फूड प्रोडक्ट्स के झूठे दावों पर FSSAI सख्त, अब सेलिब्रिटी और इंफ्लुएंसर भी नहीं बचेंगे, विज्ञापन से पहले मानने होंगे 3 नियम

FSSAI ने फूड प्रोडक्ट्स के विज्ञापन को लेकर सेलिब्रिटी और इंफ्लुएंसर की जिम्मेदारी तय की है। अब किसी खाद्य उत्पाद का प्रचार करने से पहले उसके दावों की जांच करनी होगी। जानिए FSSAI के 3 प्रमुख नियम क्या हैं और गलत विज्ञापन करने पर क्या कार्रवाई हो सकती है।

Aug 15, 2026 - 12:22
 0
फूड प्रोडक्ट्स के झूठे दावों पर FSSAI सख्त, अब सेलिब्रिटी और इंफ्लुएंसर भी नहीं बचेंगे, विज्ञापन से पहले मानने होंगे 3 नियम

नई दिल्ली। किसी सेलिब्रिटी का चेहरा किसी फूड प्रोडक्ट के विज्ञापन में दिखे तो लोगों का भरोसा अक्सर अपने आप बढ़ जाता है। खासकर जब विज्ञापन में इम्यूनिटी बढ़ाने, पोषण से भरपूर होने या किसी खास स्वास्थ्य लाभ का दावा किया जाए। लेकिन अब ऐसे दावों को लेकर मशहूर हस्तियों और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है। फूड प्रोडक्ट्स की सुरक्षा और मानकों की निगरानी करने वाली फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI ने फूड विज्ञापनों को लेकर गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत किसी प्रोडक्ट का प्रचार करने से पहले सेलिब्रिटी और इंफ्लुएंसर को उसके दावों की पड़ताल करनी होगी। गलत, झूठे या भ्रामक दावे सामने आने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

अब सिर्फ कंपनी नहीं, विज्ञापन करने वाले की भी जिम्मेदारी
फूड प्रोडक्ट को लेकर कोई दावा किया जा रहा है तो उसे केवल कंपनी की बात मानकर प्रचार नहीं किया जा सकेगा। विज्ञापन करने वाले व्यक्ति को यह देखना होगा कि कंपनी जिस दावे को लोगों के सामने रख रही है, वह सही, प्रमाणित और कानूनी है या नहीं। यानी किसी सेलिब्रिटी या इंफ्लुएंसर के लिए सिर्फ यह कहना पर्याप्त नहीं होगा कि उसे कंपनी ने जो जानकारी दी, उसी आधार पर उसने विज्ञापन किया। प्रोडक्ट के दावों की जिम्मेदारी को लेकर अब विज्ञापन करने वाले की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।

FSSAI के 3 नियम, जिन्हें समझना जरूरी है
FSSAI की गाइडलाइन में फूड प्रोडक्ट्स के विज्ञापन से जुड़े तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया गया है। 

  • पहला नियम: फूड प्रोडक्ट से जुड़े किसी भी दावे को विज्ञापन करने से पहले खुद वैरिफाई करना होगा।
  • दूसरा नियम: यह जांचना होगा कि जिस फूड प्रोडक्ट का प्रचार किया जा रहा है, वह FSSAI के नियमों और संबंधित रेगुलेशन के मुताबिक है या नहीं।
  • तीसरा नियम: विज्ञापन ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे ग्राहक किसी गलत या भ्रामक जानकारी के आधार पर प्रोडक्ट खरीदने के लिए प्रेरित हो।

इन तीनों नियमों का मकसद यही है कि किसी फूड प्रोडक्ट की मार्केटिंग करते समय उपभोक्ता के भरोसे और उसकी सेहत के साथ खिलवाड़ न हो।

इम्यूनिटी और पोषण के नाम पर कितने दावे सही?
फूड प्रोडक्ट्स के विज्ञापनों में इम्यूनिटी बढ़ाने, पोषण से भरपूर होने या शरीर के लिए फायदेमंद होने जैसे दावे आम हैं। समस्या तब पैदा होती है जब विज्ञापन में किया गया दावा प्रोडक्ट की वास्तविक सामग्री या निर्धारित मानकों से मेल नहीं खाता। FSSAI ऐसे दावों को लेकर लगातार सख्ती कर रहा है। संस्था की ओर से ऐसे मामलों में कार्रवाई भी की जाती रही है, जहां किसी खाद्य उत्पाद को लेकर उसके पोषण संबंधी दावे सही नहीं पाए गए। यही वजह है कि अब किसी सेलिब्रिटी या इंफ्लुएंसर के लिए भी किसी प्रोडक्ट को प्रमोट करने से पहले उसके दावों की जांच करना जरूरी बताया जा रहा है।

जूस के विज्ञापन में फल दिखता है, लेकिन असलियत क्या?
फूड विज्ञापनों में तस्वीर और वास्तविक प्रोडक्ट के बीच अंतर का सवाल भी लंबे समय से उठता रहा है। खासकर फलों से जुड़े ड्रिंक्स के विज्ञापनों में ताजे फल दिखाकर उपभोक्ता के मन में प्रोडक्ट को लेकर एक खास धारणा बनाई जाती है। ऐसे मामलों में उपभोक्ता के लिए यह समझना जरूरी है कि विज्ञापन में दिखाया गया फल और पैकेट के अंदर मौजूद वास्तविक सामग्री एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं है। प्रोडक्ट के लेबल पर दी गई सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी को देखकर ही सही तस्वीर समझी जा सकती है।

बच्चों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता
फूड विज्ञापनों का असर केवल बड़ों तक सीमित नहीं रहता। बच्चे भी सेलिब्रिटी और इंफ्लुएंसर को देखकर किसी प्रोडक्ट की तरफ आकर्षित हो सकते हैं। खासकर मीठे पेय, स्नैक्स और दूसरे प्रोसेस्ड फूड के विज्ञापनों में यह प्रभाव ज्यादा दिखाई देता है। बच्चे किसी प्रोडक्ट के पोषण संबंधी दावे या उसमें मौजूद सामग्री का आकलन हमेशा खुद नहीं कर सकते। ऐसे में भ्रामक विज्ञापन उनके खानपान और स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकते हैं। इसी वजह से फूड प्रोडक्ट्स के विज्ञापन में किए जाने वाले दावों की सत्यता पर जोर दिया जा रहा है।

नियम तोड़े तो सेलिब्रिटी और इंफ्लुएंसर पर भी कार्रवाई 
अब अगर कोई मशहूर व्यक्ति या सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ऐसे फूड प्रोडक्ट का विज्ञापन करता है, जिसमें गलत या भ्रामक दावा किया गया हो, तो मामला सिर्फ कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा। गाइडलाइन के मुताबिक विज्ञापन करने वाले व्यक्ति को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और नियमों का पालन करना होगा। FSSAI ने उपभोक्ताओं को भी जागरूक रहने की सलाह दी है। अगर किसी फूड प्रोडक्ट के विज्ञापन में ऐसा दावा नजर आता है जो गलत या भ्रामक लगता है, तो उसकी शिकायत संबंधित प्राधिकरण तक पहुंचाई जा सकती है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content