इस बार की राखी लोगों के लिए बनी खुशियों की त्योहार, रक्षा बंधन पर 30 हजार करोड़ का बाजार, डिजाइनर राखियों से बदली त्योहार की तस्वीर
रक्षा बंधन 2026 पर राखी का कारोबार 25 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। गिफ्ट, मिठाई और दूसरे सामान जोड़ने पर यह बाजार 30 हजार करोड़ रुपये के पार जा सकता है। जानिए पिछले वर्षों में कितना रहा कारोबार और इस बार बाजार में किस तरह की डिजाइनर और स्वदेशी राखियां छाई हैं।
नई दिल्ली। राखी देखने में भले ही कुछ रुपये की हो, लेकिन रक्षा बंधन आते ही यही छोटी-सी राखी देश के बाजार में हजारों करोड़ रुपये की हलचल पैदा कर देती है। इस बार भी रक्षा बंधन से पहले बाजार में रौनक बढ़ने लगी है। 28 अगस्त को मनाए जाने वाले इस त्योहार को लेकर व्यापारियों को बड़ी बिक्री की उम्मीद है। अनुमान है कि इस बार सिर्फ राखियों का कारोबार ही करीब 25 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। भाई-बहन के बीच होने वाले उपहार, मिठाई, कपड़े और दूसरे त्योहारी सामान को जोड़ दिया जाए तो यह कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये के पार जा सकता है। यानी कलाई पर बंधने वाली कुछ रुपये की राखी से लेकर महंगे गिफ्ट तक, रक्षा बंधन देश के कारोबार के लिए भी बड़ा त्योहार बन चुका है।
पिछले साल के मुकाबले 45 फीसदी ज्यादा कारोबार का अनुमान
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी CAIT के अनुमान के मुताबिक, इस साल रक्षा बंधन पर देशभर में करीब 25 हजार करोड़ रुपये की राखियों का कारोबार होने की उम्मीद है। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले करीब 45 फीसदी अधिक है। 2025 में रक्षा बंधन के दौरान राखियों का कारोबार करीब 17 हजार करोड़ रुपये रहा था। इससे पहले 2023 में यह आंकड़ा करीब 12 हजार करोड़ रुपये था। खास बात यह है कि इन आंकड़ों में मिठाई, उपहार और पैकिंग मैटेरियल जैसे दूसरे सामानों की बिक्री शामिल नहीं है। यही वजह है कि जब रक्षा बंधन के पूरे बाजार को देखा जाता है तो कारोबार का आंकड़ा 30 हजार करोड़ रुपये से भी आगे जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।
एक त्योहार, हजारों तरह के कारोबार
रक्षा बंधन सिर्फ राखी बेचने वालों के लिए कमाई का मौका नहीं है। त्योहार नजदीक आते ही मिठाई की दुकानों से लेकर कपड़े, गिफ्ट, कॉस्मेटिक्स, ज्वेलरी और पैकेजिंग से जुड़े कारोबार में भी तेजी आती है। बहनें भाई के लिए राखी खरीदती हैं तो भाई भी बहनों के लिए गिफ्ट की खरीदारी करते हैं। कई परिवारों में मिठाई और कपड़ों की खरीदारी भी होती है। ऑनलाइन बाजार ने इस खरीदारी को और बड़ा कर दिया है। इस तरह राखी की एक छोटी-सी खरीदारी कई दूसरे कारोबारों को भी जोड़ देती है और त्योहार का पूरा बाजार कई गुना बड़ा हो जाता है।
अब सिर्फ साधारण राखी नहीं, डिजाइनर राखियों की मांग
रक्षा बंधन का बाजार भी समय के साथ बदल रहा है। अब बाजार में केवल पारंपरिक धागे वाली राखियां ही नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग थीम और डिजाइन वाली राखियों की मांग भी बढ़ रही है। CAIT के महासचिव और बीजेपी सांसद प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक, इस साल बाजार में राष्ट्रीय उपलब्धियों और विकसित भारत के संकल्प से प्रेरित कई तरह की राखियां उपलब्ध हैं। इनमें विकसित भारत राखी, मोदी गारंटी राखी, ब्रह्मोस राखी, आत्मनिर्भर भारत राखी, वोकल फॉर लोकल राखी, भारत गौरव राखी, नारी वंदन राखी, लखपति दीदी राखी, नमामि गंगे राखी, राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी और अमृतकाल राखी जैसी राखियां शामिल हैं।
देश के अलग-अलग हिस्सों की राखियां भी बाजार में छाईं
रक्षा बंधन का बाजार अब सिर्फ एक शहर या एक तरह के डिजाइन तक सीमित नहीं रह गया है। देश के अलग-अलग हिस्सों की स्थानीय कला और उत्पाद भी राखियों के जरिए बाजार तक पहुंच रहे हैं। नागपुर की खादी राखी, जयपुर की सांगानेरी कला राखी, पुणे की सीड राखी, असम की चाय पत्ती राखी, कोलकाता की जूट राखी, मुंबई की सिल्क राखी, बिहार की मधुबनी राखी और बेंगलुरु की पुष्प राखी जैसी स्वदेशी राखियां बाजार में उपलब्ध हैं। इन राखियों की खासियत यह है कि इनमें स्थानीय कला, संस्कृति और उत्पादों को शामिल किया गया है। इससे राखी खरीदने वाले ग्राहकों को पारंपरिक राखी के साथ कुछ अलग विकल्प भी मिल रहे हैं।
राखी का धागा अब कारोबार की बड़ी कड़ी बन चुका है
रक्षा बंधन मूल रूप से भाई-बहन के रिश्ते और भावनाओं का त्योहार है। लेकिन इसके साथ जुड़ी खरीदारी ने इसे व्यापारियों के लिए भी बेहद अहम बना दिया है। एक तरफ बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं और भाई उनकी सुरक्षा का वचन देता है। दूसरी तरफ इसी परंपरा से जुड़े बाजार में करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। इस बार 25 हजार करोड़ रुपये के राखी कारोबार और उपहार-मिठाई समेत 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक के पूरे बाजार का अनुमान यही बताता है कि कुछ रुपये की राखी का धागा देश की अर्थव्यवस्था में भी अपनी मजबूत जगह बना चुका है।
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