भारत में इस्तेमाल होने वाली 3 दवाओं पर कैंसर का खतरा, WHO की एजेंसी ने किया आगाह, जानिए कौन सी दवा किस बीमारी में दी जाती है

WHO की कैंसर रिसर्च एजेंसी IARC ने हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड, वोरिकोनाजोल और टैक्रोलिमस को कैंसरकारी ग्रुप-1 श्रेणी में रखा है। भारत में इस्तेमाल होने वाली इन तीन दवाओं से जुड़े कैंसर के खतरे को लेकर क्या सामने आया, कौन सी दवा किस बीमारी में दी जाती है और क्या मरीजों को दवा बंद कर देनी चाहिए?

Aug 17, 2026 - 13:38
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भारत में इस्तेमाल होने वाली 3 दवाओं पर कैंसर का खतरा, WHO की एजेंसी ने किया आगाह, जानिए कौन सी दवा किस बीमारी में दी जाती है

हाई ब्लड प्रेशर से लेकर फंगल इंफेक्शन और ऑर्गन ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों को दी जाने वाली तीन आम दवाओं को लेकर बड़ी चेतावनी सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की कैंसर रिसर्च एजेंसी इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड, वोरिकोनाजोल और टैक्रोलिमस को इंसानों के लिए कैंसरकारी ग्रुप-1 श्रेणी में रखा है। इन दवाओं का इस्तेमाल भारत समेत दुनिया के कई देशों में बड़ी संख्या में मरीज करते हैं। एजेंसी की समीक्षा में इन दवाओं और कुछ प्रकार के कैंसर के बीच संबंध के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण मिलने की बात कही गई है। हालांकि, इस खबर का सबसे अहम पहलू यह है कि ग्रुप-1 में शामिल किए जाने का मतलब यह नहीं है कि इन दवाओं को लेने वाले हर व्यक्ति को कैंसर हो जाएगा। यह वर्गीकरण किसी पदार्थ या दवा के कैंसर पैदा करने की क्षमता के वैज्ञानिक प्रमाण को दर्शाता है। इसलिए मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना अपनी दवा बंद नहीं करनी चाहिए।

कौन सी हैं ये तीन दवाएं और क्यों इस्तेमाल होती हैं?
IARC की समीक्षा में जिन तीन दवाओं को लेकर कैंसर के खतरे की पहचान की गई है, उनका इस्तेमाल अलग-अलग गंभीर बीमारियों के इलाज में होता है। 

  • हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड का इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में किया जाता है। यह शरीर से अतिरिक्त नमक और पानी बाहर निकालने में मदद करती है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए दी जाती है। 
  • वोरिकोनाजोल एक एंटीफंगल दवा है। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीजों में गंभीर फंगल इंफेक्शन के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। खासकर ट्रांसप्लांट जैसे मामलों में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
  • टैक्रोलिमस का इस्तेमाल मुख्य रूप से ऑर्गन ट्रांसप्लांट के बाद किया जाता है। यह शरीर के इम्यून सिस्टम को दबाकर नए अंग को रिजेक्ट होने से रोकने में मदद करती है।

हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड से स्किन कैंसर का खतरा क्यों?
IARC की समीक्षा में हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड को लेकर स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और होंठ के कैंसर के साथ संबंध के पर्याप्त सबूत बताए गए हैं। अमेरिका और डेनमार्क में हुई स्टडीज में लंबे समय तक इस दवा का इस्तेमाल करने वाले लोगों में स्किन कैंसर की दर अधिक पाई गई। वैज्ञानिकों के मुताबिक इसका एक संभावित कारण दवा का फोटो-टॉक्सिक प्रभाव है। सरल शब्दों में समझें तो हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड त्वचा को सूर्य की अल्ट्रावायलेट यानी UV किरणों के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकती है। लंबे समय तक UV एक्सपोजर होने पर त्वचा की कोशिकाओं के DNA को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा त्वचा के कैंसर का एक सामान्य प्रकार है। ऐसे में लंबे समय तक यह दवा लेने वाले मरीजों के लिए डॉक्टर की निगरानी और धूप से बचाव महत्वपूर्ण हो सकता है।

वोरिकोनाजोल से भी जुड़ा स्किन कैंसर
वोरिकोनाजोल को लेकर भी चिंता मुख्य रूप से त्वचा के कैंसर से जुड़ी है। लंबे समय तक इलाज लेने वाले और ट्रांसप्लांट मरीजों में इसके इस्तेमाल और स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के बीच संबंध पाया गया है। इसके पीछे भी फोटो-टॉक्सिसिटी को एक प्रमुख संभावित कारण माना गया है। यानी दवा के कारण त्वचा की UV किरणों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है और लंबे समय तक धूप के संपर्क में रहने पर त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।

 थोड़ा अलग है टैक्रोलिमस का मामला
टैक्रोलिमस का इस्तेमाल शरीर के इम्यून सिस्टम को दबाने के लिए किया जाता है, ताकि ट्रांसप्लांट किए गए अंग को शरीर रिजेक्ट न करे। लेकिन इसी वजह से इसके इस्तेमाल को कुछ कैंसर के खतरे से भी जोड़ा गया है। IARC की समीक्षा में टैक्रोलिमस का संबंध नॉन-हॉजकिन लिंफोमा और पोस्ट-ट्रांसप्लांट लिम्फोप्रोलिफेरेटिव डिसऑर्डर से पाया गया। वहीं ल्यूकेमिया और स्किन कार्सिनोमा को लेकर उपलब्ध सबूत सीमित बताए गए। इसका संभावित कारण इम्यून सिस्टम का दब जाना है। सामान्य स्थिति में शरीर का इम्यून सिस्टम असामान्य कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें खत्म करने में भूमिका निभाता है। इम्यून सिस्टम दबने पर यह निगरानी कमजोर हो सकती है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह चेतावनी?
इन तीनों दवाओं का भारत में भी अलग-अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल होता है। हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने के लिए दी जाती है, जबकि वोरिकोनाजोल का इस्तेमाल गंभीर फंगल इंफेक्शन वाले मरीजों में किया जाता है। टैक्रोलिमस ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों की देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी वजह से IARC की यह समीक्षा भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खासकर ऐसे समय में जब दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल, बिना पर्याप्त चिकित्सकीय निगरानी के दवा लेना और डॉक्टर की सलाह के बिना दवा जारी रखना या बदलना मरीजों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। IARC के 22 सदस्यीय पैनल में भारतीय वैज्ञानिक जीबी जेना भी शामिल थे।

क्या इन दवाओं को तुरंत बंद कर देना चाहिए? 
नहीं। यह इस पूरी खबर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी दवा को IARC की ग्रुप-1 श्रेणी में रखने का मतलब यह है कि उसके कैंसरकारी होने के वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद हैं। इसका यह अर्थ नहीं है कि दवा लेने वाले हर व्यक्ति को कैंसर हो जाएगा या दवा का इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए। कई बार किसी दवा का फायदा उसके संभावित जोखिम से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है। उदाहरण के लिए ट्रांसप्लांट मरीजों में टैक्रोलिमस नए अंग को शरीर द्वारा रिजेक्ट होने से रोकने के लिए जरूरी हो सकती है। इसी तरह गंभीर फंगल इंफेक्शन में वोरिकोनाजोल का इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति इनमें से कोई दवा ले रहा है तो उसे खुद से दवा बंद करने के बजाय अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। डॉक्टर मरीज की बीमारी, दवा की अवधि, खुराक और संभावित जोखिम को देखते हुए आगे का फैसला कर सकते हैं।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content