यूपी के बाहुबली नेता और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की कानूनी मुश्किलें फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं। पहलवानों के यौन शोषण से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर कोई रोक नहीं लगेगी। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बृजभूषण सिंह की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और उनके वकील को कड़ी फटकार भी लगाई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के तहत तय प्रक्रिया के अनुसार ट्रायल कोर्ट में मामला आगे बढ़ता रहेगा।
हाईकोर्ट ने क्यों लगाई फटकार
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के सामने बृजभूषण सिंह ने याचिका दाखिल की थी। इसमें उन्होंने मांग की थी कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और आरोपों पर ट्रायल कोर्ट में चल रही सुनवाई को रोका जाए। याचिका में यह तर्क दिया गया था कि मामले में कानूनी खामियां हैं और सुनवाई पर रोक लगाई जानी चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट इस दलील से सहमत नहीं हुआ। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर ट्रायल पर रोक लगाने का कोई ठोस आधार नहीं बनता।
ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि निचली अदालत में केस की सुनवाई सामान्य रूप से जारी रहेगी। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि जब तक कोई गंभीर कानूनी वजह सामने नहीं आती, तब तक ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही में दखल नहीं दिया जाएगा। इसी के साथ अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 21 अप्रैल तय कर दी है।
बृजभूषण की बढ़ती मुश्किलें
यह मामला देश के कई नामी पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों से जुड़ा है। पहले ही इस केस को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी चर्चा हो चुकी है। अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि बृजभूषण सिंह को ट्रायल कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़नी ही होगी। कोर्ट के रुख से यह संकेत भी मिला है कि न्यायिक प्रक्रिया में देरी या रोक की कोई संभावना फिलहाल नहीं है।
आगे क्या होगा
अब सभी की नजरें 21 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। उस दिन हाईकोर्ट में याचिका पर आगे की दलीलें सुनी जाएंगी, जबकि ट्रायल कोर्ट में भी केस की कार्यवाही अपने तय समय के अनुसार चलती रहेगी।