करोड़ों की निगरानी फेल: जिला जेलों से कैदी फरार, सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
उत्तर प्रदेश की जिला जेलों में लगे सीसीटीवी कैमरे और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था नाकाम साबित हुई, जब कन्नौज और अयोध्या की जेलों से कैदी फरार हो गए, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गईं।
उत्तर प्रदेश की जिला जेलों की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे और भारी संख्या में तैनात सुरक्षा बल भी बंदियों को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं। हाल ही में कन्नौज और अयोध्या जिला जेल से कैदियों के फरार होने की घटनाओं ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात ऐसे हैं कि अत्याधुनिक तकनीक के बावजूद अपराधियों ने आसानी से जेल की चहारदीवारी फांद ली और निगरानी व्यवस्था मूकदर्शक बनी रही।
सीसीटीवी कैमरे बने ‘रतौंधी’ का शिकार
लखनऊ समेत प्रदेश की कई जेलों में करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इनका उद्देश्य हर गतिविधि पर नजर रखना था, लेकिन हकीकत यह है कि ये कैमरे बीमारी जैसे हालात में नजर आ रहे हैं। कन्नौज और अयोध्या जिला जेल में बंद अमेठी निवासी गोलू अग्रहरि और सुल्तानपुर निवासी शेर अली ने इसी कमजोर व्यवस्था का फायदा उठाया। एक बंदी हत्या के प्रयास के मामले में और दूसरा दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद था। भारी सुरक्षा के बावजूद दोनों फरार हो गए।
लापरवाही पर अफसर नपे, लेकिन सवाल कायम
घटना के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ जेल अधीक्षक उदय प्रताप मिश्रा, जेलर जे.के. यादव, डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी, एक हेड वार्डर और तीन जेल वार्डरों को सस्पेंड कर दिया। हालांकि इससे बड़ा सवाल यह है कि जब जेल की चहारदीवारी फौलाद जैसी है और सैकड़ों की संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, तो बंदी भाग कैसे गए।
पहले भी हो चुकी हैं गंभीर घटनाएं
उत्तर प्रदेश में कुल 74 जेलें हैं, जिनमें आधा दर्जन केंद्रीय जेलें और बाकी जिला कारागार हैं। जिला जेलों में कई बार सुरक्षा में चूक सामने आ चुकी है। इससे पहले भी कई जेलों से बंदी फरार हो चुके हैं। बागपत समेत अन्य जेलों में कैदियों के बीच हिंसक घटनाएं हुई हैं। जिला जेल में ही माफिया मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या जैसी गंभीर घटना भी हो चुकी है।
सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश
कन्नौज और अयोध्या जेल की घटनाओं के बाद एक बार फिर जेल प्रशासन की नींद टूटी है। जेलों में गश्त बढ़ाने और निगरानी सख्त करने के आदेश दिए गए हैं। महानिदेशक कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं पीसी मीना ने अयोध्या की घटना को गंभीरता से लेते हुए सभी जेलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और कड़े निर्देश जारी किए हैं।
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