नीम के पेड़ से निकल रहा सफेद पदार्थ… इटावा में 15 दिनों से जुट रही भीड़, लोग मान रहे देवी की कृपा
इटावा के जल पोखरा गांव में एक नीम का पेड़ 15 दिनों से सफेद तरल पदार्थ टपका रहा है। स्थानीय लोग इसे दिव्य मानते हैं, जबकि कृषि विशेषज्ञ इसे एक प्राकृतिक प्रक्रिया बताते हैं।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से एक अनोखी और हैरान करने वाली घटना सामने आई है। जसवंतनगर क्षेत्र के जल पोखरा गांव में एक नीम के पेड़ से पिछले करीब 15 दिनों से दूध जैसा सफेद तरल पदार्थ निकल रहा है। इस घटना की खबर फैलते ही इलाके में आस्था का माहौल बन गया है। दूर-दराज से लोग इस पेड़ को देखने और पूजा करने पहुंच रहे हैं। कई श्रद्धालु इसे देवी की कृपा मान रहे हैं और इस तरल को प्रसाद के रूप में ग्रहण भी कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कृषि वैज्ञानिक इसे प्राकृतिक कारणों से जोड़कर देख रहे हैं।
ढाबे के पीछे स्थित नीम के पेड़ से शुरू हुई हलचल
यह नीम का पेड़ जल पोखरा गांव में जमुना बाग के पास एक ढाबे के पीछे स्थित है और अजय कुमार के खेत में बताया जा रहा है। ग्रामीणों ने सबसे पहले दिन के समय पेड़ से सफेद तरल पदार्थ टपकते हुए देखा। इसके बाद गांव में चर्चा तेज हो गई और धीरे-धीरे आसपास के गांवों से भी लोग मौके पर पहुंचने लगे। कुछ ही समय में यह जगह भीड़ से भर गई।
पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन का केंद्र बना नीम का पेड़
पेड़ के पास अब रोजाना पूजा-अर्चना हो रही है। महिलाओं को भक्ति गीतों पर झूमते हुए देखा जा रहा है। साउंड सिस्टम लगाकर भजन-कीर्तन किए जा रहे हैं और लोग पेड़ पर चढ़ावा भी चढ़ा रहे हैं। नीम का यह पेड़ अब श्रद्धालुओं के लिए एक धार्मिक स्थल जैसा बन गया है।
प्रसाद मानकर लोग कर रहे तरल का सेवन
पुजारी धर्मेंद्र शास्त्री के अनुसार, प्रतिदिन करीब 6 से 7 लीटर तरल पदार्थ पेड़ से निकल रहा है और रोजाना 500 से अधिक श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। लोग इस तरल को प्रसाद के रूप में अपने साथ घर ले जा रहे हैं। सेवन करने वालों का कहना है कि इसका स्वाद नारियल पानी जैसा है। कुछ लोगों ने खुजली और दर्द में राहत मिलने का दावा भी किया है। यहां तक कि गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग भी इसे दवा के रूप में लेने आ रहे हैं।
कृषि विभाग ने बताया प्राकृतिक कारण
कृषि उपनिदेशक का कहना है कि नीम के पेड़ से इस तरह का रस निकलना प्राकृतिक कारणों से भी हो सकता है। जड़ों पर अधिक दबाव और धूप की कमी के कारण ऐसा तरल निकल सकता है। उन्होंने बताया कि धूप निकलने के बाद यह प्रक्रिया अपने आप बंद हो जाएगी। हालांकि वैज्ञानिक वजह बताने के बावजूद गांव में आस्था का माहौल बना हुआ है।
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