इंदिरापुरम में दोस्ती का भरोसा टूटा, प्रॉपर्टी के कागजात से 12 करोड़ का फर्जी लोन
इंदिरापुरम में संपत्ति धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपने दोस्त के संपत्ति दस्तावेजों का इस्तेमाल करके 12 करोड़ रुपये का ऋण लिया। अदालत के आदेश पर एफआईआर दर्ज की गई है।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके से धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां दोस्ती का भरोसा एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। आरोप है कि एक व्यक्ति ने अपने दोस्त की प्रॉपर्टी के मूल कागजात का गलत इस्तेमाल कर बैंक की मिलीभगत से करीब 12 करोड़ रुपये का लोन ले लिया। जब तक पीड़ित को इसकी जानकारी हुई, तब तक बैंक संपत्ति कब्जे में लेने की तैयारी कर चुका था। मामले में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने अब केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी गई है।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
दिल्ली के शकरपुर निवासी संजीव कुमार त्यागी ने पुलिस को बताया कि उनकी देहरादून के मसूरी स्थित किशनपुर निवासी राजीव त्यागी से अच्छी दोस्ती और व्यापारिक संबंध थे। इसी भरोसे के चलते उन्होंने 28 मई 2012 को इंदिरापुरम के शक्तिखंड इलाके में खरीदे गए भूखंड के मूल दस्तावेज दोस्त के कहने पर उसके बैंक लॉकर में रखवा दिए। इस भूखंड पर संजीव त्यागी ने आवासीय इमारत बनाकर उसे किराए पर दे रखा था और संपत्ति पूरी तरह उनके नाम पर थी।
दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल और फर्जी लोन
आरोप है कि राजीव त्यागी ने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से इन मूल दस्तावेजों का इस्तेमाल कर एक निजी बैंक से करीब 12 करोड़ रुपये का लोन पास करा लिया। लोन लेने के बाद न तो आरोपी ने इसकी जानकारी दी और न ही लोन की किस्तें चुकाईं। जब बैंक ने लोन न चुकाने पर संपत्ति कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू की, तब संजीव त्यागी को इस पूरे फर्जीवाड़े का पता चला।
कोर्ट पहुंचा मामला, लोन हुआ रद्द
सच्चाई सामने आने के बाद पीड़ित ने कोर्ट में वाद दायर किया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने फर्जी तरीके से लिए गए इस लोन को शून्य घोषित कर दिया। इसके बाद संजीव त्यागी ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर उन्हें कोर्ट में केस दर्ज कराने की अर्जी देनी पड़ी।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया
एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी को नोटिस भेजने की प्रक्रिया चल रही है। यदि आरोपी बयान दर्ज कराने नहीं आता है, तो उसके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस बैंक की भूमिका की भी जांच कर रही है।
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