ड्रोन के जरिए भारत में आतंकी हमले की तैयारी! NIA ने अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों को दबोचा
एनआईए ने भारत के खिलाफ कथित आतंकी साजिश में शामिल एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग ड्रोन तस्करी और विद्रोही समूहों को ट्रेनिंग देने में शामिल थे।
भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश का खुलासा करते हुए सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों में एक अमेरिकी नागरिक और छह यूक्रेन के नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसी के अनुसार इन लोगों पर अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने, हथियार और ड्रोन युद्ध की ट्रेनिंग देने तथा यूरोप से ड्रोन के अवैध आयात में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक इन सभी को भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने के आरोप में पकड़ा गया है। इनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अलग-अलग हवाई अड्डों से हुई गिरफ्तारी
जांच एजेंसियों के अनुसार अमेरिकी नागरिक को नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पर इमिग्रेशन ब्यूरो ने हिरासत में लिया। वहीं तीन यूक्रेनी नागरिकों को चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से और तीन अन्य को इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से पकड़ा गया। सभी संदिग्धों को दिल्ली लाकर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की हिरासत में भेजा गया था। बाद में सोमवार को उनकी रिमांड बढ़ाकर 27 मार्च तक कर दी गई है ताकि उनसे गहन पूछताछ की जा सके।
ड्रोन तस्करी और विद्रोही समूहों से संपर्क
जांच में सामने आया है कि आरोपी यूरोप से भारत के रास्ते म्यांमार तक बड़ी मात्रा में ड्रोन के अवैध आयात में शामिल थे। बताया जा रहा है कि इन ड्रोन का इस्तेमाल हथियारबंद जातीय समूहों द्वारा किया जाना था। सूत्रों के अनुसार ये समूह भारत में प्रतिबंधित विद्रोही संगठनों को हथियार, आतंकी उपकरण और ट्रेनिंग देकर मदद कर रहे थे। इस कारण मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
मिजोरम और म्यांमार कनेक्शन
जांच एजेंसियों को पता चला है कि ये सभी आरोपी पहले मिजोरम पहुंचे थे और बाद में वहां से म्यांमार चले गए। मिजोरम की लगभग 500 किलोमीटर लंबी सीमा म्यांमार के चिन और रखाइन राज्यों से लगती है, जिसे इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है। नियमों के अनुसार विदेशी नागरिकों को मिजोरम जाने के लिए फॉरेनर्स रीजनल ऑफिस से विशेष परमिट लेना होता है। जांच में यह भी सामने आया है कि म्यांमार पहुंचने के बाद आरोपियों ने वहां सक्रिय कुछ ऐसे जातीय समूहों से संपर्क किया जो भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े बताए जाते हैं।
पूछताछ में हो सकते हैं बड़े खुलासे
एनआईए ने कोर्ट में कहा है कि आरोपियों से पूछताछ के जरिए पूरे षड्यंत्र का खुलासा करना जरूरी है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं। जांच के दौरान मोबाइल डेटा की गहन जांच, फंडिंग के स्रोत का पता लगाना और सोशल मीडिया खातों का तकनीकी विश्लेषण भी किया जाएगा। एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ में कई और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
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