मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी, 3 दिन के अल्टीमेटम के बीच झुका Meta, अब सरकार की नजर कंटेंट मॉडरेशन और कानून पालन पर

मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से माफी मांग ली है। मामला सिर्फ पीएम मोदी का वीडियो हटने तक सीमित नहीं है, बल्कि डीपफेक, चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज कंटेंट, व्हाट्सएप पॉलिसी और भारतीय कानूनों के पालन तक पहुंच चुका है। जानिए आखिर सरकार ने Meta पर इतनी सख्ती क्यों दिखाई और इसका करोड़ों भारतीय यूजर्स पर क्या असर पड़ सकता है।

Aug 5, 2026 - 16:02
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मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी, 3 दिन के अल्टीमेटम के बीच झुका Meta, अब सरकार की नजर कंटेंट मॉडरेशन और कानून पालन पर

भारत सरकार और दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों में शामिल Meta के बीच चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल, डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म संचालन में हुई चूकों को लेकर माफी मांगी है। न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से इसकी जानकारी दी है। इससे कुछ घंटे पहले ही संसद की एक समिति ने मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया था। समिति ने साफ किया था कि अगर तय समय में माफी नहीं मांगी गई तो Meta को भारत में सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और कुछ विशेष छूट वापस लेने पर विचार किया जा सकता है।

सिर्फ एक पोस्ट नहीं, कई मुद्दों पर सरकार की सख्ती
यह विवाद केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक पोस्ट हटने तक सीमित नहीं है। सरकार Meta के प्लेटफॉर्म पर डीपफेक कंटेंट, बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले कंटेंट, व्हाट्सएप की नई यूजरनेम पॉलिसी और भारतीय कानूनों के पालन को लेकर भी जवाब मांग रही है। इसी सिलसिले में 5 और 6 अगस्त को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और Meta की ग्लोबल टीम के बीच दिल्ली में दो दिन की बैठक चल रही है। सरकार ने कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर पूरे मामले पर जवाब मांगा है।

आखिर विवाद की शुरुआत कैसे हुई ?
23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर युवाओं के नाम एक वीडियो संदेश साझा किया था। इस वीडियो में उन्होंने पेपर लीक को गंभीर समस्या बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही थी। कुछ समय बाद यह वीडियो फेसबुक से हट गया। बाद में Meta ने पोस्ट को दोबारा बहाल करते हुए इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया और गलती स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी। हालांकि आईटी मंत्रालय ने कंपनी की इस सफाई को पर्याप्त नहीं माना।

संसदीय समिति ने क्या कहा ?
संसदीय समिति ने Meta से तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी की मांग की थी। समिति का कहना था कि यदि कंपनी निर्देश का पालन नहीं करती है तो उसे भारत में आईटी कानून के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और अन्य छूट वापस लेने पर विचार किया जा सकता है। इसके बाद कंपनी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है।

आईटी मंत्रालय किन सवालों के जवाब चाहता है ?
आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन के अनुसार सरकार यह समझना चाहती है कि Meta भारतीय कानूनों का पालन किस स्तर तक कर रही है। बैठक में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर जवाब मांगा जा रहा है।

  • वीआईपी अकाउंट की सुरक्षा के लिए बनाए गए सुरक्षा तंत्र आखिर क्यों विफल हुए।
  • व्हाट्सएप की नई यूजरनेम पॉलिसी को लेकर कंपनी का पक्ष क्या है।
  • इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल की मौजूदगी रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।
  • भारतीय कानूनों के अनुपालन के लिए Meta की आंतरिक व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

Meta का पक्ष क्या है ?
कंपनी का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट किसी नीति के तहत नहीं हटाई गई थी। यह एक तकनीकी समस्या थी, जिसे ठीक करते हुए पोस्ट को दोबारा बहाल कर दिया गया। Meta पहले भी इस गलती के लिए माफी जता चुकी थी। 

इस मामले में एफआईआर भी दर्ज
मामला केवल पोस्ट हटने तक नहीं पहुंचा। हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाकर बनाए गए मॉर्फ्ड और AI जनरेटेड पोस्ट के मामले में Meta इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास और कुछ फेसबुक तथा इंस्टाग्राम अकाउंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

करोड़ों भारतीय यूजर्स पर क्या पड़ सकता है असर ?
भारत Meta के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। देश में व्हाट्सएप के 60 करोड़ से अधिक, इंस्टाग्राम के करीब 48 करोड़ और फेसबुक के लगभग 40 करोड़ यूजर्स हैं। ऐसे में सरकार और Meta के बीच चल रही यह कवायद सीधे करोड़ों लोगों को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया कंपनियों के कंटेंट मॉडरेशन पर निगरानी और कड़ी हो सकती है। गलत तरीके से हटाए गए पोस्ट या अकाउंट से जुड़े मामलों में कंपनियों की जवाबदेही बढ़ सकती है। साथ ही भारत में काम कर रहे डिजिटल प्लेटफॉर्म को स्थानीय कानूनों का पालन पहले से अधिक सख्ती के साथ करना पड़ सकता है।

23 जुलाई के वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा था ?
23 जुलाई की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब 2 मिनट 56 सेकंड का वीडियो संदेश जारी किया था। उन्होंने कहा था कि पेपर लीक लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सरकार ने पिछले ढाई महीनों में कई कार्रवाई की हैं, आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और कम समय में 22 लाख छात्रों की परीक्षा कराकर 19 जुलाई को परिणाम भी घोषित किया गया। उन्होंने यह भी बताया था कि पेपर लीक से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के निर्देश दिए गए हैं। 

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content