधा असर नींद, पढ़ाई, एकाग्रता और सामाजिक व्यवहार पर पड़ सकता है। लंबे समय तक अत्यधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ा सकता है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content