भदरसा गैंगरेप केस में सपा नेता मोइद खान बरी, मगर गैंगस्टर एक्ट के कारण अभी जेल में रहेंगे

भदरसा सामूहिक बलात्कार मामले में एसपी नेता मोईद खान को अदालत ने बरी कर दिया है, लेकिन गैंगस्टर एक्ट के तहत वह जेल में ही रहेंगे। परिवार ने सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों के बारे में बताया।

Jan 31, 2026 - 09:17
Jan 31, 2026 - 09:45
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भदरसा गैंगरेप केस में सपा नेता मोइद खान बरी, मगर गैंगस्टर एक्ट के कारण अभी जेल में रहेंगे

उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित भदरसा गैंगरेप कांड में कोर्ट के फैसले के बाद बड़ा अपडेट सामने आया है। मामले में समाजवादी पार्टी के नेता मोइद खान को अदालत ने बरी कर दिया है। हालांकि, इस फैसले के बावजूद मोइद खान की जेल से तत्काल रिहाई नहीं होगी, क्योंकि उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत अलग से मामला दर्ज है। उनके वकील मोहम्मद सईद ने बताया कि गैंगस्टर एक्ट में जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी गई है। इस केस में 19 महीने जेल में रहने के दौरान मोइद खान और उनके परिवार को सामाजिक और आर्थिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

19 महीने की जेल और टूटता परिवार
मोइद खान के बेटे जहीर खान ने बताया कि इन 19 महीनों में उनका परिवार पूरी तरह टूट गया। पिता के जेल जाने के बाद घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई और समाज में उन्हें तिरस्कार झेलना पड़ा। जहीर का कहना है कि इस दौरान सब कुछ बर्बाद हो गया और परिवार को हर स्तर पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

बच्चों और महिलाओं पर पड़ा गहरा असर
जहीर खान ने बताया कि पूरे परिवार को बलात्कारी का परिवार कहकर देखा जाने लगा। उनकी छोटी चचेरी बहन को स्कूल में बच्चों के ताने सुनने पड़े, जिस कारण वह कई महीनों तक स्कूल नहीं जा सकी। परिवार की 66 वर्षीय मां बीमार हैं और उनका इलाज लखनऊ में चल रहा है। जहीर का कहना है कि इतने लंबे समय तक जेल में रहने के दौरान उनके पिता ने जो मानसिक और शारीरिक कष्ट झेला, उसकी भरपाई संभव नहीं है।

गरीब परिवार, नहीं है कोई बड़ी संपत्ति
जहीर खान ने मीडिया में परिवार को अमीर बताए जाने के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि उनका परिवार करोड़पति नहीं है, बल्कि भाड़े पर काम करके रोजी-रोटी चलाता है। पहले वे सूरत में सिलाई का काम करते थे। कोरोना महामारी के दौरान वे भदरसा लौटे और एक बेकरी शुरू की, जो बाद में बुलडोजर कार्रवाई की भेंट चढ़ गई।

जमीन और बेकरी से चलता था घर
जहीर ने बताया कि बेकरी जिस जमीन पर थी, वह अमेरिका में रहने वाले जानकी प्रसाद की थी। उनके सहयोग से बेकरी शुरू हुई थी और उसके संचालन की जिम्मेदारी मोइद खान पर थी। इसी से मिलने वाली आमदनी से पूरा परिवार चलता था। पारिवारिक बंटवारे में मोइद खान को सिर्फ 15 बिस्वा जमीन ही मिली थी।

बहनों को भी झेलना पड़ा अपमान
परिवार में माता-पिता के अलावा चार भाई और तीन बहनें हैं। बहनों की शादी हो चुकी है, लेकिन इस केस के चलते उन्हें भी अपने ससुराल में अपमान का सामना करना पड़ा। बेकरी पर बुलडोजर चलने के बाद परिवार का मुख्य रोजगार भी खत्म हो गया।

राजनीतिक साजिश का आरोप
जहीर खान ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को गलत जानकारी देकर उनके पिता को इस केस में फंसाया गया। कोर्ट के फैसले ने उनके निर्दोष होने की पुष्टि कर दी है। उन्होंने कहा कि मिल्कीपुर उपचुनाव में इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाया गया। जहीर ने साफ कहा कि उनका परिवार राजनीतिक नहीं है और वे केवल मेहनत-मजदूरी कर जीवन चलाने वाले लोग हैं।

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Aniket Prajapati अनिकेत प्रजापति UP News Network असिस्टेंट न्यूज़ एडिटर है। वे 1 साल से ज्योतिष और धार्मिक, बिजनेस, नेशनल, उत्तर प्रदेश, गैजेट्स, हेल्थ आदि से जुड़े मुद्दों को कवर कर रहे हैं। अनिकेत प्रजापति पिछले 1 साल से UP News Network, (Digital) के साथ जुड़े हैं। वह TV 24 Network में भी काम कर चुके हैं। अनिकेत प्रजापति ने भारतीय जनसंचार संस्थान University of Lucknow से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है।