70 साल की पत्नी, 72 साल का पति, दोनों ने क्यों लिया 49 साल बाद तलाक,  जानिए हाई कोर्ट ने इस मामले पर क्या कहा...

70 साल की पत्नी और 72 साल के पति ने करीब 49 साल अलग रहने के बाद तलाक ले लिया। आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि भी माफ कर दी। जानिए 1972 में हुई शादी के बाद ऐसा क्या हुआ कि अदालत ने इतने पुराने रिश्ते को तुरंत खत्म करने की मंजूरी दी।

Aug 16, 2026 - 13:23
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70 साल की पत्नी, 72 साल का पति, दोनों ने क्यों लिया 49 साल बाद तलाक,  जानिए हाई कोर्ट ने इस मामले पर क्या कहा...

आमतौर पर तलाक को रिश्ते के टूटने की कहानी माना जाता है, लेकिन आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के सामने आया एक मामला इससे कहीं अलग है। यहां तलाक मांगने वाला दंपति कोई युवा जोड़ा नहीं, बल्कि 70 साल की महिला और 72 साल का पुरुष है। दोनों की शादी को करीब पांच दशक बीत चुके हैं, लेकिन उनके रिश्ते में साथ सिर्फ शुरुआती कुछ साल ही रहा। करीब 49 साल से अलग रह रहे इस दंपति ने आखिरकार अदालत का दरवाजा खटखटाया और आपसी सहमति से विवाह खत्म करने की इच्छा जताई। खास बात यह रही कि हाई कोर्ट ने सामान्य तौर पर लागू होने वाली छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि को भी माफ कर दिया। सवाल यही है कि आखिर ऐसी क्या परिस्थिति बनी कि अदालत ने इतने पुराने विवाह को बिना छह महीने इंतजार कराए खत्म करने की मंजूरी दे दी?

शादी 1972 में हुई, लेकिन कुछ साल बाद ही अलग हो गए
मामला उस दंपति का है जिनकी शादी वर्ष 1972 में हुई थी। शादी के कुछ साल बाद ही दोनों अलग रहने लगे। इसके बाद समय गुजरता गया, लेकिन कानूनी तौर पर उनका विवाह खत्म नहीं हुआ। करीब 49 साल तक दोनों अलग-अलग जिंदगी जीते रहे। इतने लंबे समय में दोनों के बीच वैवाहिक जीवन को दोबारा शुरू करने की कोई वास्तविक संभावना नहीं बची थी। उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बाद दोनों ने अदालत के सामने साफ तौर पर कहा कि अब वे इस विवाह को जारी नहीं रखना चाहते। 

छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि क्यों नहीं रखी गई?
आपसी सहमति से तलाक के मामलों में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-B अहम भूमिका निभाती है। सामान्य तौर पर पति-पत्नी के आपसी सहमति से तलाक के आवेदन के बाद दूसरी मोशन से पहले छह महीने की अवधि का प्रावधान होता है। इसे कूलिंग-ऑफ पीरियड कहा जाता है। इसका मकसद यह होता है कि पति-पत्नी को अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का समय मिले और यदि संभव हो तो रिश्ते को बचाने की कोशिश की जा सके। लेकिन इस मामले में अदालत के सामने स्थिति बिल्कुल अलग थी। पति-पत्नी करीब 49 साल से अलग रह रहे थे। दोनों की उम्र 70 और 72 साल है और दोनों ने अपनी मर्जी से विवाह खत्म करने पर सहमति जताई। ऐसे में छह महीने और इंतजार कराने से रिश्ते में सुलह की कोई वास्तविक संभावना पैदा होने की उम्मीद नहीं थी।

हाई कोर्ट ने माना, अब साथ आने की संभावना बेहद कम
तलाक के किसी मामले में अदालत सिर्फ यह नहीं देखती कि पति-पत्नी अलग होना चाहते हैं या नहीं। अदालत यह भी देखती है कि क्या उनके बीच सुलह की कोई संभावना बाकी है। इस मामले में करीब पांच दशक का अलगाव अपने आप में एक महत्वपूर्ण तथ्य था। इतने लंबे समय तक अलग रहने के बाद दोनों के फिर से साथ आने की संभावना बेहद कम थी। इसके अलावा दोनों पक्ष विवाह समाप्त करने के फैसले पर सहमत थे। ऐसे में अदालत ने प्रक्रिया को सिर्फ औपचारिकता के लिए लंबा खींचना उचित नहीं समझा और छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि को माफ करने का रास्ता अपनाया।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी बना आधार
कूलिंग-ऑफ अवधि को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख भी महत्वपूर्ण है। Amardeep Singh v. Harveen Kaur मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि आपसी सहमति से तलाक के लिए छह महीने की अवधि हर परिस्थिति में अनिवार्य नहीं है। यदि अदालत को लगता है कि सुलह की कोशिशें विफल हो चुकी हैं, पति-पत्नी के बीच विवादों का समाधान हो गया है और दोनों अपने फैसले पर स्वतंत्र रूप से कायम हैं, तो परिस्थितियों के अनुसार इस अवधि को माफ किया जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि लंबे समय से अलग रह रहे हर दंपति को स्वतः छह महीने की अवधि से छूट मिल जाएगी। अदालत प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को अलग-अलग देखती है।

49 साल का अलगाव बना सबसे बड़ा फैक्टर
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात सिर्फ पति-पत्नी की उम्र नहीं, बल्कि उनका करीब पांच दशक लंबा अलगाव रहा। एक तरफ 70 वर्षीय महिला और 72 वर्षीय पुरुष थे, दूसरी तरफ करीब 49 साल से चला आ रहा अलगाव। इतने लंबे समय में दोनों ने अपनी-अपनी जिंदगी अलग तरीके से जी। ऐसे में अदालत के सामने यह सवाल था कि क्या छह महीने की और प्रतीक्षा से वास्तव में किसी सुलह की उम्मीद की जा सकती है? अदालत के सामने दोनों की स्पष्ट सहमति और लंबे समय से अलग रहने की परिस्थितियां थीं। यही वजह रही कि छह महीने की अतिरिक्त प्रतीक्षा की जरूरत नहीं समझी गई।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content