SC-ST आरक्षण में लागू नहीं होगी क्रीमी लेयर, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- यह व्यवस्था सिर्फ OBC-SEBC के लिए, कोर्ट से की PIL खारिज करने की मांग

SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने कहा कि क्रीमी लेयर का सिद्धांत केवल OBC और SEBC पर लागू होता है। हलफनामे में संविधान, संसद के अधिकार, इंदिरा साहनी फैसले और याचिकाओं को खारिज करने की मांग से जुड़े सभी प्रमुख तर्क रखे गए हैं।

Aug 7, 2026 - 11:38
Aug 7, 2026 - 11:39
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SC-ST आरक्षण में लागू नहीं होगी क्रीमी लेयर, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- यह व्यवस्था सिर्फ OBC-SEBC के लिए, कोर्ट से की PIL खारिज करने की मांग

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता। सरकार ने अदालत से उन जनहित याचिकाओं (PIL) को खारिज करने की मांग की है, जिनमें SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने और सरकारी नौकरियों में अधिक न्यायसंगत आरक्षण व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि मौजूदा संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था में कहीं भी ऐसा प्रावधान नहीं है, जिसके तहत SC और ST वर्ग पर क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू किया जा सके। सरकार के अनुसार यह अवधारणा केवल अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEBC) के आरक्षण तक सीमित है। सरकार ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने किसी मौलिक अधिकार के उल्लंघन का ठोस आधार नहीं बताया है। ऐसे में जनहित याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं हैं और इन्हें खारिज किया जाना चाहिए।

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष 11 अगस्त को रमाशंकर प्रजापति और अन्य की ओर से दायर जनहित याचिकाओं पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया था। याचिकाओं में मांग की गई थी कि यदि किसी SC-ST परिवार का सदस्य पहले से संवैधानिक पद, अखिल भारतीय सेवा या वरिष्ठ सरकारी पद पर कार्यरत है, तो उसके बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इससे आरक्षण का लाभ आर्थिक और सामाजिक रूप से अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सकेगा। याचिका में आर्थिक रूप से कमजोर SC-ST परिवारों के लिए उप-श्रेणी (सब-कैटेगरी) बनाने और उन्हें शिक्षा व सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की भी मांग की गई थी।

संसद को ही है SC-ST सूची में बदलाव का अधिकार
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सूची में किसी भी प्रकार का बदलाव करने का अधिकार केवल संसद के पास है। सरकार ने कहा कि किसी जाति या जनजाति को सूची में शामिल करना या हटाना न्यायालय या किसी अन्य संस्था के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

इंदिरा साहनी फैसले का भी दिया हवाला
केंद्र सरकार ने अपने जवाब में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक इंदिरा साहनी (मंडल आयोग) फैसले का भी उल्लेख किया। सरकार ने कहा कि SC, ST और OBC की पहचान केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन के आधार पर की जाती है। सरकार के अनुसार याचिका स्थापित संवैधानिक सिद्धांतों और पूर्व के न्यायिक फैसलों की अनदेखी करती है।

कल्याणकारी योजनाओं में पहले से लागू है आय सीमा
हलफनामे में केंद्र ने यह भी कहा कि SC, ST और SEBC समुदायों के लिए संचालित अधिकांश कल्याणकारी योजनाओं में पहले से आय सीमा तय है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे। सरकार ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन योजनाओं में बदलाव की आवश्यकता है और प्रस्तावित बदलाव से गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को किस प्रकार लाभ मिलेगा।

OBC मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उठाया था सवाल
इस वर्ष 22 मई को OBC आरक्षण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि यदि माता-पिता दोनों भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी हैं, तो उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ क्यों मिलना चाहिए। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा था कि जब किसी परिवार की सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक स्थिति में पर्याप्त सुधार हो चुका हो, तब अगली पीढ़ी को लगातार आरक्षण दिए जाने की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए। यह टिप्पणी कर्नाटक के एक OBC अभ्यर्थी के मामले की सुनवाई के दौरान की गई थी, जिसे क्रीमी लेयर में आने के कारण आरक्षण का लाभ नहीं मिला था।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content