महापाप वाले बयान के बाद अब डिप्टी सीएम ने बटुक ब्राह्मणों से की खास मुलाकात, तिलक - आरती से किया सम्मान
प्रयागराज में बटुक ब्राह्मणों की शिखा खींचने के आरोप पर सियासत तेज हो गई है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात के बाद मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। जानें पूरा घटनाक्रम।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बटुक ब्राह्मणों की शिखा खींचने के आरोप को लेकर सियासी माहौल लगातार गरमाया हुआ है। इसी बीच प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को अपने सरकारी आवास पर कई बटुक ब्राह्मणों से मुलाकात की और उनसे बातचीत की। इससे पहले एक दिन पहले इन लोगों ने दूसरे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से भी मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि अलग-अलग गुरुकुलों से करीब 100 बटुक ब्राह्मण पहुंचे थे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मामला राजनीतिक बयानबाजी का विषय बन गया है और विपक्ष भी सरकार पर हमलावर हो गया है।
डिप्टी सीएम आवास पर मुलाकात और सम्मान
ब्रजेश पाठक के सरकारी आवास पर पहुंचे बटुक ब्राह्मणों का उन्होंने अपनी पत्नी के साथ टीका लगाकर स्वागत किया। इस दौरान बटुक ब्राह्मणों ने उपमुख्यमंत्री पर पुष्प वर्षा भी की। बताया गया कि यह मुलाकात पहले तय थी, लेकिन बुधवार को संभव नहीं हो पाई थी, इसलिए गुरुवार को उन्हें बुलाया गया। आए हुए बटुक ब्राह्मणों ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर आवाज उठाने के लिए उपमुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है। उनका कहना था कि शिखा ब्राह्मणों की धरोहर है और उसका सम्मान होना चाहिए।
पहले केशव मौर्य से भी हुई थी मुलाकात
बुधवार को लखनऊ स्थित एक गुरुकुल के बटुक ब्राह्मण पहले ब्रजेश पाठक से मिलने पहुंचे थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद वे केशव प्रसाद मौर्य से मिले। गुरुकुल प्रबंधन से जुड़े लोगों ने बताया कि मौर्य ने उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार उनके साथ है और ब्राह्मण समाज का सम्मान करती है।
विपक्ष का हमला और इस्तीफे की मांग
ब्रजेश पाठक के बयान पर शिवपाल सिंह यादव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर उन्हें घटना पर इतनी आपत्ति है तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह उसी सरकार का हिस्सा हैं, जिसके कार्यकाल में यह घटना हुई है।
जानें क्या है पूरा मामला
यह विवाद 18 जनवरी को माघ मेला के दौरान हुई घटना से जुड़ा है। उस दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान के लिए संगम ले जाते समय पुलिस ने रोक दिया था। आरोप है कि उनके साथ आए बटुक ब्राह्मणों की चोटी खींची गई और दुर्व्यवहार किया गया। स्वामी पक्ष ने इस संबंध में तस्वीरें भी दिखाईं और दावा किया कि घटना अधिकारियों की मौजूदगी में हुई। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
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