500 साल बाद मंदिर से बाहर निकले रामलला, कुबेर टीला पर हुआ झूला बिहार, जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठी रामनगरी

अयोध्या में झूलनोत्सव इस बार ऐतिहासिक बन गया। करीब 500 साल बाद श्रीरामलला मंदिर परिसर से बाहर निकलकर कुबेर टीला पहुंचे, जहां झूला बिहार और विशेष पूजा-अर्चना हुई। मणि पर्वत समेत रामनगरी के दर्जनों मंदिरों में भी झूलनोत्सव की धूम रही।

Aug 16, 2026 - 17:06
Aug 16, 2026 - 17:09
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500 साल बाद मंदिर से बाहर निकले रामलला, कुबेर टीला पर हुआ झूला बिहार, जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठी रामनगरी

अयोध्या। राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में इस बार झूलनोत्सव का दृश्य ऐतिहासिक बन गया। शनिवार को करीब 500 वर्षों के बाद पहली बार श्रीरामलला सरकार मंदिर परिसर से बाहर निकलकर कुबेर टीला पर झूला बिहार के लिए पहुंचे। शाम करीब चार बजे फूलों से सजी चांदी की पालकी में रामलला को विराजमान कराया गया। इसके बाद पालकी यात्रा मंदिर परिसर से होते हुए कुबेर टीला पहुंची। कुबेर टीला पर करीब दो घंटे तक विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना, आरती और झूलनोत्सव का आयोजन हुआ। रामलला के मंदिर परिसर से बाहर निकलने की खबर से पहले ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए पहुंच चुके थे। पालकी यात्रा के दौरान जय श्रीराम के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र राममय हो गया।

चांदी की पालकी में विराजे रामलला, कुबेर टीला तक निकली यात्रा
शनिवार शाम करीब चार बजे झूलनोत्सव के विशेष आयोजन की शुरुआत हुई। फूलों से सजाई गई चांदी की पालकी में श्रीरामलला को विराजमान कराया गया। इसके बाद विधि-विधान के साथ पालकी यात्रा निकली। रामलला के कुबेर टीला पहुंचने के बाद विशेष पूजन और आरती की गई। इसके बाद झूला बिहार का आयोजन हुआ। भगवान को झूले पर विराजमान कराकर विशेष भोग अर्पित किया गया। इस दौरान पद गायन और धार्मिक अनुष्ठान भी हुए। इस पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। रामलला के दर्शन और इस विशेष परंपरा का हिस्सा बनने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

अनादिकाल से चली आ रही झूलनोत्सव की परंपरा 
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य राज कुमार दास ने बताया कि झूलनोत्सव की परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है। पहले भी श्रीरामलला सरकार पंचमी से सूक्ष्म रूप में झूला झूलते थे। उन्होंने बताया कि इस बार राम मंदिर ट्रस्ट के निर्देशन में हुई बैठक में तय किया गया कि अयोध्या के अन्य मंदिरों की परंपरा की तरह रामलला के मंदिर में भी तृतीया से पूर्णिमा तक झूलनोत्सव आयोजित किया जाए। राज कुमार दास के मुताबिक, इस बार श्रीरामलला की पालकी चारों भाइयों के साथ कुबेर टीला पर ले जाई गई, जहां पद गायन के साथ विशेष आयोजन हुआ। कार्यक्रम शाम चार बजे से सात बजे तक आयोजित किया गया।

अब रोज झूले पर होंगे रामलला के दर्शन
झूलनोत्सव का यह आयोजन केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रस्ट की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार अब प्रतिदिन नित्य श्रृंगार और आरती के बाद सुबह से ही ठाकुर जी झूले पर विराजमान रहेंगे। मध्याह्न में भोग राज के बाद भगवान फिर झूले पर विराजमान होंगे और शयन आरती तक झूले पर ही भक्तों को दर्शन देंगे। यह आयोजन पूर्णिमा तक जारी रहेगा। ऐसे में अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को झूलनोत्सव के दौरान रामलला के इस विशेष स्वरूप के दर्शन का अवसर मिलेगा।

मणि पर्वत पर भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
रामनगरी में झूलनोत्सव का उत्साह केवल राम मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहा। अयोध्या के प्राचीन मणि पर्वत पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मणि पर्वत पर अयोध्या के अलग-अलग मंदिरों से उत्सव विग्रह पहुंचे। यहां सिया संग श्रीराम और उनके चारों भाइयों के झूला बिहार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। श्रीरामचरितमानस के गायन और धार्मिक कार्यक्रमों के बीच झूलनोत्सव की शुरुआत हुई। मणि पर्वत से उत्सव विग्रहों के लौटने के बाद उन्हें झूले पर विराजमान कराया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं को भगवान के झूला बिहार के दर्शन कराए गए।

मंदिरों में गूंजे भजन, पूरे शहर में दिखा उत्सव 
झूलनोत्सव के अवसर पर अयोध्या के दर्जनों मंदिरों में भी विशेष आयोजन हुए। भगवान श्रीराम को माता सीता और चारों भाइयों के साथ आकर्षक ढंग से सजाए गए झूलों पर विराजमान कराया गया। मंदिरों में भजन-कीर्तन, पद गायन और धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चलता रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान के झूला बिहार के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। इससे पूरी रामनगरी का माहौल भक्तिमय नजर आया।

500 साल बाद बदला दृश्य, परंपरा को मिली नई भव्यता
अयोध्या के लिए इस बार का झूलनोत्सव इसलिए भी खास रहा क्योंकि राम मंदिर निर्माण के बाद पहली बार श्रीरामलला सरकार को मंदिर परिसर से बाहर कुबेर टीला तक झूला बिहार के लिए ले जाया गया। करीब पांच सदियों बाद रामलला की यह पालकी यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आस्था के साथ-साथ इतिहास का भी एक बड़ा क्षण बन गई। सदियों पुरानी झूलनोत्सव की परंपरा इस बार नए स्वरूप और भव्यता के साथ सामने आई। एक तरफ मंदिर परिसर से बाहर निकली रामलला की पालकी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही, तो दूसरी तरफ मणि पर्वत और अयोध्या के दूसरे प्राचीन मंदिरों में भी झूलनोत्सव की धूम रही। पूर्णिमा तक चलने वाले इस आयोजन के चलते आने वाले दिनों में भी रामनगरी में भक्ति और उत्सव का यह माहौल बना रहेगा।

रिपोर्ट-: अनूप कुमार 

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