यूपी में सरकारी अस्पताल खुद बीमार, कहीं बच्चों का डॉक्टर नहीं तो कहीं धूल खा रही एक्स-रे मशीन, पानी के लिए भी भटक रहे मरीज
अमेठी के सरकारी अस्पतालों में इलाज से ज्यादा रेफर होने की कहानी सुनाई दे रही है। कहीं नवजात बच्चों के लिए डॉक्टर नहीं हैं, तो कहीं एक्स-रे मशीन ऑपरेटर के अभाव में बंद पड़ी है। गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए भटकना पड़ रहा है और मरीजों को मामूली बीमारी में भी जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। आखिर क्यों करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्था मरीजों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही? पढ़िए पूरी खबर...
अमेठी। उत्तर प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बीच अमेठी जिले की तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) विशेषज्ञ डॉक्टरों, तकनीकी स्टाफ और जरूरी संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कई अस्पताल मरीजों के इलाज के बजाय केवल रेफरल यूनिट बनकर रह गए हैं। नवजात बच्चों से लेकर गर्भवती महिलाओं तक, हर वर्ग के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
बच्चों के डॉक्टर नहीं, बीमार नवजात सीधे रेफर
सीएचसी अमेठी में सबसे बड़ी समस्या बाल रोग विशेषज्ञ की अनुपस्थिति है। अस्पताल में बच्चों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण नवजात और गंभीर रूप से बीमार बच्चों को तुरंत जिला अस्पताल भेज दिया जाता है। स्थिति यह है कि प्रसव कराने वाली महिला चिकित्सक भी सप्ताह में केवल तीन दिन ही उपलब्ध रहती हैं। उनके अनुपस्थित रहने पर सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले बच्चों को भी रेफर करना पड़ता है।
बिजली गई तो पंखा भी भगवान भरोसे
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली केवल डॉक्टरों तक सीमित नहीं है। अस्पताल के पुराने भवन में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने पर जनरेटर का सहारा लिया जाता है, लेकिन कई बार जनरेटर भी काम नहीं करता। ऐसे में मरीज और उनके परिजन गर्मी में हाथ से पंखा झलने को मजबूर हो जाते हैं। इमरजेंसी वार्ड में सोलर ऊर्जा से चलने वाले पंखे लगाए गए हैं, लेकिन धूप कम होने पर उनकी उपयोगिता भी समाप्त हो जाती है।
पानी के लिए भटकते मरीज
अस्पताल परिसर में स्थापित आरओ वाटर सिस्टम भी अक्सर खराब रहता है। इसके चलते मरीजों और तीमारदारों को पीने के साफ पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं की यह कमी मरीजों की परेशानी को और बढ़ा रही है।
गर्भवती महिलाओं के लिए भी मुश्किलें
सीएचसी अमेठी में नियमित अल्ट्रासाउंड सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को बार-बार निजी केंद्रों या जिला अस्पताल जाना पड़ता है। इससे आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ-साथ समय की भी बर्बादी होती है।
पीएचसी में प्रसव की सुविधा तक नहीं
सीएचसी अमेठी के अंतर्गत आने वाली पीएचसी गोसाईगंज और विशेषरगंज में प्रसव की कोई व्यवस्था नहीं है। नतीजतन, गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सीएचसी या जिला अस्पताल जाना पड़ता है। वहीं पीएचसी अरसहनी में स्टाफ नर्स का पद रिक्त होने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
भादर में विशेषज्ञ डॉक्टरों के कई पद खाली
सीएचसी भादर में बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, सर्जन और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ जैसे महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। यहां अल्ट्रासाउंड सुविधा नहीं है। एक्स-रे मशीन मौजूद होने के बावजूद मरीज उसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। अस्पताल में केवल सामान्य जांचें ही संभव हैं, जबकि अन्य जांचों के लिए मरीजों को निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है।
जामो में ऑपरेटर नहीं, धूल खा रही एक्स-रे मशीन
सीएचसी जामो की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। यहां महिला रोग विशेषज्ञ की कमी के चलते महिलाओं को जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। अस्पताल में एक्स-रे मशीन तो लगी है, लेकिन ऑपरेटर के अभाव में महीनों से उपयोग नहीं हो पा रही। वार्ड बॉय, फार्मासिस्ट और सफाई कर्मियों की कमी भी स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर रही है।
तीन डॉक्टरों के भरोसे लाखों लोगों का इलाज
शुकुल बाजार सीएचसी में केवल तीन डॉक्टरों के भरोसे क्षेत्र की बड़ी आबादी का इलाज किया जा रहा है। यहां बुखार, सर्दी-जुकाम और पेट दर्द जैसी सामान्य बीमारियों का इलाज तो हो जाता है, लेकिन गंभीर मरीजों को तुरंत रेफर कर दिया जाता है। डिजिटल एक्स-रे सुविधा होने के बावजूद अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
संग्रामपुर में अल्ट्रासाउंड की कमी
सीएचसी संग्रामपुर में 30 बेड की व्यवस्था और प्रसूता महिलाओं व नवजातों के लिए अलग सुविधाएं उपलब्ध हैं। पेयजल और बैठने की व्यवस्था भी है, लेकिन यहां अल्ट्रासाउंड सुविधा न होने के कारण गर्भवती महिलाओं को दूसरे अस्पतालों में भेजना पड़ता है।
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था
जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों की तस्वीर यह संकेत देती है कि सरकारी अस्पतालों में संसाधनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। इसका सीधा असर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी सीएचसी और पीएचसी में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है और निरीक्षण के दौरान कमियां मिलने पर सुधार भी कराया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत फिलहाल इन दावों से काफी अलग नजर आती है। जब तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार नहीं होता, तब तक अमेठी के सरकारी अस्पतालों में इलाज से ज्यादा रेफरल ही मरीजों की नियति बना रहेगा।
रिपोर्ट -: बृजेश मिश्रा
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